ड्रेस तो बांट दी लेकिन शिक्षकों पर चढ़ गया तीन करोड़ का क़र्ज़

ड्रेस तो बांट दी लेकिन शिक्षकों पर चढ़ गया तीन करोड़ का क़र्ज़

गोण्डा। जि़ले के परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों के ऊपर तीन करोड़ रुपए का ‘अजब कर्ज’ चढ़ गया है। बीते शिक्षा सत्र में स्कूलों में शिक्षकों ने ड्रेस का वितरण तो कर दिया, लेकिन अभी तक उन्हें 25 प्रतिशत धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है।

शिक्षा सत्र 2014-15 में परिषदीय विद्यालयों के कक्षा आठ तक करीब तीन लाख बच्चे पंजीकृत थे। जिले में कुल 2382 प्राइमरी और 1060 माध्यमिक स्कूल हैं। सभी बच्चों को यूनीफार्म उपलब्ध कराने के लिए 75 प्रतिशत धनराशि रूप में 12 करोड़ रुपये शिक्षकों के खाते में भेजे जाने थे। शेष करीब तीन करोड़ रुपये ड्रेस आपूर्ति के बाद उपलब्ध कराने को कहा गया था, जो अभी तक नहीं आये हैं|

प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री विनय तिवारी बताते हैं, ''25 प्रतिशत धनराशि यह कह कर रोकी गई कि यूनीफार्म की गुणवत्ता सही होने तथा उपभोग प्रमाण पत्र देने पर ही भुगतान किया जाएगा। साल भर बीत चुका है लेकिन अभी तक गुणवत्ता तक नहीं चेक की गई और न ही भुगतान किया गया।”

तिवारी बताते हैं कि बीते सत्र में जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षाधिकारी ने ड्रेस वितरण के लिए टेंडर निकाला था और एक फर्म को वितरण की जिम्मेदारी सौंपी थी, जबकि विद्यालय प्रबंध समिति को ड्रेस वितरण की जिम्मेदारी निभाने का शासनादेश है। प्रबंध समिति के खाते में ड्रेसों के लिए पैसा आता है और शिक्षक पैसे निकालकर ड्रेसों का भुगतान करते हैं।

 ''इसके बाद शिक्षकों के विरोध करने पर कुछ दिन बाद टेंडर निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद बच्चों को दो-दो सेट यूनीफार्म वितरण के लिए प्रति विद्यार्थी 400 रुपये दिए जाने थे लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यूनीफार्म आपूर्ति के लिए केवल 75 प्रतिशत धनराशि ही शिक्षकों के खातों में भेजी। एक विद्यार्थी के लिए 400 रुपये की जगह 300 रुपये ही दिए गए” तिवारी ने कहा।

प्राथमिक विद्यालय कटरा बाजार में कुल 135 बच्चे पढ़ते हैं। वहां के अध्यापक नितिन मिश्रा बताते हैं, “ इस साल भी केवल 75 प्रतिशत पैसा ही आया है। इसके लिए बीएसए और डीएम ऑफिस में जाकर प्रदर्शन भी किया गया था लेकिन सुनवाई नहीं हुई।”

प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री विनय तिवारी बताते है, ''कुछ शिक्षक इस मामले को लेकर हाईकोर्ट भी गए हैं। हालांकि अभी तक इस मामले पर कोई फैसला नहीं आया है।”

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