पाकिस्तान की अदालत ने निजी चैनलों को भारतीय फिल्में दिखाने की अनुमति दी 

पाकिस्तान की अदालत ने निजी चैनलों को भारतीय फिल्में दिखाने की अनुमति दी पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेग्यूलेटरी अथॉरिटी (पीईएमआरए) ने लाहौर उच्च न्यायालय के सामने रिपोर्ट पेश की थी जिसके मद्देनजर अदालत के मुख्य न्यायाधीश सैयद मंसूद अली शाह ने निजी टेलीविजन चैनलों को कल मंजूरी दे दी।

लाहौर (भाषा)। पाकिस्तान की एक अदालत ने वैध लाइसेंसधारी निजी टेलीविजन चैनलों को देश के नियामक प्राधिकरण के साथ उनके समझौते की शर्तों के अनुरुप भारतीय फिल्में दिखाने की अनुमति दे दी है।

पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेग्यूलेटरी अथॉरिटी (पीईएमआरए) ने लाहौर उच्च न्यायालय के सामने रिपोर्ट पेश की थी जिसके मद्देनजर अदालत के मुख्य न्यायाधीश सैयद मंसूद अली शाह ने निजी टेलीविजन चैनलों को कल मंजूरी दे दी। लियो कम्युनिकेशन ने केबल टेलीविजन नेटवर्क पर भारतीय कार्यक्रम प्रसारित करने पर लगे प्रतिबंध को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी जिस पर अदालत ने अंतरिम आदेश पारित किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि टेलीविजन चैनलों को लाइसेंस एस्टैबलिश एंड ऑपरेट सैटेलाइट टीवी ब्रॉडकास्ट चैनल स्टेशन के उपबंध 7.2 (दो) के तहत भारतीय फिल्में प्रसारित करने की अनुमति होनी चिाहए।

याचिकाकर्ता के वकील तफ्फजुल रिजवी ने अदालत में दलील दी कि चैनलों को भारतीय नाटक प्रसारित करने की भी अनुमति होनी चाहिए क्योंकि वे भी पीईएमआरए के साथ हुए लाइसेंस समझौते के तहत ‘मनोरंजन' की परिभाषा में शामिल हैं।

पीईएमआरए कानून अधिकारी ने इस दलील का विरोध करते हुए यह स्थापित करने के लिए समय मांगा कि ‘मनोरंजन' में ‘भारतीय नाटक' शामिल नहीं होते। उन्होंने कहा कि चैनलों को पीईएमआरए के साथ उनके लाइसेंस समझौतों की शर्तों के अनुसार भारतीय फिल्में प्रसारित करने की अनुमति है।

पीईएमआरए ने अपने अक्तूबर 2016 के आदेश में केबल नेटवर्क के जरिए चलने वाले पाकिस्तान के निजी चैनलों को भारतीय कार्यक्रम प्रसारित करने से रोक दिया था। दायर की गई याचिका में कहा गया है कि यह आदेश पीईएमआरए के नियमों एवं संविधान का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि वर्ष 2010 में उसे पीईएमआरए ने केबल चैनल फिल्माजिया के प्रसारण के लिए 15 साल के लाइसेंस की मंजूरी दी थी और लाइसेंस के तहत उसे भारतीय समेत 10 प्रतिशत विदेशी कार्यक्रम प्रसारित करने की अनुमति दी गई थी।

उसने कहा, ‘‘विदेशी (भारतीय) कार्यक्रम प्रसारित करने के कारण चैनल बहुत लोकप्रिय हो गया और देशभर में उसे दर्शकों की सर्वाधिक रेटिंग मिली है।'' इसमें आरोप लगाया गया, ‘‘सरकार चयनित देशभक्ति कर रही है क्योंकि भारतीय फिल्मों को देशभर के सिनेमा घरों में दिखाए जाने की अनुमति है जो दोहरे मापदंड दर्शाता है।'' अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई दो मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।

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