स्कॉलरशिप हज़ार लेकिन लेने वाले नदारद

स्कॉलरशिप हज़ार लेकिन लेने वाले नदारदस्कालरशिप के बाद भी शिक्षा मामले में भारत पीछे क्यों।

देवेश मथारिया

बात अजीब है पर सच है। भारत में हर वर्ष अनुमानित रूप से कई हज़ार करोड़ रुपयों की छात्रवृत्ति विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध होती है। इसके बावजूद हर वर्ष शिक्षा बीच में छोड़ देने वाले विद्यार्थियों की दर घटती हुई नहीं दिखती। आखिर क्या कारण है कि विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं परियोजनाओं जैसे राइट टू एजुकेशन (आरटीई), स्कूल चलो अभियान व अन्य इस दर को बढ़ने से रोकने में उतने कारगर नहीं होते? हज़ारों करोड़ की छात्रवृत्ति योजनाओं के बाद भी भारत में प्राथमिक व उच्च शिक्षा पूरी करना विद्यार्थियों व उनके परिवार के लिए सतत चिंता का विषय है।

यह अनूठी समस्या है। बुद्धिजीवियों, अर्थशास्त्रियों व नीति-निर्माताओं को इसने परस्पर उलझा कर रखा है। समस्या तब समस्या लगती है जब किन्ही दो पहलुओं में से कोई एक ज्यादा या कम हो। अगर मांग ज्यादा है और आपूर्ति कम तब समस्या होती है। ठीक इसी तरह अगर आपूर्ति ज्यादा है और मांग कम तब भी मुश्किल है। छात्रवृत्ति पारिस्थितिकी तन्त्र में यह दोनों पहलू नहीं हैं। यहाँ सामान रूप से मांग है एवं सामान रूप से आपूर्ति है। इस परिदृश्य के परे एक बहुत बड़ा तबका इस बात से भी अवगत नहीं है कि छात्रवृत्ति जैसी कोई योजना भी है जिसके माध्यम से सी वी रमण, अब्दुल कलाम, किरण बेदी सरीखे सफल भारतीयों ने दुनिया में अपना नाम किया।

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अगर ज़मीनी परिसीमा से उठ कर देखा जाये तो हम पाएंगे की जानकारी का अभाव एवं आवेदन में सहायता की अनुपस्थिति इस समस्या की जड़ हैं। विद्यार्थी तो दूर, अभिभावक व शिक्षक वर्ग भी छात्रवृति की सही व ज़रूरी जानकारी से अनभिज्ञ हैं। इसका बड़ा कारण है मुख्य धारा में छात्रवृत्तियों के प्रति उदासीनता एवं विभिन्न प्रचलित मिथक जैसे स्कॉलरशिप पाना बहुत मुश्किल काम है, यह सिर्फ पढ़ाकू छात्रों के लिए हैं, केवल खिलाड़ी ही इसके हक़दार हैं।

इस समस्या का निदान उपलब्ध है एवं विद्यार्थी वर्ग की पहुंच में है। आजकल छात्रवृत्ति प्रबंधन का कार्य तकनीक के माध्यम से हो रहा है। तकनीक ने जहां दुनिया की हर बड़ी समस्या के निदान का एक नया आयाम दिया है वहीँ दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति को एक ग्लोबल विलेज का निवासी भी बना दिया है। यहां पर जानकारी का प्रस्थापन उतना हि आसान है जितना व्हाट्सएप पर एक सन्देश भेजना। दुनिया के किसी भी क्षेत्र में उपलब्ध छात्रवृत्ति के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी पाना बहुत आसान है। यही नहीं, तकनीक एवं आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की सहायता से आपकी पढ़ाई, आमदनी, अधिवास, योग्यता के आधार पर मिलती हुई छात्रवृति की जानकारी भी उपलब्ध हो सकती है।

इसका मतलब है की जिस तरह आप किसी रेसिपी की तलाश इन्टरनेट पर करते हैं या अपने स्मार्टफोन पर कोई एेप डाउनलोड करते हैं, उतनी ही आसानी से अब स्कॉलरशिप की जानकारी भी पा सकते हैं व आवेदन भी कर सकते हैं। ज़रुरत है तो बस सही प्लेटफ़ॉर्म का चुनाव करने की और आप भी अपने सपनो को उड़ान दे सकते हैं।

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