यूपी: औषधीय पौधों की खेती से उपजाऊ बनेंगी जमीनें

यूपी: औषधीय पौधों की खेती से उपजाऊ बनेंगी जमीनेंSODIC LAND medicinal farming GAON CONNECTION

आनंद त्रिपाठी 

लखनऊ। अब किसानों को औषधीय पौधों की खेती करने से मुनाफा तो होगा ही, साथ ही औषधीय पौधे उनके अनुपजाऊ, ऊसर जमीन को भी उपजाऊ बनाएंगे।

उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम ने ऊसर सुधार के लिए विश्व बैंक की सहायता से प्रदेश में उत्तर प्रदेश सोडिक लैंड रिक्लेमेशन तृतीय परियोजना चलायी है। परियोजना के माध्यम से प्रदेश के 29 ज़िलों में एक लाख तीस हज़ार हेक्टेयर ऊसर भूमि सुधार का लक्ष्य रखा गया है। केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध संस्थान की सहायता से इन 29 ज़िलों के किसानों को नींबू घास, पामारोजा जैसे पौधों की पचास हज़ार पौधे बांटे गए हैं। ये पौधे ऊसर भूमि से क्षारीयता कम करके उसे उपजाऊ बनाने में मदद करते हैं।

केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध संस्थान के वैज्ञानिक संजय कुमार बताते हैं, ‘‘ऊसर जमीन की मिट्टी बहुत क्षारीय होती है। जब इस जमीन में लेमन ग्रास के पौधे लगाये जाते हैं तो कुछ साल में वो उस खेत की मिट्टी को सामान्य कर देता है। ये फसलें चार साल तक खेत में रहती हैं इतने दिनों में खेत उपजाऊ हो जाता है।"

वर्ष 1993 में उत्तर प्रदेश में कुल 12 लाख हेक्टेअर जमीन ऊसर थी। उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम द्वारा चलायी जा रही है। कई योजनाओं के बाद अभी प्रदेश में कुल चार लाख हेक्टेयर जमीन ऊसर और अनुपजाऊ है।

उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम के प्रबंधक डॉ. केबी त्रिवेदी कहते हैं, ‘‘ऊसरीली ज़मीन में हमेशा फसल लगी होनी चाहिए अगर जमीन खाली होती है तो मिट्टी की क्षारीयता बढ़ जाती है और खेत किसी काम के नहीं रहते हैं। नींबू घास और पामारोजा जैसी फसलें कुशा प्रजाति की फसलें आसानी से ऊसर जमीन में भी तैयार हो जाती हैं और ये फसलें चार-पांच साल तक खेत में लगी रहती हैं, जिससे मिट्टी का पीएच सामान्य हो जाता है। इससे अनुपजाऊ खेत भी उपजाऊ बन जाते हैं।"

डॉ. त्रिवेदी आगे बताते हैं, "अभी उन किसानों को पौधे दे दिये गए हैं जिनसे पौधों की नर्सरी डाल दी गयी है। बरसात तक एक पौधों से कई पौधे तैयार हो जाएंगे। जिन्हें किसान ऊसर अपने ऊसर खेत में लगाएगा।" 

परियोजना के लिए चयनित 29 ज़िले

अलीगढ़, फिरोजाबाद, मैनपुरी, फर्रूखाबाद, औरैया, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर, इलाहाबाद, कन्नौज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, गाजीपुर, जौनपुर, इटावा, भदोही, आजमगढ़, एटा, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, सुलतानपुर, बाराबंकी, कांशीराम नगर, बुलंदशहर, अमेठी, और अम्बेडकरनगर। 

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