लखनऊ में है अनोखा डेयरी फार्म, लावारिश पशुओं के इलाज में खर्ज होती है पूरी कमाई

लखनऊ में है अनोखा डेयरी फार्म, लावारिश पशुओं के इलाज में खर्ज होती है पूरी कमाईठंडक में बछड़े को बोरा ओढ़ते अनुराग। फोटो:गाँव कनेक्शन

बसंत कुमार

लखनऊ। तीन महीने पहले प्लास्टिक खाने के कारण बीमार पड़ी एक गाय ने खाना बिल्कुल छोड़ दिया था, वह बेहद दुबली होती जा रही थी। दिन-प्रतिदिन दुबली होती गाय का मरना लगभग तय था तभी इस पर अनुराग मिश्रा की नज़र पड़ी और आज वह गाय बिलकुल ठीक है।

लखनऊ जिले से लगभग 20 किलोमीटर दूर जयपाल खेड़ा गाँव में रहने वाले अनुराग मिश्रा (50 वर्ष) ने पिछले 25 वर्षों में लगभग 300 लावारिस पशुओं को ठीक किया है। अनुराग मिश्रा बताते हैं, "मुझे बचपन से ही जानवरों से प्रेम है। जब भी मैं लावारिस जानवरों को देखता था तो दुख होता था। तभी से मैंने सोचा था कि जब कमाने लगूंगा तो इन जानवरों के लिए कुछ करूंगा।" जानवारों को पालने के लिए एक एकड़ में फैले इनके धाम में 55 जानवर हैं, जिसमें 25 लवारिस हैं।

अनुराग आगे बताते हैं, "1989-90 में मैंने एमबीए करने के बाद जब नौकरी की तब लखनऊ के करीब जयपाल खेड़ा गाँव में जमीन खरीद शिवराम धाम नाम से जानवरों का देखभाल करना शुरू किया। तबसे अब तक 300 पशुओं को ठीक कर चुके हैं। ठीक करने के बाद हम जानवरों को छोड़ते नहीं हैं। हमारे यहां जो जानवर आता है वो अपनी अंतिम समय तक यहीं रहते हैं।"

न करें प्लास्टिक पैकेट का इस्तेमाल

पशु प्रेमी अनुराग मिश्रा लोगों से गुज़ारिश करते हुए कहते हैं कि हमें प्लास्टिक के पैकेट में खाने का समान कूड़े में नहीं फेंकना चाहिए। क्योंकि जानवरों को तो पता नहीं होता कि वो सूंघकर खाने वाले समान के साथ प्लास्टिक भी खा जाते हैं। प्लास्टिक खाने के कारण जानवरों का पाचन क्रिया प्रभावित होती है और वो खाना कम कर देते हैं।

लावारिस पशुओं की देखभाल के लिए खोला डेयरी फार्म

अनुराग मिश्रा बताते हैं, "डेयरी फॉर्म से कमाए पैसों से बीमार गाय-भैसों की देखभाल करता हूं। हमारे यहां सड़क पर बीमार भटकती गायें और भैसें आयीं। हमने उनकी देखभाल की, जिसके बाद वो भी दूध दे रही हैं।" हम खुद ही ऐसे जानवरों को देखते रहते हैं जो लावारिस होते हैं और जिनको कोई गंभीर बीमारी होती है। नगर निगम की मदद से पशुओं को धाम में लाया जाता है।

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