योग से रखें जीवन को निरोग

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योग कोई व्यायाम नहीं है बल्कि यह जीवन जीने का तरीका है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी कई तरह के रोगों और स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए योग करने की सलाह देता है। अपनी इसी खूबी के कारण योग दुनिया के तमाम देशों में अपना लिया है। लखनऊ विश्वविद्यालय के योग एवं नेचुरोपैथी के प्राध्यापक डॉ. उमेश शुक्ला बताते हैं ‘‘योग का शाब्दिक अर्थ जोड़ होता है, आध्यात्मिक दृष्टिकोण से मनुष्य और परमात्मा का जोड़, स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से शरीर और मानसिक का तालमेल योग है। जबकि लोग आसनों और प्राणयाम को योग मानते है, योग एक बहुत विस्तृत विषय है जिसका छोटा का हिस्सा आसन है जो शरीर को स्वस्थ्य और निरोग रखने के लिए किया जाता है।’’

भारत में योग पुराने जमाने से स्वस्थ्य रहने का एक जीवन सूत्र रहा है लेकिन हाल के दिनों में बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर समेत कई गुरुओं ने इसे और प्रचलित किया है। योग को बढ़ावा देने के लिए कई शहरों में कैंप लगाकर लोगों का इसका अभ्यास कराया गया। 

डॉ. उमेश बताते हैं, ‘‘आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी कई रोगों में योगासन की सलाह देती है, इनमें खासकर अवसाद के मरीजों को मेडिटेशन करने की सलाह दी जाती है। मेडिटेशन का मतलब ध्यान केंद्रित करना होता है। इसमें व्यक्ति चारों तरफ से ध्यान हटा कर एक ओर ध्यान केंद्रित करने का अभ्यास करता है।’’

डॉ. उमेश बढ़ती हुई बीमारियों के लिए आज के आपाधापी वाले जीवन को दोषी मानते हैं। वह कहते हैं, ‘‘व्यक्ति पर कई तरह के दबाव होते है चाहे वह विद्यार्थी हो, व्यवसायिक हो या नौकरी पेशे वाले हो। कई स्कूलों ने बच्चों के लिए योग शुरु कर भी दिए हैं।’’ योग मुद्रा, ध्यान और योग में श्वसन की विशेष क्रियाओं द्वारा तनाव से राहत मिलती है, योग मन को विभिन्न विषयों से हटाकर स्थिरता प्रदान करता है और कार्य विशेष में मन को स्थिर करने में सहायक होता है। यही कारण है कि कई विदेश में योग को अपनाया गया है। यूरोपीय देशों, अमरीका समेत कई विकसित देशों ने योग के कई केंद्र खोले हैं जहां भारी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया है।

विश्व के कई प्रख्यात विश्वविद्यालय और अस्पतालों में योग सिखाने वाले केद्रों की स्थापना की गई है। इन केंद्रों में सबसे ज्यादा प्राणायाम का अभ्यास कराया जाता है। प्राणयाम की अहमियत बताते हुए डॉ. शुक्ला का कहना है, ‘‘प्राणयाम शरीर और मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखता है। प्राणयाम से व्यक्ति अपने सांसों पर नियंत्रण करने का अभ्यास करता है। इससे उसे अपना पूरा ध्यान सांसों की गति, समय से सांस खींचने और छोड़ने पर केंद्रित करना होता है। इससे शारीरिक गतिविधि एक लय में चलती है। जिससे ध्यान केंद्रित करने, फेफड़ों का व्यायाम, शरीर और मन में ताल मेल का अभ्यास होता है।’

योग को न केवल हमारे शरीर को बल्कि मन और आत्मिक बल को सुदृढ़ और संतुष्टि प्रदान करता है। दैनिक जीवन में भी योग के कई फायदे हैं। योग स्त्री, पुरुष, बच्चे, युवा, वृद्ध सभी के लिए फायदेमंद है। शरीर क्षमताओं एवं लोच के अनुसार योग में किसी परिवर्तन और बदलाव किया जा सकता है। 

मन व भावनाओं पर योग

जीवन में सकारात्मक विचारों का होना बहुत आवश्यक है। निराशात्मक विचार असफलता की ओर ले जाता है, योग से मन में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। योग से आत्मिक बल प्राप्त होता है और मन से चिंता, विरोधाभास एवं निराशा की भावना दूर हो जाती है। मन को आत्मिक शांति एवं आराम मिलता है जिससे मन में प्रसन्नता एवं उत्साह का संचार होता है। इसका सीधा असर व्यक्तित्व एवं सेहत पर होता है।

शरीर में लचीलेपन के लिए

योग से शरीर मजबूत और लचीला होता है, योग मांसपेशियों को सुगठित और शरीर को संतुलित रखता है। सुगठित और संतुलित और लोचदार शरीर होने से कार्य क्षमता में भी वृद्धि होती है। कुछ योग मुद्राओं से शरीर की हड्डियां भी पुष्ट और मजबूत होती हैं। यह अस्थि सम्बन्धी रोग की संभावनाओं को भी कम करता है।

मानसिक क्षमताओं का विकास

स्मरण शक्ति व बौद्धिक क्षमता जीवन में प्रगति के लिए प्रमुख साधन माने जाते हैं। योग से मानसिक क्षमताओं का विकास होता है व स्मरण शक्ति पर गुणात्मक प्रभाव होता है। योग मुद्रा और ध्यान मन को एकाग्र करने में सहायक होता है। एकाग्र मन से स्मरण शक्ति का विकास होता है, प्रतियोगिता परीक्षाओं में तार्किक क्षमताओं पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। योग तर्क शक्ति का भी विकास करता है एवं कौशल को बढ़ता है। योग की क्रियाओं द्वारा तार्किक शक्ति एवं कार्य कुशलता में गुणात्मक प्रभाव होने से आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

सेहत और योग

योग शरीर को सेहतमंद बनाए रखता है और कई प्रकार की शरीरिक और मानसिक परेशानियों को दूर करता है। योग श्वसन क्रियाओं को सुचारू बनाता है, योग के दौरान गहरी सांस लेने से शरीर तनाव मुक्त होता है, योग से रक्त संचार भी सुचारू होता है और शरीर से हानिकारक टाक्सिन निकल आते हैं। यह थकान, सिरदर्द, जोड़ों के दर्द से राहत दिलाता है एवं ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखने में भी सहायक होता है।

तनाव से मुक्ति

तनाव अपने आप में एक बीमारी है जो कई अन्य बीमारियों को निमंत्रण देता है। इस तथ्य को चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार करता है। योग का एक महत्वपूर्ण फायदा यह है कि यह तनाव से मुक्ति प्रदान करता है। योग मुद्रा, ध्यान और योग में श्वसन की विशेष क्रियाओं द्वारा तनाव से राहत मिलती है, योग मन को विभिन्न विषयों से हटाकर स्थिरता प्रदान करता है और कार्य विशेष में मन को स्थिर करने में सहायक होता है तनाव मुक्त होने से शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, कार्य करने की क्षमता भी बढ़ती है।

योग का इतिहास 

भारतीय योग जानकारों के अनुसार योग की उत्पत्ति भारत में लगभग 5000 वर्ष से भी अधिक समय पहले हुई थी। योग के ऐतिहासिक प्रमाणों से जुड़ी सबसे आश्चर्यजनक खोज 1920 के शुरुआत में हुई। 1920 में पुरातत्व वैज्ञानिकों ने सिंधु सरस्वती सभ्यता को खोजा था जिसमें प्राचीन हिंदू धर्म और योग की परंपरा होने के सबूत मिलते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता को 3300-1700 ईसा पूर्व पुरानी है। योग पर लिखा गया सर्वप्रथम सुव्यवस्थित ग्रंथ है “योगसूत्र”, इसे महर्षि पतंजलि ने लिखा था। पतंजलि ने अष्टांग योग में योग को आठ सूत्रों में बताया गया है। यह आठ अंग के अपने-अपने उप अंग भी हैं। वर्तमान में योग के तीन ही अंग प्रचलन में हैं आसन, प्राणायाम और ध्यान।

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