अफसरों के लिए बनी 50 करोड़ की बिल्डिंग खाली, किसानों को मुआवजा नहीं

अफसरों के लिए बनी 50 करोड़ की बिल्डिंग खाली, किसानों को मुआवजा नहींलखनऊ विकास प्रधिकरण कार्यालय के 11 वें तल पर पसरा सन्नाटा। फोटो: विनय गुप्ता

लखनऊ। एलडीए में हजारों किसानों मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। उनको मुआवजा देने के लिए एलडीए के पास हमेशा धन की कमी रही है मगर प्राधिकरण की शाहखर्ची का कोई सानी नहीं है। करीब 50 करोड़ रुपए की लागत से नई बिल्डिंग बना दी, मगर अधिकांश अफसर नई बिल्डिंग में जाने को राजी नहीं हैं। प्राधिकरण के वीसी भी नई से पुरानी बिल्डिंग को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। यही नहीं पुरानी बिल्डिंग में अपने-अपने कक्षों में अफसर करीब 50 लाख रुपए की लागत से रेनोवेशन भी करा रहे हैं।

गोमती नगर स्थित लखनऊ विकास प्राधिकरण के कार्यालय में 2011 में 11 मंजिल की नई बिल्डिंग का निर्माण शुरू करवाया गया था। इस 11 मंजिल की बिल्डिंग के केवल सिविल निर्माण के लिए तब 22 करोड़ का टेंडर किया गया था। करीब तीन साल में बिल्डिंग बन कर तैयार हो गई जिसके बाद में इसका बाकी कार्य पूरा होने का काम अब तक जारी है। सारा बजट मिला कर करीब 50 करोड़ रुपए का खर्च 11 मंजिल की इस शानदार बिल्डिंग के निर्माण में किया गया। अब जबकि इस बिल्डिंग में बैठने का मौका आया तब अधिकांश अधिकारी नए दफ्तर में बैठने से गुरेज़ कर रहे।

पुरानी बिल्डिंग में लौटे अफसर

अपने पहले कार्यकाल में वर्तमान एलडीए उपाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार सिंह ने नई बिल्डिंग की 10 वीं मंजिल पर बैठना शुरू किया था। उनके नए ऑफिस को व्यवस्थित करने में काफी खर्च किया गया था। सत्येंद्र कुमार सिंह जब जिलाधिकारी बन गए तब डॉ. अनूप कुमार यादव ने नई बिल्डिंग की 10 वीं मंजिल पर उनकी जगह ली। लगभग सभी अफसर नई बिल्डिंग में आ गए। मगर अनूप कुमार यादव जब पिछले महीने वीसी पद से हटाए गए और उनकी जगह सत्येंद्र कुमार सिंह दोबारा वीसी बने तो उन्होंने नए ऑफिस के बजाय पुरानी बिल्डिंग के वीसी आफिस में ही बैठना शुरू कर दिया। इसके बाद में प्राधिकरण के जितने भी अफसर नई बिल्डिंग में बैठ रहे थे उनमें से अधिकांश पुरानी बिल्डिंग में वापस आ गए। ऐसे में अब एक बार फिर से 50 करोड़ में बनाई गई नई बिल्डिंग सुनसान है।

पुरानी बिल्डिंग के ऑफिसों में खर्च कर रहे लाखों

एलडीए की नई बिल्डिंग खाली है मगर पुरानी इमारत के ऑफिसों में रेनोवेशन जारी है। अपर सचिव सीमा सिंह, संयुक्त सचिव एनएन सिंह और व्यवस्था अधिकारी अशोक पाल के ऑफिस में रेनोवेशन किया जा रहा है जिस पर लगभग 50 लाख रुपए का खर्च हो रहा है। मामूली कमियों के बहाने पूरे ऑफिस का रंगरूप निखारा जा रहा है। नई बिल्डिंग से पुरानी बिल्डिंग में मुख्य अभियंता ओपी मिश्र के अलावा लगभग सभी बड़े अधिकारी आ गए हैं।

मुआवजे और अपनी मांगों के लिए बेहाल किसान

दूसरी ओर प्रबंध नगर से लेकर गोमती नगर विस्तार, सीतापुर रोड से लेकर कानपुर रोड तक के सैकड़ों किसान एलडीए से मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन प्राधिकरण उनके बकाये का भुगतान नहीं कर रहा है। प्रबंध नगर स्कीम को महंगा बता कर एलडीए छोड़ने के लिए राजी है। यहां सर्किल रेट से चौगुना मुआवजा देने के लिए एलडीए राजी नहीं है। गोमती नगर विस्तार के किसान नेता देवेश यादव ने बताया कि एलडीए में शाहखर्ची जम कर की जाती है मगर जैसे ही बात किसानों के मुआवजे उनके गाँवों में विकास की आती है तब प्राधिकरण के अफसर बगले झांकते हैं।

नई बिल्डिंग के जरिये काम करना मुश्किल हो रहा था। वहां से कोआर्डिनेशन में दिक्कतें आती थीं, इसलिए अफसर पुरानी बिल्डिंग में बैठते हैं। कुछ स्टाफ नई बिल्डिंग में भी बैठता है।
अरुण कुमार, सचिव, एलडीए

अफसरों की शाहखर्ची से कर्मचारी भी परेशान

एलडीए कर्मचारी यूनियन के महामंत्री दिनेश शुक्ला ने बताया कि नई बिल्डिंग खाली होती जा रही है। सारे अफसर पुरानी बिल्डिंग में बैठ रहे हैं। ये प्राधिकरण कोष और जनता के दिए धन का सीधा दुरुपयोग है, मगर कोई बोलने वाला नहीं है। अगर इतनी बड़ी इमारत का इस्तेमाल ही नहीं करना था तब इसको बनवाया क्यों गया।

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