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नारी डायरी

आशा ज्योति केन्द्र की सहायता से बलात्कार पीड़िता को मिला न्याय

नाराज़ पति को मनाने जम्मू जा रही 18 वर्षीय रानी (बदला नाम) को नहीं पता था कि वो दिन उनकी जिंदगी का सबसे मनहूस दिन होगा क्योंकि उस दिन जिस पर उसने भरोसा किया उसी ने उसके जिस्म को कई बार बेच दिया।

दो बार दी कैंसर को मात, अब अपने जैसों पर लिख रहीं प्रेरणादायी कॉमिक बुक, अमिताभ बच्चन और रतन टाटा बने सहयोगी

भारत में कैंसर से हर साल लाखों मौतें होती हैं, लेकिन कई मामलों में पीड़ित की जीवटता और सजगता कैंसर को मात भी दे देती है। ऐसे ही लोगों पर प्रेरणादायी किताबें लिख रहीं हैं नीलम कुमार।

सामुदायिक रेडियो ग्रामीणों के लिए जानकारी का सशक्त माध्यम 

सामुदायिक रेडियो लोगों के लिए, लोगों का, लोगों के द्वारा बना एक सशक्त माध्यम है जो देश के हर ग्रामीण को अपनी बात कहने की पूरी आजादी देता है।

जलकर मरने वाली महिलाओं में भारत पड़ोसी मुल्कों से आगे 

दूसरे देशों की तुलना में भारतीय महिलाओं को आग से ज्यादा खतरा है। किसी अन्य देश की तुलना में 15 से 50 वर्ष के बीच की भारतीय महिलाओं की आग से मौत होने की संभावना ज्यादा होती है।

अब नजरें नहीं झुकातीं, फुटबॉल पर मारती हैं किक

फुटबॉल गाँव की बच्चियों में आत्मविश्वास बढ़ाने का वह जरिया बन गया है जिसको खेलने के बाद बच्चियों में बचपन से बैठा समाज का डर कम होता जा रहा है। वह अपनी तरह से जिंदगी जीने की कोशिश कर रही हैं।

गर्भावस्था के दौरान मुलेठी खाना बच्चे के दिमाग के लिए नुकसानदेह 

अध्ययन में पाया गया कि गर्भवस्था के दौरान मुलेठी का अधिक मात्रा में इस्तेमाल करने वाली महिलाओं के बच्चों के दिमाग पर बुरा असर होता है। इसके लिए महिलाओं को जागरूक करना चाहिए।

लड़कियां ये ख़बर जरुर पढ़ें, अगर आप अपना फोन दुकान से रिचार्ज कराती हैं तो सावधान हो जाएं

अगर आप अपने घर के आसपास के किसी दुकान से मोबाइल फोन रिचार्ज करा रही हैं तो थोड़ा सावधान हो जाइए। हो सकता है आपका नंबर दुकानदार किसी को बेच दे, जिसके बाद आप को फोन पर परेशान किया जाए।

महिला सशक्तीकरण: पहले अंगूठा लगाती थीं अब हस्ताक्षर करती हैं, व्हाट्सऐप चलाती हैं...

ये आत्मविश्वास गंगादई में साक्षरता से आया है, जिसकी ग्रामीण भारत की महिलाओं में शहरी महिलाओं की अपेक्षा कमी है।

जमीनी हकीकत: सुविधाओं से समझौता करतीं गाँवों की गर्भवती महिलाएं

ग्रामीण महिलाओँ के मां बनना किसी जंग से जीतने से कम नहीं है। घरों उन्हें बेहतर देखभाल नहीं मिलती, अस्पतालों में डॉक्टर और सुविधाएं नहीं मिलती हैं, यहां तक की हजारों महिलाएं प्रसव के बाद जमीन पर लेटने को मजबूर होती है, जो उनके और उनके बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है।

राजपथ पर परेड़ करेगी लखनऊ की बहादुर बेटी अंशिका

महज 16 वर्ष की आशिका पांडेय की वीरता और साहस की सराहना करते हुए 23 जनवरी को भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर नेशनल ब्रेवरी अवार्ड 2016 पुरस्कार दिया।