लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इस विधि से करें अनाज भंडारण

भण्डारण की सही जानकारी न होने के कारण 20 से 25 प्रतिशत अनाज नमी, दीमक, घुन, चूहों और बैक्टीरिया द्वारा नष्ट हो जाता है इसलिए अन्न को लंबे समय तक इन समस्याओं से सुरक्षित रखने के लिए उनका सही विधि से उनका सुरक्षित भंडारण ज़रूरी होता है-

लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इस विधि से करें अनाज भंडारण

लखनऊ। खरीफ की फसलों की कटाई के बाद कुछ समय के लिए उनका भण्डारण करना होता है। यह समय कटाई से अगली बुवाई तक या कटाई से बेचने तक का हो सकता है। भण्डारण की सही जानकारी न होने के कारण 20 से 25 प्रतिशत अनाज नमी, दीमक, घुन, चूहों और बैक्टीरिया द्वारा नष्ट हो जाता है इसलिए अन्न को लंबे समय तक इन समस्याओं से सुरक्षित रखने के लिए उनका सही विधि से उनका सुरक्षित भंडारण ज़रूरी होता है-


केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, लखनऊ के डॉ. राजीव कुमार बताते हैं, "भण्डारण की सही जानकारी न होने से 10 से 15 फीसदी तक अनाज नमी, दीमक, घुन, बैक्टीरिया द्वारा नष्ट हो जाता है। अनाज को रखने के लिए गोदाम की सफाई कर दीमक और पुराने अवशेष आदि को बाहर निकालकर जलाकर नष्ट कर दे। दीवारों, फर्श एवं जमीन आदि में यदि दरार हो तो उन्हे सीमेंट, ईंट से बंद करे दें। टूटी दीवारों आदि की मरम्मत करा दें। भण्डारण में होने वाली इस क्षति को रोकने के लिए किसान सुझावों को ध्यान में रखकर अनाज को भण्डारित कर सकते हैं।"

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सीफैट ने फसलों की कटाई के बाद से खाद्य पदार्थों के बर्बाद किए जाने तक पर अपनी एक रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में देश के 14 कृषि क्षेत्र के 120 जिलों में यह सर्वेक्षण किया गया। इस रिपोर्ट में सामने आया कि फल, सब्जियों के अलावा खाद्यान्न की भी बड़ी मात्रा खराब हो जाती है। ऐसे में देशभर में हर साल करीब 67 लाख टन के खाद्य पदार्थ उचित भंडारण और कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था न होने से खराब हो जाते हैं। इस रिपोर्ट में खराब हुए इन खाद्य पदार्थों की कीमत 92 हजार करोड़ रुपए आंकी गई। बड़ी बात यह है कि जितना खाद्य पदार्थ देश में बर्बाद हो जाता है, उतना ब्रिटेन जैसे बड़े देश के खाद्य उत्पादन के बराबर है।

अनाज को रखने के लिए गोदाम की सफाई कर दीमक और पुराने अवशेष आदि को बाहर निकालकर जलाकर नष्ट कर दें। दीवारों, फर्श एवं जमीन आदि में यदि दरार हों तो उन्हे सीमेंट, ईंट से बंद करे दें।

अनाजों को अच्छी तरह से साफ करके धूप में सुखा लेना चाहिए, जिससे दानों में 10 प्रतिशत से अधिक नमी न रहने पाए। धूप में सुखाने के बाद अनाज के ठंडा हो जाने के बाद ही उसे भण्डार में रखना चाहिए।

भण्डारण के लिए ऐसे भण्डार गृह का चयन करना चाहिए, जहां सीलन न हो और चूहों से अन्न का बचाव किया जा सके। भण्डार गृह हवादार होना चाहिए पर ये व्यवस्था भी हो कि ज़रूरत पड़ने पर हवा को रोका जा सके।


बोरियों में अनाज भरकर रखने के पहले इन बोरियों को 20-25 मिनट तक खौलते पानी में डाल देना चाहिए। इसके बाद धूप में अच्छी तरह सुखा देना चाहिए अथवा छिड़काव के लिए बने मालाथियॉन 50 ईसी के घोल में बोरियों को डुबाकर फिर बाहर निकालकर सुखा लेना चाहिए। ठीक से सूख जाने के बाद ही उसमें अनाज भरना चाहिए।

अनाज से भरे बोरे को भण्डार गृह में रखने के लिए फर्श से बीस से पच्चीस सेमी. की ऊंचाई पर बांस या लकड़ी के तख्ते का मंच तैयार करना चाहिए, जो दीवार से कम से कम 75 सेमी की दूरी पर हो। बोरियों के छल्लियों के बीच भी 75 सेमी खाली स्थान रखना फायदेमंद होता है।

बादल छाये रहने वर्षा होने या वातावरण में अधिक नमी रहने पर भण्डारण नहीं करना चाहिए। पछिया हवा चलते रहना भण्डारण के लिए लाभप्रद है।

भण्डारण के बाद गोदाम में पक्षियों और चूहों के आने- जाने के रास्ते को बंद कर देना चाहिए।

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इन बातों का भी रखें ध्यान

खुले हुए अनाज पर सीधे सूखे या तरल कीटनाशी का प्रयोग नहीं करना चाहिए। चूहा शंकालु प्रकृति का होता है इस लिए बदल-बदल कर विषाक्त चारा, चूहादानी और टिकिया का प्रयोग करना चाहिए। अनाज में दवा डालने के बाद हाथ साबुन से अच्छी तरह धो लें। भण्डारण में पुराना अनाज और भूसा वगैरह को निकालकर एक महीने पहले सफाई कर चूहों द्वारा किए गए छेद और अन्य टूट-फूट की मरम्मत कर नीम की पट्टी का प्रधुमन करके अच्छी तरह से भण्डारण को बंद कर दें। इससे छुपे हुए कीट नष्ट हो जाएंगे। अन्न का भण्डारण करते समय हवा के रुख को अवश्य ध्यान में रखें अगर पुरवा हवा चल रही हो तब अन्न का भण्डारण न करें। अनाज भण्डारण में नीम की पत्ती का प्रयोग करते समय नीम की पत्तियां सूखी होनी चाहिए। इसके लिए नीम की पत्तियों को भण्डारण से 15 दिन पहले किसी छायादार स्थान पर कागज पर रख कर सुखा लें।

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