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यूपी के 11 ज़िलों में हर मां के चार बच्चे

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नई दिल्ली (भाषा)। प्रदेश के 11 ज़िलों में हर महिला के औसतन चार बच्चे हैं। इन ज़िलों में टीएफआर (प्रति महिला जन्म लेने वाले बच्चों की औसत संख्या) चार प्रतिशत से ऊपर है जबकि भारत में टीएफआर लक्ष्य 2.1 प्रतिशत है।

देश के 23 ज़िलों में कुल जन्म दर चार प्रतिशत से ऊपर है। इन ज़िलों में से 11 ज़िले प्रदेश के हैं। ये जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, “आबादी स्थिरता को हासिल करने के लिए सौ से अधिक जिलों में सूक्ष्म नियोजन की जरूरत है।”

नड्डा ने विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर ‘‘जिम्मेदारी निभाओ, प्लान बनाओ’’ विषयक एक राष्ट्रीय कार्यशाला में कहा , “जिन ज़िलों में टीएफआर (कुल जन्म दर) चार प्रतिशत से ऊपर है, वहां विशेष ध्यान देने की जरूरत है। देश में 123 ज़िले ऐसे हैं जहां टीएफआर तीन से 3.9 प्रतिशत के बीच है। इन 123 ज़िलों के साथ ही 23 और ज़िलों पर ध्यान देने और रणनीति बनाने की आवश्यकता है।”

उन्होंने कहा कि हम सलाह देंगे कि हर ज़िले के लिए सूक्ष्म नियोजन पर गौर करना चाहिए और कारणों का पता लगाना चाहिए। अगर हम कारणों का पता लगा लेते हैं तो उनका हल कर सकते हैं। हम सबके लिए एक तरह की योजना नहीं बना सकते। टीएफआर प्रति महिला जन्म लेने वाले बच्चों की औसत संख्या है और भारत में टीएफआर लक्ष्य 2.1 प्रतिशत है। नड्डा ने कहा कि हर ज़िले में कारणों में भिन्नता हो सकती है और इनकी वजह अपर्याप्त बुनियादी ढांचा, सामाजिक या सांस्कृतिक कारण और शिक्षा हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि हर ज़िले की अपनी खासियत है। इसलिए सूक्ष्म नियोजन की जरुरत है। अगले दो-तीन महीनों में, हम रणनीति बनाते हैं और हल की ओर बढ़ते हैं, तो अगले साल जब हम जनसंख्या दिवस पर मिलेंगे तो हमारे पास एक जवाब होगा। 

परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी कम

परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी में कमी हुई है और इसके कारण का विश्लेषण किया जाना चाहिए और रणनीति में इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि परिवार कल्याण के दायरे में किस प्रकार पुरुषों को लाया जाए। टीएफआर को 2.1 प्रतिशत तक लाने के लक्ष्य को चुनौती बताते हुए मंत्री ने कहा कि जहां तक शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर का सवाल है, भारत में गिरावट की दर विश्व औसत से तेज है।’’

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