पेरिस समझौते से अमेरिका का पीछे हटना नुकसानदेय हो सकता है : भारत 

पेरिस समझौते से अमेरिका का पीछे हटना नुकसानदेय हो सकता है : भारत विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सुजाता मेहता

संयुक्त राष्ट्र (भाषा)। महत्वाकांक्षी पेरिस जलवायु समझौते से ट्रंप प्रशासन के पीछे हटने की आशंका के बीच भारत का कहना है कि इस ऐतिहासिक समझौते के क्रियान्वयन की प्रतिबद्धताओं से कदम वापस खींचना सभी के लिए हानिकारक हो सकता है।

सतत विकास एजेंडा, 2030 और सतत शांति के बीच सहयोग पर मंगलवार को यहां हुई उच्च स्तरीय वार्ता में विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सुजाता मेहता ने कहा कि निरंतर विकास का एजेंडा और पेरिस समझौता समिति जिम्मेदारी और जरूरतमंद लोगों को सहायता पहुंचाने की आवश्यकता है।

हालांकि उन्होंने चिंता जताई कि ऐतिहासिक समझौते के क्रियान्वयन के बाद होने वाली प्रगति उतनी उत्साहजनक नहीं है। उन्होंने कहा, ‘इन दो ऐतिहासिक समझौतों के क्रियान्वयन संबंधी दायित्वों से परंपरागत सहयोगियों के पीछे हटने के संकेत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। ये समझौते वास्तव में मानवीय समाजों को बदलकर रख सकते हैं और हम सब की बेहतरी के लिए हैं लेकिन इनसे कदम वापस लेना ऐसा संभावनाओं पर सवाल खड़े कर देता है। प्रतिबद्धताओं से पीछे हटना हम सभी को नुकसान पहुंचा सकता है।’ पिछले सप्ताह राष्ट्रपति का पदभार संभालने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन पर संदेह जताया था जिसके बाद यह अंदेशा जताया जाने लगा था कि अमेरिका जलवायु परिवर्तन से निबटने वाले पेरिस समझौते से कदम खींच सकता है।

सुजाता मेहता ने कहा कि वैश्विक विकास के दीर्घकालिक प्रयासों में सहयोग और क्षमता निर्माण में विकासशील देशों और संयुक्त राष्ट्र को मदद देने के अलावा सतत विकास और जलवायु परिवर्तन पर महत्वकांक्षी एजेंडा को लागू करने की दिशा में भारत पुरजोर तरीके से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि शांति और सुरक्षा अब साझा व प्रधान अवधारणा हैं जो दीर्घकालिक निष्पक्ष सतत विकास पर निर्भर करते हैं। मेहता ने कहा, ‘इसके लिए, सतत विकास के लक्ष्यों को लागू करने की खातिर राष्ट्रों की सरकारों में वैश्विक साझेदारी की वास्तविक भावना के साथ-साथ ठोस प्रतिबद्धता की जरूरत है।'

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