मेडिकल कॉलेजों के विदेशी छात्रों का भविष्य खतरे में

मेडिकल कॉलेजों के विदेशी छात्रों का भविष्य खतरे मेंप्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली (भाषा)। इस वर्ष देश के निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले सैकड़ों विदेशी छात्रों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। प्रवेश परीक्षा संबंधी प्रावधान के कारण उन्हें इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में विदेशी छात्र अब तक संस्थागत कोटा प्रणाली के माध्यम से देश के सरकारी कॉलेजों और सीधे आवेदन करके निजी कॉलेजों में दाखिला लेते हैं। लेकिन निजी और डीम्ड संस्थानों के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को अनिवार्य किये जाने संबंधी उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेश से उन्हें अनिश्चितता की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वे नीट श्रेणी में नहीं आते हैं।

नीट की अहर्ता संबंधी शर्तों के अनुसार केवल भारतीय नागरिक एवं दूसरे देशों में रह रहे भारतीय ही परीक्षा दे सकते हैं। इसमें विदेशी नागरिकों का कोई जिक्र नहीं होता। ऐसे में कॉलेजों ने विदेशी छात्रों को अगले सप्ताह तक कथित तौर पर परिसर छोड़ने के लिए कहा है। मणिपाल विश्वविद्यालय में बीडीएस करने आयी कोलंबो की शेनाली के पिता तिलक सिल्वा ने कहा, ‘‘नीट प्रावधान के कारण मेरी बेटी और अन्य विदेशी छात्रों को परेशानी का सामना करना पड रहा है।'' सिल्वा ने कहा, ‘सर्वप्रथम विदेशी छात्र नीट परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते और अब इनकी तुलना भारतीय छात्रों से की जा रही है। अब हम लोग कहां जाएं क्योंकि हम लोगों को 14 अक्तूबर तक परिसर छोड़ने के लिए कहा गया है। हमारे बच्चों का करियर खतरे में पड़ गया है।'

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