बुंदेलखंड की गरीबी मिटा सकते हैं ये जर्जर किले

बुंदेलखंड की गरीबी मिटा सकते हैं ये जर्जर किलेgaonconnection

बांदा/चित्रकूट। विंध्य पहाड़ियों पर 700 फीट की ऊंचाई पर बना जो कलिंजर का किला कभी जीता न जा सका, वो पर्यटकों के मन को जीत नहीं पा रहा है।

 

कलिंजर किले में जाने के लिए घुमावदार सड़क पर जैसे-जैसे ऊपर बढ़ेंगे नीचे का दृश्य अद्भुत दिखेगा, लेकिन यहां हर रोज मात्र 100 से 200 पर्यटक ही पहुंचते हैं। वहीं कलिंजर किले से 400 किमी दूर ताजमहल का हर रोज हजारों पर्यटक दीदार करते हैं।

बुंदलेखंड में कलिंजर जैसी कई इमारते हैं जो पर्यटकों को आकर्षित कर सकती हैं, लेकिन फिर भी ये इमारतें पर्यटकों को अपनी ओर खींच नहीं पा रहीं। अगर यहां पर्यटन उद्योग को सही से विकसित किया जाए, तो बुंदेलखंड की तकदीर बदल सकती है।

“कलिंजर में पुरातत्व विभाग के 10 से 12 गार्ड रहते हैं और इक्का-दुक्का आने वाले पर्यटक। पीने का पानी भी नीचे से लाना पड़ता है।” किले के परिसर में बने सर्किट हाउस की देखरेख करने वाले राम आसरे बताते हैं। बुंदलेखंड में 30 ऐसी इमारतें और किले हैं जो पर्यटन के हिसाब से महत्वपूर्ण हैं। लेकिन बदकिस्मती है कि यूपी की शीर्ष 15 पर्यटन स्थलों की सूची में सिर्फ चित्रकूट ही शामिल है, जो 7वें नंबर पर है।

“बुंदलेखंड में पर्यटन के क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं। यहां पर्यटकों को लाने के लिए सड़कों का तंत्र सही करना होगा। होटलों में ठरहने की सुविधा, कानून-व्यवस्था को भी बेहतर किया जाना चाहिए। कलिंजर के किले से जुलाई के पहले हफ्ते से पैराग्लाइडिंग शुरू हो जाएगी।” बांदा के डीएम योगेश कुमार ने बताया।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की वेबसाइट के अनुसार वर्ष 2015 उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण स्थानों में घूमने के लिए करीब 20.50 करोड़ भारतीय और 31 लाख विदेशी सैलानी घूमने के लिए पहुंचे। बुंदलेखंड में सबसे ज्यादा करीब 30 लाख सैलानी झांसी पहुंचे।

बुंदेलखंड के पर्यटन उद्योग को पंख न मिल पाने में यहां की कानून-व्यवस्था की भी अहम भूमिका रही है। 'चित्रकूटधाम डॉट काम' नाम से वेबसाइट चलाकर कर पर्यटकों को यहां के बारे में जानकारी देने वाले अरुण श्रीवास्तव कहते हैं, “हमारे पास जो कॉल आती हैं, कई लोग तो ये भी पूछते हैं कि वहां तो डकैतों का भी डर है। इसलिए यहां का जो पुराना इतिहास रहा है उसने भी नुकसान किया है।” 

अरुण श्रीवास्तव बताते हैं, “यहां की ऐतिहासिक इमारतों के प्रमोशन की जरूरत है। चित्रकूट को वही लोग जानते हैं, जिन्होंने रामायण पढ़ी है, या रामकथा सुनी है। विदेशी पर्यटक आगरा तक आते हैं, लेकिन झांसी या चित्रकूट आने से कतराते हैं।”

हालांकि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने चित्रकूट, महोबा, ललितपुर और झांसी में कई जगहों पर पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थलों पर सौंदर्यीकरण और विकास कार्य शुरू कराए हैं। पर इसे काफी आगे बढ़ाया जा सकता है। “चित्रकूट और खजुराहों में पर्यटन का बहुत विस्तार है। हमें ऐतिहासिक स्थलों पर पर्यटन को बढ़ाने के लिए पीपीपी मॉडल पर कैंटीन बनानी होंगी। कलिंजर में लोगों को नीचे से पानी लेकर जाना पड़ता है। पर्यटकों को सुविधाएं देनी पड़ेंगी। इसमें हल्का निवेश करने की जरूरत है।” जिलाधिकारी योगेश कुमार ने कहा।

पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं इन शहरों के स्थल

1. झांसी  2. चित्रकूट  3.  महोबा 4. बांदा-कलिंजर 5. ओरछा 6. काल्पी 7. चरखारी 9. देवघर 10. खजुराहो 

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