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नारी डायरी

महिलाओं के प्रति बढ़ रही घटनाओं में दोषी कौन?

नए साल के अवसर पर बेंगलुरु में होने वाली छेड़खानी की घटना ने एक बार फिर देश के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। निश्चित रूप से ये सवाल स्वाभाविक है क्योंकि इस बार घटना एक ऐसे शहर में हुई है, जो महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है

इंटरनेट साथी तोड़ रही हैं स्मार्टफोन को लेकर महिलाओं की झिझक

स्मार्टफोन और इंटरनेट को लेकर महिलाओं की झिझक तोड़ने और उन्हें जागरुक करने के लिए चलाए जा रहे गूगल इंडिया और टाटा ट्रस्ट के प्रोग्राम इंटरनेट साथी का असर दिखने लगा है। महिलाएं मोबाइल और टेबलेट से मेहंदी की डिजाइन से लेकर खाने तक की रेसिपी खोज रही हैं, कई महिलाओं ने इसी के सहारो रोजगार के जरिए तलाश लिए हैं।

पत्नियों से धोखा करने वाले एनआरआई पर कार्रवाई की मांग

तेलंगाना महिला आयोग की अध्यक्ष टी वेंटकरमन ने बताया कि बड़ी संख्या में एनआरआई जिस देश में रहते हैं उसी देश की अदालतों में अपील करके भारतीय कानूनों से बच निकलते हैं।

वर्ष 2016 में कई भारतीय महिलाओं ने बनाया नया कीर्तिमान

वर्ष 2016 में चाहे वह रक्षा का क्षेत्र हो, राजनीति हो या खेल, हर क्षेत्र में कई भारतीय महिलाओं ने अपने शानदार प्रदर्शन से नए कीर्तिमान स्थापित किए।

मिड-डे मील तो है, पर पौष्टिकता का ख़्याल नहीं

मध्यान्ह भोजन योजना की शुरुआत भारत सरकार द्वारा 1995 में की गई जिसका मुख्य उद्देश्य बड़ी संख्या में बच्चों को स्कूल तक लाना और उन्हें कुपोषण से सुरक्षित रखना है।

शमशाद ने थामा तेजाब पीड़िता शबीना का हाथ 

बारह साल पहले अपने मंगेतर के ही हाथों तेजाब के हमले के बाद चेहरे और जिस्म पर जले के निशान और दिल में अरमानों के जख्म झेल रही शबीना का हाथ उसके मोहल्ले के ही शमशाद ने थाम लिया।

सुलझ नहीं रही छात्राओं की उन दिनों की उलझन

छात्राओं की उन दिनों की उलझन आसानी से सुलझ नहीं रही है। कभी सेनेटरी नेपकिन नहीं मिल रही तो कभी उसको फेंकने की दिक्कत छात्राओं के सामने मुंह बाये खड़ी रहती है।

शिक्षा की कमी के कारण सरकारी लाभ लेने से वंचित महिलाएं

कुछ साल पहले पड़ोस के लोगों के साथ किसी बात पर झगड़ा होने के कारण मेरे पति को गंभीर चोट आई और बहुत कोशिशों के बाद भी हम उनको बचा नहीं पाए।