मरीज बिकते हैं, बोलो खरीदोगे

मरीज बिकते हैं, बोलो खरीदोगेसरकारी अस्पताल में खड़ी निजी अस्पताल की वैन एंबुलेंस और अस्पताल के दलालों से बात करती गांव कनेक्शन संवाददाता। (फोटो: विनय गुप्ता)

लखनऊ। "मैडम, आप परेशान न हो। आप के पापा को कुछ नहीं होगा। सरकारी अस्पताल का हाल तो आप देख ही रही हैं, यहां मरीजों का इलाज़ ठीक से नहीं करते हैं। मैं आपको एक प्राइवेट अस्पताल ले चलता हूं। वहां आपके पापा का अच्छा इलाज हो जाएगा।" यह शब्द सरकारी अस्पताल ट्रॉमा सेंटर के बाहर खड़े दलाल सुशील के हैं। लगभग सभी सरकारी अस्पतालों के बाहर प्राइवेट अस्पतालों ने अपने-अपने दलाल फिट कर रखे हैं। यह दलाल सरकारी अस्पताल के बाहर खड़े होकर मरीजों को अपनी सेटिंग वाले अस्पताल में ले जाते हैं।

जब लगी भनक तो...

गाँव कनेक्शन के संवाददाता को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने हकीकत की तलाश में परेशान तीमारदार बनकर प्राइवेट अस्पताल के लिए एम्बुलेंस तलाश करने की एक्टिंग की। तीमारदार को इधर-उधर दौड़ता भागता देख करीब एक घण्टे के बाद वह दलाल की नजरों में आ गया। फिर क्या था, एक दलाल ने दूसरे दलाल को फोन करके बुला लिया। दलाल ने मरीज को ले जाने से लेकर अपनी मर्जी के अस्पताल तक सेटिंग उसके मालिक से कर ली और अपना नम्बर देते वक्त यह भी कहा कि मैडम, हमको डायरेक्ट फोन कर लिजिएगा। क्योंकि अन्दर तक के कर्मचारी सब इस दलाली में मिले होते हैं अगर आप केजीएमयू के कर्मचारी से कहेंगी तो वह हमसे कमीशन ले लेगा, वही पैसा हम आपका कम कर देंगे।

मालिक से बात कराई और हो गई डीलिंग

तीमारदार ने उससे मरीज को लोहिया ले जाने की बात की थी, लेकिन उसने बात को यह कहकर मना कर दिया कि मैडम, सबसे बड़ा अस्पताल ट्रामा सेंटर ही है, यहां की हकीकत तो आप देख ही रही हैं। लोहिया में भी आपको वेंटीलेटर मिलेगा या नहीं, क्या पता? तीमारदार ने कहा, यहां तो उसको कुछ भी नहीं पता। वह यहां पहली बार आया है, कौन सा अस्पताल ले जाएं। तीमारदार का बस इतना कहना था कि दलाल सुधीर ने बर्लिंग्टन स्थित एफआई प्राइवेट अस्पताल के मालिक को फोन कर दिया और तीमारदार की बात अस्पताल के मालिक डॉ. पुष्कर से करा दी और वहीं सारी की सारी डीलिंग हो गयी।

सरकारी कर्मचारी वसूलते हैं कमीशन

गाँव कनेक्शन संवाददाता ने इस दलाली का काला चिट्ठा अपने फोन में रिकॉर्ड कर लिया। ऐसा सिर्फ ट्रामा के बाहर ही नहीं होता है, बल्कि हर अस्पताल के बाहर और अन्दर ऐसे दलाल लगे रहते हैं। जिसके तार अन्दर बैठे सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों से जुड़े होते हैं। सरकारी अस्पताल मरीज को प्राइवेट अस्पताल भेजने के लिए कमीशन के रूप में मोटी रकम वसूल करते हैं। इन दलालों की हिम्मत इतनी बढ़ गयी है कि यह दलाल सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों को अस्पताल के अन्दर से उठा ले जाते हैं और जहां से इनका कमीशन जुड़ा होता वहां ले जाकर पटक देते हैं और बदले में मोटी रकम वसूल करते हैं।

अभी तक कोई कर्मचारी हमारी पकड़ में नहीं आया है, जिस दिन कोई कर्मचारी पकड़ में आता है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और बाहर खड़ी एम्बुलेंस के लिए हम लोग कई बार लेटर लिख चुके हैं कि उसे हटवाया जाए, लेकिन जब नगर निगम हटवाता है तो कुछ दिन नहीं लगती हैं उसके बाद फिर लग जाती हैं।
डॉ. विजय कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, केजीएमयू

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