मरीन इंजीनियरिंग में भविष्य की संभावनाएं

मरीन इंजीनियरिंग में भविष्य की संभावनाएंमरीन इंजीनियरिंग पेशे का अपना आकर्षण है।

गाँव कनेक्शन संवाददाता

लखनऊ। मरीन इंजीनियरिंग पेशे का अपना आकर्षण है। इसमें देश-विदेश में घूमने की सहूलियत और इंजीनियरिंग की दूसरी ब्रांचेस के मुकाबले अच्छी तनख्वाह और बहुत अच्छी जि़ंदगी मिलती है। साल के छह महीने जहाज पर रहना और बाकी महीने अपनी जिंदगी जीना। यही वजह है कि बड़ी संख्या में युवा इस क्षेत्र में आ रहे हैं। खासकर वे युवा, जो थोड़े वक्त में अच्छा पैसा कमाने की चाह रखते हैं, जल्द से जल्द अपना करियर स्थापित करना चाहते हैं।

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वैसे, सुविधाओं के साथ-साथ यह पेशा काफी चुनौती भरा भी है। मरीन इंजीनियर के कंधों पर जलपोतों के निर्माण, रख-रखाव और इंस्टॉलेशन की बड़ी जिम्मेदारी होती है। इन दिनों जहाज भी मॉडर्न टेक्नोलॉजी और इक्विपमेंट से लैस रहने लगे हैं, जिन्हें हैंडल करने के लिए मरीन इंजीनियर्स की जरूरत पड़ती है। चीफ मरीन इंजीनियर ही शिप और उसके कार्गो का इंचार्ज होेता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री ट्रैफिक बढ़ने से पब्लिक और प्राइवेट शिपिंग कंपनीज में मरीन इंजीनियर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। मरीन इंजीनियरिंग में कैसे बनाएं करियर यह बता रहे हैं करियर काउंसलर विवेक मिश्रा...

कोर्स एवं योग्यता

अंडरग्रैजुएट कोर्स में एडमिशन लेने के लिए अभ्यर्थी को 12वीं पास होना जरूरी है। इसके अलावा 12वीं में फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथेमेटिक्स में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना जरूरी है। उम्र किसी भी सत्र के अगस्त तक 17 से 25 साल के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा उन्हीं छात्रों को एडमिशन लेने का अवसर मिलता है, जिन्होंने आई.एम.यू द्वारा आयोजित सी.ई.टी (कॉमन एंट्रेंस टैस्ट) की परीक्षा उत्तीर्ण की है। जिसमें फिजिक्स, कैमिस्ट्री, मैथ, रीजनिंग, इंग्लिश एवं सामान्य ज्ञान पर आधारित 200 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं।

प्रमुख संस्थान

हिन्द इंस्टीट्यूट ऑफ नॉटिकल साइंस एंड इंजीनियरिंग, सिकंदरा राव, हाथरस, उत्तर प्रदेश

  • इंटरनेशनल मैरीटाइम इंस्टीट्यूट, दिल्ली
  • इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी, मुंबई
  • इंडियन मेरीटाइम यूनिवर्सिटी, चेन्नई
  • मरीन इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, कोलकाता
  • कोच्चि यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी
  • एएमईटी यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु
  • सीसीईटी, चंडीगढ़
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पोर्ट मैनेजमैंट, कोलकाता

कार्यक्षेत्र

एक मरीन इंजीनियर के तौर पर काम करने के लिए आप में सामुद्रिक संरचना की अच्छी जानकारी होनी चाहिए। इसके साथ ही मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की समझ होनी भी जरूरी है। इंडस्ट्री के अनुसार कार्यक्षेत्र का दायरा भी कुछ अलग हो सकता है। वैसे तो एक मरीन इंजीनियर का मुख्य काम पोत का निर्माण व मशीनरी की मरम्मत करना ही होता है लेकिन ये जहाजों और नौकाओं के डिजाइन की रूपरेखा तैयार करने समेत कई अन्य जिम्मेदारियां भी निभाते हैं।

इसके अलावा ऑफशोर ऑइल व गैस के लिए ऑपरेटिंग प्लेटफॉर्म, पाइपलाइन आदि का निर्माण व डिजाइनिंग का काम भी इन्हीं के जिम्मे होता है। कई बार प्रोफेशनल्स को मरीन सर्वेयर की भूमिका भी निभानी पड़ती है, जिसके अंतर्गत जहाजों का परीक्षण, ऑफशोर इंस्टॉलेशन और सेफ्टी उपायों का अध्ययन आदि करना होता है। मरीन इंजीनियर में लीडरशिप क्वॉलिटी होनी भी जरूरी है क्योंकि उसे मरीन टेक्निशियंस की टीम को मैनेज करना होता है।

जॉब के अवसर

मरीन इंजीनियर अपना करियर शिप पर फोर्थ इंजीनियर या थर्ड असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा इंजन प्रोडक्शन फर्म्स, शिप बिल्डिंग फर्म्स, रिसर्च बॉडीज, शिप डिजाइन फर्म्स या भारतीय नौसेना में भी काम करने के मौके मिल सकते हैं। बंदरगाहों पर स्थित मरीन वर्कशॉप्स में भी मरीन इंजीनियर्स की जरूरत होती है। अनुभवी मरीन इंजीनियर्स की आईटी सेक्टर, कंसल्टेंसी फर्म्स, कंस्ट्रक्शन कंपनीज, पावर सेक्टर, स्टील और इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री में भी अच्छी मांग है।

चुनौतियां

  • इस प्रोफेशन का कड़वा सच यह है कि मरीन इंजीनियर्स को अपने घर-परिवार से महीनों दूर रहना पड़ता है।
  • कई बार तो ये छह महीने से ज्यादा वक्त तक घर से बाहर रहते हैं।
  • आम तौर पर मरीन इंजीनियरों की शिकायत रहती है कि वे अपने परिवार को समय नहीं दे पाते। खासकर शादीशुदा लोगों को काम और परिवार के बीच संतुलन बनाए रखने में दिक्कतें पेश आती हैं।
  • इसके लिए जरूरी है कि आपका परिवार सपोर्टिव हो। चूंकि मरीन इंजीनियर का जलपोतों से जुड़ा काम है, इसलिए वे हर समय जलपोत पर ही रहते हैं।
  • वैसे तो इंजीनियरों के काम की अवधि आठ घंटे की ही होती है लेकिन इन्हें तमाम मौकों पर शिफ्ट-वाइज भी काम करना पड़ता है।

वेतन

इस क्षेत्र में प्रारंभिक रूप में भी काफी अच्छा वेतन पैकेज होता है। मर्चेंट नेवी में बतौर जूनियर इंजीनियर काम करने वाला व्यक्ति भी 25000 से 30000 रुपए प्रतिमाह आसानी से कमा सकता है। एक मरीन इंजीनियर शुरुआती स्तर पर भी 7.5 से 10 लाख रुपए प्रतिवर्ष अर्जन करता है। रैंक बढ़ने पर यह कमाई डेढ़ लाख से बढ़कर छह लाख या फिर उससे अधिक भी हो सकती है। अनुभव के बाद दूसरे सेक्टर्स में भी अच्छे पैसे मिलते हैं।

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