विपक्ष के एकजुट होने से सरकार को कोई खतरा नहीं: नायडू          

विपक्ष के एकजुट होने से सरकार को कोई खतरा नहीं: नायडू          एम वेंकैया नायडू

नई दिल्ली (भाषा)। केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्षी दलों का साथ आना केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए कोई खतरा नहीं है और उन्होंने अगले लोकसभा चुनाव से पहले किसी नए राजनीतिक समीरण के बनने की संभावना को खारिज किया।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से ‘जलन करने वाले' विपक्षी दलों की एकजुटता महज अवसरवाद है और यह सफल नहीं होगी। नायडू ने कहा, ‘‘किसी भी नये राजनीतिक समीकरण से सामाजिक समीकरण या वैचारिक समीकरण परिलक्षित होना चाहिए। यह सत्ता की लालसा से पैदा हुए अवसरवाद पर आधारित नहीं हो सकता। इसलिए यह सफल नहीं होगा।'' उनसे सवाल किया गया था कि क्या नोटबंदी को लेकर BJP विरोधी दलों के बीच कोई राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना है।

संसद के हालिया शीतकालीन सत्र में इन विपक्षी दलों के साथ आने के बारे में पूछे जाने पर नायडू ने कहा कि विपक्ष नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री की लोकप्रियता से जलन रखता है।

उन्होंने कहा, ‘‘शुरु में इन लोगों ने इस कदम का स्वागत किया। फिर धीरे-धीरे इनको यह लगा कि वह और भी लोकप्रिय होते जा रहे हैं। इसके बाद इन पार्टियों ने इसके खिलाफ अपना पक्ष रखने के लिए कमियां तलाशनी शुरु कर दीं। फिर मीडिया में लोग कह रहे हैं कि राजनीतिक दलों का नया समीकरण बन रहा है।'' विपक्ष पर निशाना साधते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री ने कहा कि ये विपक्षी दल जनता के पास नहीं जा रहे हैं, सिर्फ टीवी स्टूडियो में बातें कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘वे संयुक्त रुप से संवाददाता सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं और फिर अलग हो जा रहे हैं। संसद में अवरोध पैदा करने वाली इनकी रणनीतियों को लोगों ने नहीं सराहा है।'' नायडू ने कहा कि इन विपक्षी दलों की एकजुटता टूटने के लिए ही बनी है, क्योंकि इनमें वैचारिक एकता नहीं है, वे किसी कार्यक्रम पर एक राय नहीं है और वे नेतृत्व को लेकर भी एकमत नहीं हैं।

नायडू ने कहा, ‘‘ममता जी (ममता बनर्जी) खुद को नेता के तौर पेश करना चाहती हैं। राहुल को लगता है कि नेता बनने के वह स्वाभाविक दावेदार हैं। वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस साथ नहीं जा सकते। ऐसे में कोई वैचारिक गठजोड नहीं है और ऐसा कोई दिग्गज व्यक्तित्व नहीं है जो विपक्ष का नेतृत्व करने का नैतिक प्राधिकार रखता हो।''

उन्होंने कहा, ‘‘वे मोदी के अंधविरोध में साथ आ रहे हैं। वे इस तथ्य को पचा नहीं पा रहे हैं कि लोगों ने मोदी को जनादेश दिया और एक आम व्यक्ति प्रधानमंत्री बन गया तथा वह रोजाना लोकप्रिय हो रहा है।'' नायडू ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश की राजनीति के नियम काफी हद तक बदले हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘लोक कहा करते थे कि आप विकास के एजेंडे पर चुनाव नहीं जीत सकते। मोदीजी ने दिखाया कि आप विकास के मुद्दे पर भी चुनाव जीत सकते हैं।'' उन्होंने कहा कि मोदी ने गुजरात में साबित किया और मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में BJP तीन बार विकास के एजेंडे पर चुनाव जीत गई।

नायडू ने कहा कि नोटबंदी के बाद BJP ने गुजरात में 80 फीसदी पंचायत सीटों पर चुनाव जीता। उन्होंने कहा, ‘‘नये राजनीतिक समीकरण में लोगों की वास्तविक आकांक्षाएं परिलक्षित होनी चाहिए। जनता खोखले वादे नहीं चाहती। लोग कुछ ऐसा चाहते हैं जिससे उनका जीवन स्तर सुधरे।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जमीनी हकीकत यह है कि आम लोगों ने नोटबंदी के फैसले का पूरा समर्थन किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसी बात ने कांग्रेस और कुछ विरोधी दल परेशान हैं। संवेदनशील नेता और पार्टियां इस तथ्य को जानते हैं। नीतीश कुमार और नवीन पटनायक ने नोटबंदी का समर्थन किया है और भ्रष्टाचार और दूसरे संबंधित मुद्दों को लेकर कड़े कदम उठाने का आह्वान किया है।'' नायडू ने कहा कि जनता परिवार का प्रयोग भी लोकतंत्र को वापस लाने के मकसद से किया गया था।

उन्होंने कहा कि विपक्ष ने पहले ‘भारत बंद' का आह्वान किया, लेकिन जब पाया कि कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है तो उन्होंने खुद को इससे अलग कर लिया। नायडू ने कहा कि फिर उन्होंने आक्रोश रैली का आयोजन किया जो फ्लॉप रही।

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