विश्व शौचालय दिवस: यूपी के 23 लाख घरों में अब तक शौचालय नहीं 

विश्व शौचालय दिवस:  यूपी के 23 लाख घरों में अब तक शौचालय नहीं जो शौचालय बने, उनका ऐसा है हाल।

लखनऊ। स्वच्छ भारत अभियान में लाख कोशिशों के बावजूद राज्य के 23 लाख ग्रामीण घरों में अब तक शौचालय का निर्माण नहीं किया गया है, जबकि सरकार इनके लिए 12000 रुपये की सब्सिडी भी दे रही है। पंचायती राज मंत्री की ओर से इस संबंध में सख्त आदेश जारी किये गये हैं, मगर फिर भी इनके निर्माण की रफ्तार मंद है। समस्या केवल निर्माण का ही नहीं है, लोगों को इन ट्वायलेट तक पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए जागरूकता अभियान की बातें बहुत की गईं। इसके तहत कुछ जिलों में अफसरों के बेहतर कामों की वजह से कुछ अभियान चलाए गए, मगर बाकी जगह तो बस कागजों में ही अभियान चलाए जाते रहे।

पंचायती राज मंत्री ने हाल में दिये थे सख्त निर्देश

अभी एक महीने पहले की ही बात है। पंचायती राज मंत्री राम गोविन्द चौधरी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये थे कि पंचायती राज विभाग की योजनाओं के संचालन में किसी भी स्तर पर निर्माण कार्यों में शिथिलता, भ्रष्टाचार एवं कमीशनखोरी बर्दाश्त नहीं की जायेगी। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के लिए स्वीकृत धनराशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाये। साथ ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाये रखते हुये कार्यों में तेजी लायी जाए, ताकि सभी कार्यों को समय से पूरा किया जा सके। उन्होंने विभागीय कार्यों के संचालन में आ रही दिक्कतों को शीघ्र दूर करने भी निर्देश दिये।

अभी तक 6.40 लाख शौचालय

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 30 लाख लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 6.40 लाख व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण किया गया। स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत पूरे देश में भले ही प्रदेश को दूसरा स्थान मिला है, मगर आबादी के लिहाज से यूपी बहुत पीछे है। प्रदेश में व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण के लिए लाभार्थी को 12 हजार रुपये प्रति शौचालय दिये जा रहे हैं। खुले में शौच मुक्त प्रदेश बनाने के लिए लोगों को शौचालय निर्माण तथा इसका उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

मात्र 836 गांव खुले में शौच मुक्त

खुले में शौच मुक्त योजना के तहत प्रदेश के 836 ग्रामों को संतृप्त किया गया है तथा 100 ग्रामों का सत्यापन भी हो चुका है। उन्होंने बताया कि इस योजना के लिए कुल 79.65 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हुई है। जिसमें से 61.77 करोड़ रुपये व्यय की गयी।

न ही बजी सीटी, न ही जली टार्च

जहां सोच वहां शौचालय। इसी सोच को बनाने के लिए कोशिशें परवान नहीं चढ़ाई जा सकीं। खुले में शौच के उन्मूलन को लेकर पंचायती राज विभाग ने करीब तीन महीने पहले अभियान शुरू करने का एलान किया था। जिसमें सुबह सुबह विभाग के कर्मचारी और एनजीओ की मदद से लोगों को घर में ट्वायलेट होने के बावजूद अगर खेत में जाते हुए नजर आएंगे तो उनको सीटी बजा कर और टार्च जला कर ऐसा करने से रोका जाएगा। कार्यकर्ता शोर मचाएंगे, मगर लोगों को खुले शौच करने से रोकेंगे। विभाग का दावा था कि ये अभियान 55 जिलों में शुरू करेगा। मगर वास्तविकता में ये अभियान जमीन पर नहीं उतर सका है। कुछ जिलों जैसे कन्नौज, लखनऊ, उन्नाव वगैरह में कुछ समय पहले इस तरह की कोशिशें हुईं थीं, मगर बाकी प्रदेश में ये जागरूकता नहीं नजर आई।

2030 तक सभी के लिए शौचालय हो

विश्व शौचालय दिवस, 19 नवंबर को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। एक शौचालय के बिना रहने वाले 2.4 अरब लोगों तक जागरूकता पहुंचाना लक्ष्य है। विश्व शौचालय दिवस 2016 की थीम 'शौचालयों और रोजगार के अवसर' पर है। स्वच्छता के लिए एक वैश्विक विकास प्राथमिकता है। सतत विकास लक्ष्यों, 2015 में शुरू किया गया था। दुनिया में हर किसी के लिए 2030 तक सभी के लिए शौचालय हो, यह इसका लक्ष्य है।

पंचायती राज विभाग के अफसरों को इस संबंध में सख्त हिदायत दी गई है कि वे गांवों में ट्वायलेट का निर्माण करवाने में कोई कमी न छोड़ें। निर्माण होता जाएगा उसी हिसाब से सब्सिडी दी जाएगी। जिससे लोग इस मद में मिले धन का दुरुपयोग न कर सकें। इसके अलावा जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
रामगोविंद चौधरी, मंत्री, पंचायती राज विभाग

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