यूपी का पहला आदर्श चमड़ा प्रशिक्षण केंद्र बदहाल

यूपी का पहला आदर्श चमड़ा प्रशिक्षण केंद्र बदहालगाँव कनेक्शन

लखनऊ। युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए बक्शी का तालाब में आदर्श प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र (लेदर सेंटर) की स्थापना की गई थी पर प्रशिक्षण की उचित व्यवस्था न होने और उसमें लगी मशीनों के जर्जर होने के कारण छात्रों को कोई भी लाभ नहीं मिल पा रहा है, साथ ही केंद्र की स्थिति भी खराब पड़ी हुई है।

नीदरलैंड सरकार के आर्थिक और तकनीकी सहयोग से आदर्श प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र (लेदर सेंटर) को लखनऊ जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर बक्शी के तालाब ब्लॉक के चंद्रिका देवी रोड पर 1960 में बनाया गया था। यहां पशु शव उपयोग, चमड़ा शोधन और जूता निर्माण एवं चमड़ा उपयोगी ट्रेडों में युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है।

उन्नाव जिले से केंद्र में प्रशिक्षण लेने आए मोहम्मद शादाब (21 वर्ष) बताते हैं, ‘‘हमको यहां पर प्रशिक्षण लेते हुए एक साल हो गया है पर नई तकनीकों को नहीं सीख पाए हैं जो मशीनें ठीक हैं उनसे ही सीख रहे हैं। जब प्रैक्टिकल होता है तब जिन रासायनों की जरूरत पड़ती है वो भी समय से नहीं मिल पाते हैं। युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए हर ट्रेड में 50-60 मशीनें हैं लेकिन लेकिन चल सिर्फ पांच मशीने ही रही हैं।

वर्तमान समय में 60 युवा चमड़ा सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे हैं। केंद्र में दलित युवकों के लिए 50 प्रतिशत तथा पिछड़ी जाति के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को 200 रूपए मासिक छात्रवृत्ति और छात्रावास की सुविधा निःशुल्क मिलती है। केंद्र के सर्टिफिकेट की सरकारी व निजी क्षे़त्र में अच्छी मान्यता होने की वजह से प्रदेश भर के युवक यहां से ट्रेनिंग लेने के लिए इच्छुक रहते हैं। वर्तमान समय में इसका संचालन पशुपालन विभाग द्वारा किया जा रहा है। 

पिछले कई वर्षों से युवाओं को ट्रेनिंग देने वाले प्रशिक्षक राजेश कुमार कनोजिया बताते हैं, ‘‘स्वरोजगार के लिए इस केंद्र को स्थापित किया गया था पर अब इसकी स्थिति खराब हो चुकी है इससे काफी नुकसान भी हो रहा है जो उत्पादन हम कर सकते हैं उतना भी नहीं हो पा रहा है। पहले हर महीने चार से पांच कुंतल उत्पादन किया जाता था पर अब यह उत्पादन पूरे साल भर में भी नहीं हो पाता है।’’

राजेश आगे बताते हैं, ‘‘अगर नई तकनीक से युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाए तो अच्छे से उत्पादन किया जा सकता है और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षित भी किया जा सकता है।’’

इस बारे में जब केंद्र के प्रधानाचार्य डॉ भवानी बक्शी से बात की तो उन्होंने बताया, ''ये प्रदेश का पहला चमड़ा केंद्र है केंद्र को सही कराने के लिए हम कई वर्षों से काम कर रहे हैं। इसके लिए आठ करोड 17 लाख रूपए की स्वीकृति भी मिल चुकी है पर भारत सरकार की स्वीकृति न मिल पाने के कारण काम रूका हुआ है। इसके लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं।’’

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