यहां विदेशी सीखने आते हैं जरबेरा की खेती के गुर

यहां विदेशी सीखने आते हैं जरबेरा की खेती के गुरgaonconnection

बाराबंकी। शुभ मौकों पर जब आप अपने प्रियजनों को गुलदस्ता भेंट करते हैं तब उसकी खूबसूरती बढ़ाने में जरबेरा के फूलों का सबसे बड़ा योगदान होता है।

बाराबंकी जिला अब इस खेती का सबसे विशाल केंद्र होता जा रहा है। देश के अन्य राज्यों ही नहीं विदेशों तक से लोग बाराबंकी में जरबेरा की खेती के गुर सीखने के लिए आने लगे हैं।

नाबार्ड जिला प्रबंधक शैफाली अग्रवाल ने बताया कि नाबार्ड बहुत सी लाभकारी योजनाएं संचलित करती है, इस योजना के माध्यम से प्रदेश के अन्य राज्यों में जरबेरा फूल की खेती के लिए किसानों को बताया जाएगा। फायदा और बाजार की जानकारी दी जाएगी। नाबार्ड अपनी ओर से अन्य राज्यों में स्कीम लागू करेगी। 

देवा ब्लॉक के रहने वाले मोईन्द्दीन (38 वर्ष) बताते हैं, “एक एकड़ में जरबेरा की खेती कर रहे हैं प्रत्येक वर्ष 15 लाख का मुनाफा होता है। 60 लाख की लागत लगती है। इसमें पॉली हाउस बनाकर जरबेरा के पौध लगाने पड़ते हैं। यह पौधे तीन से चार वर्षों तक चलते हैं।” इसके साथ ही मोईनुद्दीन अपने साथ-साथ और भी किसानों को जरबेरा की खेती का प्रशिक्षण दे रहे हैं जिससे वो किसान इसका लाभ उठा सके। अभय सिंह बीकेटी के रहने वाले जो कि प्रशिक्षण लेकर बड़े पैमाने पर खेती कर रहे हैं। सुनील वर्मा, सुधीर वर्मा, प्रतीक जो बड़े और छोटे पैमाने पर खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं।

किसानों के लिए जरबेरा खुशियों की सौगात

रामनगर तहसील के बलिया गाँव के रहने वाले किसान संदीप वर्मा (30 वर्ष) ने बताया कि, वो दो बीघा में खेती कर रहे हैं। इस खेती से वो प्रत्येक साल आठ लाख रुपए तक कमा लेते हैं। इसमें पाली हाउस में से लगाकर 30 लाख का खर्च आया था। एक बार पौधे लगाने से चार वर्षों तक चलते हैं। फूल तैयार हो जाने के बाद बाजारों में भेजा जाते हैं। एक फूल की 5 रुपए से 10 लाख रुपए तक बिकता है। प्रतिदिन दो से तीन हजार फूल निकलते हैं। प्रति वर्ष आठ से 10 लाख का शुद्ध मुनाफा हो जाता है।

विदेशी फूल से इस समय लाखों रुपए कमा रहे हैं। जरबेरा की खेती से क्या लाभ है। ये देखने-सीखने और देखने के लिए 12 राज्यों के नाबार्ड अफसर पहुंचे। पंजाब, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, आंद्र प्रदेश, तमिलनाडु आदि प्रदेशों के नाबार्ड प्रबंधक आए हुए थे। इन लोगों ने जरबेरा की खेती देखी और जानकारी ली। जरबेरा की खेती के लिए उद्यान विभाग द्वारा 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है।

नाबार्ड जिला प्रबंधक शैफाली अग्रवाल ने बताया कि नाबार्ड बहुत सी लाभकारी योजनाएं संचालित करती है, इस योजना के माध्यम से प्रदेश के अन्य राज्यों में जरबेरा फूल की खेती के लिए किसानों को बताया जाएगा। फायदा और बाजार की जानकारी दी जाएगी। नाबार्ड अपनी ओर से अन्य राज्यों में स्कीम लागू करेगी।

प्रबंधकों के हाईटेक प्रशिक्षण में जरबेरा की खेती को भी शामिल किया गया था। अन्य प्रदेशों में किसानों को भी जरबेरा की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए जिले में भम्रण किया और बाराबंकी की नाबार्ड जिला प्रबंधक शैफाली अग्रवाल के साथ-साथ मध्य प्रदेश, पंजाब, केरल, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड के प्रतिनिधियों ने यहां निरीक्षण किया। उन्होंने इसको देखने के बाद कहा कि वे अपने राज्यों में जरबेरा की खेती के लिए किसानों को प्रेरित करेंगे।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

 

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