पांच सौ और हजार रुपए के नोट बंद करने के सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट नहीं लगाएगी रोक  

Sanjay SrivastavaSanjay Srivastava   15 Nov 2016 4:45 PM GMT

पांच सौ और हजार रुपए के नोट बंद करने के सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट नहीं लगाएगी रोक  नए युग का स्वागत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 500 रुपए व 1000 रुपए के नोटों को बंद करने से उत्साहित सैंड कलाकार सुदर्शन पटनायक ने भुवनेश्वर में रेत पर एक नए युग को उकेरा है।

नई दिल्ली (भाषा)। सुप्रीम कोर्ट ने पांच सौ और एक हजार के नोटों के विमुद्रीकरण करने संबंधी सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने से आज इंकार कर दिया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि इस निर्णय से जनता को हो रही असुविधा कम करने के लिए हो रहे उपायों की जानकारी दी जाए।

प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड की पीठ ने कहा, ‘‘हम इस पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाएंगे।'' पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब कुछ वकीलों ने सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने का अनुरोध किया।

एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि वह अधिसूचना पर रोक लगाने का अनुरोध नहीं कर रहे है, परंतु वह चाहते हैं कि सरकार आम जनता को हो रही असुविधाओं को दूर करने के बारे में स्थिति स्पष्ट करे।

सरकार से जवाब-तलब मामले की अगली सुनवाई की तरीख 25 नवम्बर तय

पीठ ने अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जनता को हो रही असुविधाओं को न्यूनतम करने के लिए अब तक किए गए उपायों और भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों के बारे में हलफनामा दाखिल किया जाए। न्यायालय ने केंद्र और रिजर्व बैंक को नोटिस जारी किए बगैर ही इस मामले को 25 नवंबर को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

इसका (अधिसूचना) उद्देश्य सराहनीय लगता है परंतु इससे जनता को भी आमतौर पर कुछ असुविधा हो रही है।आप (केंद्र) काले धन के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं परंतु आप देश की जनता के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक नहीं कर सकते है।
तीरथ सिंह ठाकुर प्रधान न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट

याचिका पर सुनवाई शुरू होते ही केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने विमुद्रीकरण को चुनौती देने के लिए विभिन्न आधारों पर दायर याचिकाओं को खारिज करने का अनुरोध किया। केंद्र ने पहले ही इस मामले में एक अर्जी (कैविएट) दायर कर रखी थी जिसमें अनुरोध किया गया था कि उसका पक्ष सुने बगैर कोई आदेश नहीं दिया जाए।

आतंकवाद को फैलाने में बड़े पैमाने पर नकली मुद्रा का इस्तेमाल

रोहतगी ने विमुद्रीकरण के पीछे सरकार की सोच को रेखांकित करते हुये कहा कि जम्मू कश्मीर ओर पूर्वोत्तर राज्यों सहित देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकवाद को वित्तीय सहायता देने के लिए बड़े पैमाने पर नकली मुद्रा का इस्तेमाल हो रहा है।

अटार्नी जनरल ने पीठ की इस राय से सहमति व्यक्त की कि आम नागरिकों को कुछ असुविधा हो रही है क्योंकि इस तरह की ‘‘सर्जिकल स्ट्राइक''का कुछ नुकसान होना भी लाजमी है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘जन धन योजना' के तहत 22 करोड़ खातों सहित 24 करोड़ बैंक खाते हैं और केंद्र सरकार को उम्मीद है कि बैंकों, डाकघरों और दो लाख एटीएम पर धन का प्रवाह बना रहेगा।

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वकील सफाई ने कहा केंद्र के निर्णय का विरोध करने का कोई कानूनी आधार नहीं

अटार्नी जनरल ने कहा, ‘‘दो लाख एटीएम मशीनों को पहले से ही नई मुद्रा के अनुरुप नहीं ढाला जा सकता था क्योंकि ऐसा करने पर नकदी बैंकों से बाहर आ जाती। वैसे भी इस तरह की कार्रवाई में गोपनीयता सबसे महत्वपूर्ण होती है।''

रोहतगी ने कहा कि देश में आम नागरिकों को धन का वितरण करने के लिए करीब विभिन्न बैंकों की करीब एक लाख शाखाएं और दो लाख एटीएम मशीनों के साथ ही डाकघर भी हैं। उन्होंने कहा कि पैसा निकालने पर लगे प्रतिबंधों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अधिकांश लोगों को इसका भुगतान हो सके। उन्होंने कहा कि केंद्र के इस निर्णय का विरोध करने का कोई कानूनी आधार नहीं है जिसका उद्देश्य ‘बड़ी मछलियों' को पकड़ना हैं जिन्हें पकड़ने में पिछले 50 साल में सरकारें विफल रहीं।

यह आम आदमी के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक है : कपिल सिब्बल

याचिकाकर्ता आदिल अल्वी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि याचिका में इस अधिसूचना की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक कानून के प्रावधान का पालन नहीं किया गया है। उन्होंने कानून की धारा 26 (2) का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार एक ही झटके में बड़ी कीमत वाली मुद्रा की सभी श्रृंखलाओं का विमुद्रीकरण करने के लिए अधिकृत नहीं है।

यदि सरकार पांच सौ और एक हजार रुपए की सभी श्रृंखलाओं का विमुद्रीकरण करना चाहती है तो इसके लिए कानून बनाना होगा। उन्होंने कहा कि 1978 में इस संबंध में एक कानून बनाया गया था। उन्होंने कहा इसके साथ बैंकों और एमटीएम मशीनों से अपना ही धन हासिल करने में आम जनता को रही असुविधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह तो ‘‘आम आदमी के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक है।
कपिल सिब्बल वरिष्ठ अधिवक्ता (याचिकाकर्ता आदिल अल्वी की ओर से)

सुप्रीम कोर्ट नरेन्द्र मोदी सरकार के आठ नवबंर के फैसले के खिलाफ दायर चार जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 10 नवंबर को सहमत हो गई थी।

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इन याचिकाओं में से दो याचिका दिल्ली स्थित वकील विवेक नारायण शर्मा और संगम लाल पाण्डे ने दायर की थी जबकि दो अन्य याचिकाएं एम मुथुकुमार और आदिल अल्वी ने दायर की हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकार के इस औचक फैसले से देश में अफरातफरी हो गई है और जनता परेशान है। याचिका में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की अधिसूचना रद्द करने या इसे कुछ समय के लिए स्थगित रखने का अनुरोध किया गया है।

काले धन, भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का ‘निर्णायक युद्ध'

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ नवंबर को रात में राष्ट्र को संबोधित करते हुए घोषणा की थी कि पांच सौ और एक हजार रुपए की मुद्रा नौ नवंबर से अमान्य की जा रही है। उन्होंने कहा था कि सरकार ने काले धन ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘निर्णायक युद्ध' छेड़ दिया है।







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