करना चाहते हैं कुछ नया तो बनें ग्राफिक डिजाइनर 

करना चाहते हैं कुछ नया तो बनें ग्राफिक डिजाइनर फोटो साभार: इंटरनेट

अगर आपमें कुछ नया करने की चाहत है तो ग्राफिक डिजाइनिंग का करियर आपके लिए बेहतरीन साबित होगा। यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें सभी चीजों का डिजाइन तैयार किया जाता है। डिजाइन ही किसी चीज की सफलता का पैमाना माना जाता है। यदि डिजाइन अच्छी नहीं है, तो समझ लीजिए कि बाजार में वह चीज अपने प्रतिस्पर्धी उत्पादों के सामने कहीं नहीं टिक पाती। दरअसर, ग्राफिक डिज़ाइनिंग का मतलब किसी मैटर को विज़ुअल इंपैक्ट देना है, जिससे वह दिखने में आकर्षक लगे। आज के जॉब मार्केट में अच्छे ग्राफिक डिजाइनर्स की काफी डिमांड है। इस कोर्स के बारे में विस्तार से बताएंगे करियर काउंसलर विवेक मिश्रा...

ग्राफिक डिज़ाइनिंग के तहत कोर्स

बैचलर इन फाइन आर्ट्स

पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डिज़ाइन

ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डिजाइन (चार साल)

विज़ुअल कम्युनिकेशन डिज़ाइन

एडवरटाइजिंग ऐंड विज़ुअल कम्युनिकेशन

एप्लाइड आर्ट्स ऐंड डिज़िटल आर्ट्स

प्रिंटिंग ऐंड मीडिया इंजीनियरिंग

प्रतीकात्मक फोटो

काम का तरीका

ग्राफिक डिज़ाइनर का काम अपने क्लाइंट के लिए ऐसे क्रिएटिव आइडियाज़ तैयार करना होता है, जो उसके क्लाइंट के संस्थान को अलग पहचान दे सकें। मसलन, अगर कोई जूलरी विक्रेता अपने लिए लोगो बनवा रहा है, तो वह चाहेगा कि वह लोगो पहली नज़र में ही उसके ब्रैंड की आकर्षक छवि तैयार करे।

ऐसी छवि, जो ग्राहकों को उसके पास आने को प्रेरित करे। इस काम के लिए क्रिएटिविटी सबसे पहली जरूरत है। इसके अलावा, इंडस्ट्री के ट्रेंड्स की पूरी जानकारी, ग्राफिक डिज़ाइनिंग के क्षेत्र में नए सॉफ्टवेयर्स की जानकारी, प्रोफेशनल अप्रोच और काम को समय पर पूरी करने की योग्यता होनी भी जरूरी है।

वेतनमान

ग्राफिक डिजाइनिंग एक ऐसा क्षेत्र बन चुका है जिसमें पैसे की कमी नहीं है। यदि आपकी क्रिएटिविटी जबरदस्त है तो आप लाखों में खेल सकते हैं। जॉब से लेकर फ्रीलांसिंग तक में पैसे का बोलबाला है। शुरुआती दौर में ट्रेनी ग्राफिक डिजाइनर को 5-7 हजार रुपये, जूनियर ग्राफिक डिजाइनर को 12-15 हजार, सीनियर या एक दो साल का अनुभव हो जाने पर 18-20 हजार, आर्ट डायरेक्टर को 35-40 हजार तथा डिजाइनर हेड को 50-60 हजार रुपये प्रतिमाह आसानी से मिल जाते हैं, जबकि फ्रीलांसिंग करने वाले प्रति मिनट के हिसाब से भुगतान हासिल करते हैं।

इंस्टीट्यूट वॉच

  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद www.nid.edu
  • इंडस्ट्रियल डिज़ाइन सेंटर, आईआईटी, मुंबई www.idc.iitb.ac.in
  • सृष्टि स्कूल ऑफ आर्ट, डिज़ाइन ऐंड टेक्नोलॉजी, बेंगलुरु www.srishti.ac.in
  • डिपार्टमंट ऑफ डिज़ाइन, आईआईटी, गुवाहाटी www.iitg.ernet.in
  • आईआईटी, कानपुर www.iitk.ac.in
  • महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे www.mitpune.com www.symbiosisdesign.ac.in

योग्यता

ग्राफिक डिजाइन के क्षेत्र में आज तमाम तरह के कोर्स मौजूद हैं। फाउंडेशन कोर्स से लेकर चार साल तक के डिग्री कोर्स उपलब्ध हैं। योग्यता के रूप में छात्रों को 10+2 उत्तीर्ण अनिवार्य है, तभी आगे चलकर संभावनाएं सामने आती हैं।

स्नातक एवं परास्नातक के उपरांत कई डिप्लोमा एवं पीजी डिप्लोमा कोर्स कराए जाते हैं, जिनकी अवधि एक वर्ष से लेकर 2 वर्ष तक है, जबकि 12वीं के पश्चात 12 माह से लेकर 36 माह तक के पाठ्यक्रम इस क्षेत्र में हैं।

पाठ्यक्रम

पाठ्यक्रम के दौरान छात्रों को प्रमुख डिजाइनों के बारे में अवगत कराने से लेकर कंप्यूटर द्वारा उनके प्रयोग संबंधी जानकारी प्रदान की जाती है। इसके अंतर्गत कई तरह के सॉफ्टवेयरों जैसे इन डिजाइन, कोरल ड्रॉ, फोटोशॉप, पेजमेकर, क्वार्क एक्सप्रेस, 2-डी एवं 3-डी एनीमेशन, 3-डी स्टूडियो मैक्स की जानकारी दी जाती है। विज्ञापन एजेंसियों में एड का ले आउट बनाने, पोस्टर्स, बैनर्स डिजाइन करने, काटरून तैयार करने, फिल्मों में प्रोडक्शन संबंधी मदद तथा वेबसाइट पर वेब पेज की डिजाइनिंग आदि का सभी ज्ञान प्रशिक्षण के दौरान दी जाती है।

प्रतीकात्मक फोटो, साभार: इंटरनेट

रोजगार की संभावनाएं

अगर ग्राफिक डिज़ाइनिंग के क्षेत्र में करियर की बात की जाए, तो ग्लोबलाइजेशन के मौजूदा दौर में इस क्षेत्र में रोजगार की बेहतर संभावनाएं हैं, क्योंकि आज सभी छोटे-बड़े संस्थान अपने लिए विज़ुअल ब्रैंड तैयार करवाते हैं। ग्राफिक डिजाइनर्स को वेबसाइट्स, एडवरटाइजिंग एजंसी, किताबें, पत्रिकाएं, पोस्टर्स, कम्प्यूटर गेम्स, प्रोडक्ट पैकिजिंग, एग्ज़िबिशन, डिस्प्ले, कॉर्पोरेट कम्यूनिकेशन, कॉर्पोरेट आइडेंडिटी आदि जगहों पर अच्छे पैकेज में काम मिल जाता है। आप किसी पब्लिकेशन हाउस, मीडिया हाउस, एडवरटाइजिंग एजंसी, कंप्यूटर गेम, वेब पेज डिज़ाइनिंग, कॉर्पोरट कंपनीज, पैकिजिंग कंपनी, पोस्टर मेकिंग, फिल्म एंड टेलिविज़न इंडस्ट्री आदि से जुड़ सकते हैं।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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