युवा किसानों ने खेत में उगाया ‘ग्रो इन इंडिया’ का संदेश

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लखनऊ। मध्य प्रदेश के युवा किसानों ने देश के प्रधानमंत्री के लिए 7200 स्क्वायर फीट में एक संदेश लिखा है। इस संदेश में युवाओं ने प्रधानमंत्री से पूछा है ‘मेक इन इंडिया’ तो है ‘ग्रो इन इंडिया’ की शुरुअता कब होगी?

मध्यप्रदेश के पारडसिंगा गाँव की युवा पीढ़ी के कुछ किसानों ने ज़मीन पर हरी-लाल सब्ज़ियों को उगाकर यह संदेश लिखा है। उनकी मांग है कि देश की खेती को फिर से देशी बीजों पर लाया जाए और हाइब्रिड बीजों पर निर्भरता खत्म हो। 

“जिस गाँव के खेत में बैठकर यह पत्र लिखा जा रहा है, वहाँ के हर खेत में बीटी कपास उगाया जाता है जिसके लिए बस दो ही पानी काफी हैं। दुख की बात यह है कि कपास खाया नहीं जा सकता है और किसान के पास अन्य कोई पुराना बीज भी नहीं बचा है,” पत्र में युवाओं ने लिखा। 

ज़मीन पर इस विशालकाय चित्र को बनाने वाले युवाओं में से एक किसान ललित विकमसी बताते हैं, “हम लोग दिन में तीन बार खाने के समय किसान को याद करते हैं पर उनके उत्थान का कभी कोई प्रयास नहीं करते। इसलिए हम लोगों ने प्रधानमंत्री के नाम का चित्र खेत में उगाया है जो कि पूरी तरह से जैविक तरीके से उगाया गया है।” इन युवा किसानों का कहना है कि बीटी कॉटन लगातार उगाने से ज़मीन खराब हो रही है। किसानों का फसल चयन बड़ी-बड़ी बीज निर्माता कंपनियों द्वारा प्रभावित किया जाता है। 

इस समस्या को समय रहते पहचानने की आवश्यकता है। देशी बीजों और संसाधनों के साथ खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। अपने पत्र में युवाओं ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वे देश के युवओं का ध्यान इस ओर खींचे और उन्हें प्रोत्साहित करें। पत्र में लिखा गया कि “देशी बीज गायब होने की कगार पर हैं। किसान को तो संकरित बीज, कीटकनाशक, खरपतवार नाशक की आदत लग गयी है। क्या अब हम सब उस दिन की राह देखें जहां हमारा भोजन, हमें क्या खाना चाहिये ये कोई और तय करे?”

इस भूमि चित्र को बनाने में सहयोग देने वाली एक अन्य सदस्य श्वेता भट्टाचार्या बताती हैं, “देशी बीज से खेती करने में लागत ज्यादा आती है और ज्यादा पानी की भी आवश्यकता पड़ती है। इसलिए किसान हाइब्रिड बीज उगाने लगे हैं। अब हमको क्या खाना है, क्या नहीं इसका फैसला हाइब्रिड बीज बनाने वाली कंपनियां करती हैं। जिससे भूमि की उर्वरकता खत्म हो रही है।” पत्र के अनुसार, “हम सब मिलकर एक ऐसे भारत की कल्पना करते हैं, जहां हमारा भोजन, हमारा पानी, हमारे कपड़े, हमारा मकान और हमारी ज़मीन विषमुक्त हो। दस साल पुराने किसान आयोग की टिप्पणियों को लागू होने में अब कितने और साल लग जायेंगे, किसानों को अपनी उपज के सही दाम कब मिलेंगे? गाँव की दीवारों, समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर विष भरे बीजों, रसायनों और खरपतवार नाशकों के विज्ञापन कब बंद होंगे?”

7200 स्क्वायर फीट के खेत में लिखा संदेश

इस भूमि चित्र या धरा चित्र को युवा किसानों ने तीन महीने की मेहनत से तैयार किया है। 7200 स्क्वायर फीट के इस चित्र को आंतर पीक, देशी बीज, जैविक खाद और वर्षाजल से तैयार किया गया है। इसमें हरी सब्जियों और लाल सब्जियों के बीज से प्रधानमंत्री जी का चित्र और संदेश उगाया गया है। 

रिपोर्टर - आनंद त्रिपाठी

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