भोपाल मुठभेड़: सवाल उठाने वालों पर बरसी भाजपा, कांग्रेस-माकपा ने की न्यायिक जांच की मांग

भोपाल मुठभेड़: सवाल उठाने वालों पर बरसी भाजपा, कांग्रेस-माकपा ने की न्यायिक जांच की मांगभोपाल मुठभेड़ के सामने आए कथित वीडियो के बाद इसकी न्यायिक जांच की मांग उठ रही है। फोटो- आईएएनएस

नई दिल्ली (आईएएनएस)| भोपाल की जेल से फरार प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े आठ विचाराधीन कैदियों को मुठभेड़ में मार गिराए जाने पर विपक्षी पार्टियों ने जब सवाल उठाए तो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन पर आतंकवादियों व अपराधी सरगनाओं के तुष्टिकरण का आरोप लगाया। मध्यप्रदेश की राजधानी में सेंट्रल जेल से फरार हुए सिमी से जुड़े आठ विचाराधीन कैदियों को पुलिस ने शहर के बाहरी हिस्से में सोमवार को मुठभेड़ में मार गिराया। वे रविवार (दिवाली) की रात जेल की दीवार फांदकर भागे थे।

कांग्रेस, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) तथा आम आदमी पार्टी (आप) ने इस घटना की जांच की मांग की।

भोपाल की जेल में सुरक्षागत खामियों पर पर्दा डालते हुए भाजपा के प्रवक्ता जी.वी.एल.नरसिम्हा राव ने कहा कि विपक्षी पार्टियां सुरक्षाबलों के मनोबल पर हमला कर रही हैं।

उन्होंने कहा, "मारे गए सभी आतंकवादी बम विस्फोट, हत्या व डकैती सहित कई संगीन वारदातों में शामिल थे। फिर सुरक्षाकर्मियों की सफलता का स्वागत करने के बजाय राजनीतिक दल ऐसी घटना की आलोचना करने में क्यों जुटे हैं?"

राव ने यहां संवाददाताओं से कहा, "वाम दल, कांग्रेस तथा आप हमेशा सेना व पुलिस बलों के मनोबल को गिराने की ताक में लगे रहते हैं।"

भाजपा नेता ने कहा, "यह बेहद शर्मिदगी वाली बात है कि ये सभी पार्टियां आतंकवादियों, अलगाववादियों तथा अपराधियों के तुष्टीकरण में लगी हैं। यह सब राजनीति के तहत किया जा रहा है।"

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तथा उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए राव ने कहा कि विपक्षी पार्टियों की विकृत धर्म निरपेक्षता उनकी राजनीतिक पराजय का कारण बनेगी।

उन्होंने कहा, "हमने बाटला हाउस मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादी के लिए सोनिया गांधी को आंसू बहाते हुए देखा है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हमने राहुल गांधी को सेना के पराक्रम पर सवाल उठाते हुए देखा है।"

प्रवक्ता ने कहा, "विकृत धर्म निरपेक्षता में शामिल अधिकांश पार्टियां इस उम्मीद में ऐसा करती हैं कि वे मतदाताओं के एक हिस्से का तुष्टिकरण करने में सफल हो सकते हैं। अतीत में इन्होंने उनके लिए कुछ भी नहीं किया, लेकिन ये पार्टियां अभी भी वोट बैंक की राजनीति में लगी हैं।"

उन्होंने कहा कि भाजपा ने सभी राजनीतिक दलों से वोट बैंक की राजनीति छोड़ने की अपील की है, अन्यथा उनकी ये विकृत राजनीति उनके राजनीतिक अवसान का कारण बनेगी।

कांग्रेस, माकपा और आप ने उठाई भोपाल मुठभेड़ की न्यायिक जांच की मांग

कांग्रेस, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और आम आदमी पार्टी (आप) ने सोमवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में केंद्रीय कारागार से भागे सिमी के विचाराधीन आठ सदस्यों की कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत की न्यायिक जांच कराए जाने की मांग की है। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तेवारी ने आईएएनएस से कहा, "कथित तौर पर जेल से भागने को लेकर सामने आए तथ्यों और परिस्थितियों से कई सवाल उठते हैं। जेल से भागे आठों सदस्यों का पुलिस मुठभेड़ में मारा जाना कई प्रासंगिक सवाल खड़े करता है कि उन्हें गोलीबारी में मारा गया या उनके पास भी हथियार थे।"

मनीष तिवारी ने सामने आए कथित तौर पर इसी एनकाउंटर के वीडियो की ओर भी इशारा किया।

कई समाचार चैनलों और सोशल मीडिया पर छाए इस वीडियो में एक पुलिसकर्मी सिमी के कथित सदस्य पर गोली चला रहा है। वहीं एक अन्य पुलिसकर्मी मरे पड़े एक सिमी सदस्य की जेब से चाकू निकाल रहा है। वीडियो में दिखाए गए घटनास्थल पर सिमी के ये संदिग्ध सदस्य मृत अवस्था में जमीन पर पड़े दिखाई दे रहे हैं।

तिवारी ने कहा, "तथाकथित वीडियो में दिखाई दे रहा है कि पुलिस ने जैसा दावा किया है एनकाउंटर उस तरह का नहीं है। यह फर्जी एनकाउंटर प्रतीत हो रहा है। इसलिए इस पूरे मामले की जांच केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से स्वतंत्र सर्वोच्च न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश के अधीन कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।"

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी पूरे घटनाक्रम में साजिश होने की ओर इशारा किया है।

द्विग्विजय सिंह ने मामले की स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग करते हुए कहा, "यह एक गंभीर मामला है। पहली बार सिमी के कार्यकर्ता खंडवा की जेल से 2013 में फरार हुए थे। अब वे भोपाल की जेल से फरार हुए हैं। क्या वास्तव में वे जेल से भागे या किसी विशेष साजिश के तहत उन्हें जेल से भगाया गया।"

ज्ञात हो कि रविवार देर रात भोपाल की केंद्रीय जेल से सिमी के आठ आतंकवादी एक प्रहरी की गला रेतकर हत्या करके और एक अन्य को बंधक बनाने के बाद फरार हो गए थे, जिन्हें कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने राजधानी से 25 किलोमीटर दूर गुनगा थाना क्षेत्र के अचारपुरा के जंगल में मार गिराया।

माकपा की पोलित ब्यूरो की सदस्य बृंदा करात ने कहा, "सरकार की ओर से दिया गया बयान संदिग्ध है और अपने ही पूर्व बयानों से विरोधाभासी है।"

उन्होंने आगे कहा, "इसलिए सच्चाई का पता लगाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के अधीन इसकी स्वतंत्र जांच करवाई जाए। सरकार के इस मनगढ़ंत बयान पर कोई भी विश्वास नहीं कर सकता।"

बृंदा ने कहा, "मारे गए सभी आतंकवादियों के खिलाफ अभी अदालत में मामला चल ही रहा था और उन्हें सिमी का आतंकवादी कहना और इस तरह मार देना कानून का उल्लंघन है।"

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी घटना की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराए जाने की मांग की है।

केजरीवाल ने ट्वीट किया, "यह बहुत ही गंभीर है। हम (सिमी कार्यकर्ताओं के मारे जाने के मामले की) जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग करते हैं।"

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