यूपी के 16 लाख बच्चे नहीं जा रहे स्कूल

Swati ShuklaSwati Shukla   29 Jun 2016 5:30 AM GMT

यूपी के 16 लाख बच्चे नहीं जा रहे स्कूलgaonconnection

लखनऊ। दो दिन बाद स्कूल खुलने वाले हैं, लेकिन इस बार भी प्रदेश के 16 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा पाएंगे जबकि अप्रैल महीने से ही बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्कूल न जाने वाले बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए डोर-टू डोर नामांकन शुरू कर दिया था।

प्रदेश में इतनी अधिक संख्या में स्कूल न जाने वाले बच्चों का खुलासा मंगलवार को यूनिसेफ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हुआ। कार्यक्रम में यूनिसेफ ने ‘द स्टेट ऑफ द वार्ड चाइल्ड रिपोर्ट 2016’ (ए फेयर चान्स फॉर ऐवरी चाइल्ड) का विमोचन किया। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 61 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। वहीं प्रदेश के 16 लाख बच्चे भी इस सत्र में स्कूल नहीं जा पाएंगे। 

जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर काकोरी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय दसदोई में कक्षा पांच में पढ़ने वाले शिवगौतम ने सरकारी स्कूल में अपना नाम तो लिखवा लिया है पर पढ़ने नहीं जाता। उसने बताया, “पापा नहीं हैं तो जानवरों के साथ-साथ खेती की पूरी जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। कभी-कभी स्कूल जाते हैं खाना खाने।” शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 1.98 लाख प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय है जिनमें 1.96 करोड़ बच्चे विद्यालय जाते हैं।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश चीफ यूनिसेफ नीलोफर पॉजेंड ने रिपोर्ट के बारे में बताया, “बच्चों का स्कूल में रहना बहुत जरूरी है, इसके लिए प्रदेश सरकार शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए प्रयास कर रही है। यही नहीं बड़े पैमाने पर बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही है उसके लिए यूनिसेफ और सरकार दोनों ही मिलकर प्रयास कर रहे हैं। शिक्षा को तभी बढ़ावा मिलेगा जब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को एक समान रखा जाए।” 

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीआरटी) के संयुक्त निदेशक अजय कुमार ने कहा, “प्रदेश में बहुत अधिक संख्या में बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे। इसका सबसे बड़ा कारण गरीबी है। सभी बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए बहुत सी योजनाएं चलाई जा रही हैं। एक लाख 12 हजार आंगनबाड़ी केन्द्र है जिसमें से 80 हजार सेन्टर प्राइमरी स्कूल में चलाये जा रहे हैं।”  

बगैर किताबों के कैसे पढ़ेंगे बच्चे? 

लखनऊ। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कैसे हो पाएगी, जब किताबें ही बच्चों तक पहुंचने में अगस्त बीत जाएगा क्योंकि सोमवार देर रात तक तो टेंडर वितरित करने की ही प्रकि्रया जारी रही थी। टेंडर प्रकि्रया के करीब एक हफ्ते बाद ही छपाई कार्य शुरू हो सकेगा।

प्रदेश में 1.98 लाख प्राइमरी व अपर प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 1.96 करोड़ बच्चों के लिए इस बार लगभग 250 करोड़ रुपये की किताबों की छपाई होनी है। अप्रैल में नए सत्र की शुरुआत तो सरकारी स्कूलों में कर दी गई थी लेकिन तब से लेकर अब जब दो दिन बाद सत्र खुलने वाला है, किताबें बच्चों तक नहीं पहुंच पाई हैं।

सोमवार देर रात तक जारी टेंडर प्रकि्रया में 22 प्रकाशकों को किताबों की छपाई का टेंडर दिया गया है। यह टेंडर 1.38 रुपए प्रति 8 पेज की दर से दिया गया। इन सभी प्रकाशकों के साथ शिक्षा विभाग द्वारा अनुबंध किया जाएगा। शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मुफ्त किताबें उपलब्ध करवायी जाती हैं। इसके लिए किताबों की छपाई का टेंडर होता है फिर कई प्रक्रियाओं से गुजर कर किताबें स्कूल में बच्चों तक पहुंचती हैं। इस बार कई मुद्दों के चलते टेंडर प्रक्रिया पूरी होने में काफी समय लग गया।       

पाठ्य पुस्तक अधिकारी अमरेन्द्र सिंह ने बताया, “छपाई का काम शुरू होने में लगभग एक सप्ताह का समय लगेगा। इसके बाद छपाई में लगभग डेढ़ महीने का समय लग सकता है। इसके बाद अन्य प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद ही किताबों का वितरण स्कूलों में हो सकेगा।” 

रिपोर्टर - मीनल टिंगल

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