यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव की वजह से राजनीतिक सरगर्मियों से भरा रहा साल 2016

यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव की वजह से राजनीतिक सरगर्मियों से भरा रहा साल 2016SP मुखिया मुलायम सिंह यादव को इस वर्ष अप्रत्याशित रुप से पारिवारिक अंतर्कलह देखनी पड़ी। एक बार तो ऐसा भी लगा कि SP में विभाजन हो जाएगा।

लखनऊ (भाषा)। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसे लेकर साल 2016 में पूरे वर्ष राजनीतिक सरगर्मियां रहीं। कानपुर का ट्रेन हादसा इस वर्ष का सबसे दुखद अनुभव रहा, जिसमें करीब डेढ़ सौ यात्रियों की जान चली गयी।

SP मुखिया मुलायम सिंह यादव को इस वर्ष अप्रत्याशित रुप से पारिवारिक अंतर्कलह देखनी पड़ी। एक बार तो ऐसा भी लगा कि SP में विभाजन हो जाएगा। वर्ष के मध्य में यादव परिवार का घमासान सार्वजनिक हो गया जब उसके SP नेता शिवपाल सिंह यादव ने माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल के SP में विलय का ऐलान किया। इस फैसले से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव नाखुश थे।

तीन दिन बाद ही मुख्यमंत्री के दबाव में विलय रद्द कर दिया गया। उसके बाद SP में कुछ ना कुछ गड़बड़ी होती रही। हालांकि मुलायम ने सबको एकजुट रखने की पूरी कोशिश की। ‘मिस्टर क्लीन' की छवि को बनाये रखने के प्रयास में अखिलेश ने दागी खनन मंत्री गायत्री प्रजापति सहित दो मंत्रियों को राज्य कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

अखिलेश ने दागी खनन मंत्री गायत्री प्रजापति सहित दो मंत्रियों को राज्य कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

इसकी प्रतिक्रिया में मुलायम ने पुत्र अखिलेश को SP के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया और उनकी जगह चाचा शिवपाल यादव को नया प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। ‘जैसे को तैसा' की तर्ज पर अखिलेश ने मंत्री चाचा के विभाग छीन लिये। नाराज चाचा ने मुख्यमंत्री के समर्थक माने जाने वाले कई युवा SP नेताओं को बर्खास्त कर दिया।

मुलायम के चचेरे भाई राम गोपाल यादव पर भी आंच आयी। अखिलेश का समर्थन करने और राज्यसभा सांसद अमर सिंह का विरोध करने की कीमत उन्हें चुकानी पड़ी और छह साल के लिए उन्हें SP से निष्कासित कर दिया गया। हालांकि बाद में उनकी घर वापसी हो गयी। विपक्षी दलों ने इस अंतर्कलह को लेकर SP पर लगातार हमले बोले। मुलायम को लगा कि इस घटनाक्रम से SP की चुनावी संभावनाएं धूमिल हो जाएंगी तो उन्होंने सभी निष्कासन रद्द कर दिये और सबको एकजुट रहने का संदेश दिया ताकि जनता के बीच भी सही संदेश जाए।

BSP सुप्रीमो मायावती को अंतर्कलह से लगा कि अब मुसलमान वोट SP से कट जाएगा। तब उन्होंने मुस्लिमों से SP को वोट नहीं देने की अपील करना शुरु कर दिया और दलील दी कि इससे BJP को फायदा होगा। प्रदेश में मुसलमानों की आबादी लगभग 20 प्रतिशत है और उनका वोट किसी भी पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण माना जाता है।

BSP के लिए भी हालांकि यह वर्ष चुनौती भरा रहा। मायावती के कई करीबी नेता पार्टी छोड़ गये। इनमें स्वामी प्रसाद मौर्य, आर के चौधरी और ब्रजेश पाठक के नाम प्रमुख हैं। सबको मायावती के काम करने के अंदाज पर आपत्ति थी और कुछ ने उन पर पार्टी के टिकट बेचने का आरोप भी मढ़ा।

मायावती के कई करीबी नेता पार्टी छोड़ गये। इनमें स्वामी प्रसाद मौर्य, आर के चौधरी और ब्रजेश पाठक के नाम प्रमुख हैं।

मतदाताओं को लुभाने की कवायद में BJP ने भी परिवर्तन यात्रा शुरु की। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कई जनसभाएं कीं। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह सहित केंद्र के मंत्रियों और BJP के वरिष्ठ नेताओं ने भी कई जनसभाओं को संबोधित किया। विरोधियों का मुंह बंद करने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने विकास कार्यों और कल्याण योजनाओं का उल्लेख करते रहे और प्रदेश की जनता को समझाने की कोशिश करते रहे कि SP दरअसल विकास चाहती है। इस कड़ी में उन्होंने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे और लखनऊ मेट्रो का लोकार्पण किया।

उधर उत्तर प्रदेश में जमीन मजबूत करने में जुटी कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने देवरिया से दिल्ली तक ‘किसान यात्रा' निकाली। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया।

वर्ष समाप्त होते होते ‘नोटबंदी' का बड़ा फैसला हुआ और जैसे जैसे बैंकों और ATM के बाहर लोगों की कतारें बढ़ती गयीं, विपक्षी दलों को BJP पर हमला तेज करने का मौका मिलता गया। जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिनके पास बड़ी मात्रा में काला धन है, वे ही हाय तौबा कर रहे हैं।

इस वर्ष को राज्य में एक बडे रेल हादसे के लिए भी याद किया जाएगा। कानपुर के पुखरायां में 20 नवंबर को इंदौर-पटना एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतर गये। हादसे में डेढ़ सौ यात्रियों की जान चली गयी। हादसा मध्यरात्रि के बाद हुआ। उस समय यात्री अपने अपने डिब्बे में सो रहे थे। दुर्घटना के बाद सैकड़ों यात्री डिब्बों में फंस गये।

इस वर्ष को राज्य में एक बडे रेल हादसे के लिए भी याद किया जाएगा। कानपुर के पुखरायां में 20 नवंबर को इंदौर-पटना एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतर गये।

वाराणसी-चंदौली सीमा पर पुल हादसे के लिए भी साल 2016 याद रहेगा। यहां 15 अक्तूबर को धार्मिक आयोजन में शामिल होने आयी भीड़ में भगदड़ मच गयी, जिससे 24 लोगों की मौत हो गयी जबकि 50 अन्य घायल हो गये। जयगुरुदेव के हजारों अनुयायी चंदौली के डोमरी गाँव के धार्मिक आयोजन में शामिल होने जा रहे थे कि गंगा नदी पर बने राजघाट पुल पर भगदड मच गयी। मृतकों में 20 महिलाएं थीं।

जयगुरुदेव के अनुयायियों के नाम से जुड़ा एक अन्य प्रकरण मथुरा में दो जून को हुआ, जब जवाहरबाग में रामवृक्ष यादव के सशस्त्र अनुयायियों की पुलिस से भिडंत हो गयी। पुलिस अवैध कब्जा हटाने गयी थी। हिंसा में पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारी और साठ वर्षीय रामवृक्ष सहित 29 लोगों की मौत हो गयी और 40 अन्य घायल हो गये।

एटा और फर्रुखाबाद जिलों में जहरीली शराब पीने से 25 लोगों की मौत हो गयी जबकि कई की आंख की रोशनी चली गयी। उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों विशेषकर लखनऊ में डेंगू से 40 लोगों की जान गयी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार की निष्क्रियता पर नाराजगी जतायी।

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