करियर में मिठास घोलती होम्योपैथी

करियर में मिठास  घोलती होम्योपैथीभारत में होम्योपैथी शिक्षा की शुरुआत 1983 में ग्रेजुएट लेवल और डिप्लोमा कोर्स से हुई

लखनऊ। होम्योपैथी पद्धति की खोज 1790 में डॉ. क्रिश्चियन फ्राइडरिक सैम्यूल हानेमान ने जर्मनी में की थी। होम्योपैथिक डॉ. अनुरुद्ध वर्मा बताते हैं “होम्योपैथिक चिकित्सा में रोगी के मानसिक-शारीरिक, आचार-व्यवहार आादि को ध्यान में रख कर रोगी का उपचार किया जाता है। यह रोग नहीं रोगी आधारित चिकित्सा पद्धति है।”

डॉ. अनुरुद्ध आगे बताते हैं “इस चिकित्सा की खासियत यह है कि आर्थराइटिस, डायबिटीज, थायरॉइड और अन्य तमाम गंभीर मानी जाने वाली बीमारियों का प्रभावी इलाज करती है और वह भी बिना किसी साइड इफेक्ट के। आमतौर पर लाेग यह सोचते हैं कि होम्योपैथिक दवाईयों का असर बहुत देर से होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल, यह पद्धति केवल पुरानी और गंभीर बीमारियों को पूरी तरह से ठीक करने में थोड़ा समय लेती है, लेकिन बुखार, सर्दी-खांसी या अन्य मौसमी या छोटी-मोटी बीमारियों में होम्योपैथिक दवाएं उतनी ही तेजी से असर करती हैं, जितनी कि अन्य पद्धतियों की दवाएं।”

भारत में होम्योपैथी

भारत में होम्योपैथी शिक्षा की शुरुआत 1983 में ग्रेजुएट लेवल और डिप्लोमा कोर्स से हुई। डॉ. अनुरुद्ध वर्मा बताते हैं “इस समय देश में 200 होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज हैं, 40 कॉलेज ऐसे हैं जो पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री देते हैं। पूरे देश में 3 लाख पंजीकृत डॉक्टर हैं। इसके साथ ही साथ आठ हजार सरकारी डिस्पेंसरी और लागभग 600 अस्पताल हैं।” अगर छात्र होम्योपैथी को बतौर करियर चुनते हैं तो वह इनमें दाखिला लेकर भविष्य उज्ज्वल बना सकते हैं।

कोर्स

डॉ. अनुरुद्ध वर्मा बताते हैं “साढ़े पांच साल होम्योपैथी डॉक्टर बनने के लिए कई कोर्स हैं। इनमें सबसे आरंभिक कोर्स है-बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी यानी बीएचएमएस। इसमें एडमिशन के लिए आपको फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और अंग्रेजी विषयों के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंकों से बारहवीं उत्तीर्ण होना होगा। बीएचएमएस में प्रवेश एमबीबीएस की तरह ऑल इंडिया एट्रेंस एग्जामिनेशन के माध्यम से होता है। इस कोर्स की कुल अवधि साढ़े पांच वर्ष है, जिसमें 6 माह की इंटर्नशिप भी शामिल है।” इस क्रम में होम्योपैथ में एमडी भी किया जा सकता है, इसके तहत पीडियाट्रिक्स, मेटेरिया मेडिका, होम्योपैथिक फिलॉसफी, रेपर्टरी, साइकियाट्री, फार्मेसी, आर्गेनन ऑफ मेडिसिन आदि में विशेषज्ञता हासिल की जा सकती है।

रोजगार के अवसर

डॉ. अनुरुद्ध वर्मा बताते हैं “कोर्स करने के बाद गवर्नमेंट या प्राइवेट हॉस्पिटल में होम्योपैथी डॉक्टर के रूप में नौकरी मिल सकती है। इसके अलावा क्लिनिक, चैरिटेबल इंस्टीटयूट, रिसर्च इंस्टीटयूट, मेडिकल कॉलेजों में भी काम मिल सकता है।” वह आगे बताते हैं “इन सभी के अलावा प्राइवेट प्रैक्टिस भी कर सकते हैं। इसके साथ ही होम्योपैथ में पोस्ट ग्रेजुएशन में पीडियाट्रिक्स, मेटेरिया मेडिका, होम्योपैथिक फिलॉसफी, रेपर्टरी, साइकिएट्री, फॉर्मेसी आदि में किसी एक में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद टीचिंग प्रोफेशन को चुन सकते हैं।”

ऐसे लें दाखिला

बीएचएमएस में एडमिशन ऑल इंडिया कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (एआईसीईटी) के माध्यम से होता है। यह टेस्ट ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंड मेडिकल कॉलेज एसोसिएशन (एआईएमईसीए) द्वारा आयोजित किया जाता है। यह टेस्ट वर्ष में एक बार आयोजित किया जाता है। इसके लिए आवेदन सामान्यतया अक्टूबर माह में जारी किए जाते हैं।

वेतनमान

गवर्नमेंट या प्राइवेट हास्पिटल में होम्योपैथी डॉक्टर के रूप में नौकरी मिल सकती है। आरंभिक वेतन के तौर पर 15000 रुपए मिलते हैं। धीर-धीरे आपके अनुभव के अनुसार वेतन बढ़ता जाता है। आप अपना क्लीनिक खोलकर भी अच्छी आमदनी अर्जित कर सकते हैं।

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