2.81 करोड़ मामले लंबित, जिला अदालतो‍ं में 5,000 न्यायाधीशों की कमी  

2.81 करोड़ मामले लंबित, जिला अदालतो‍ं में 5,000 न्यायाधीशों की कमी   सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट ने न्यायाधीशों की संख्या सात गुना बढ़ाने की सिफारिश की है

नई दिल्ली (भाषा)। देश भर की जिला अदालतों में 2.8 करोड़ मामले लंबित हैं और इन अदालतों में करीब 5,000 न्यायिक अधिकारियों की कमी है जो चिंताजनक स्थिति है।

इस स्थिति के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट की दो रिपोर्टों में न्यायिक अधिकारियों की संख्या को कम से कम सात गुना बढ़ाने की सिफारिश की गई है ताकि आगामी कुछ वर्षों में करीब 15000 से अधिक न्यायाधीशों की नियुक्ति करके इस संकट से उबरा जा सके।

न्यायालय की दो रिपोर्टों ‘भारतीय न्यायपालिका वार्षिक रिपोर्ट 2015-16' एवं ‘भारत की अधीनस्थ अदालतें: न्याय तक पहुंच पर रिपोर्ट 2016' में ये सुझाव दिए गए हैं और कई तीखी टिप्पणियां की गई हैं। ‘भारत की अधीनस्थ अदालतें... रिपोर्ट में कहा गया है कि इस चिंताजनक स्थिति से उबरने के लिए आगामी तीन वर्षों में 15000 से अधिक न्यायाधीशों की आवश्यकता होगी।

एक जुलाई 2015 से 30 जून 2016

लंबित मामले- 2,81, 25,066

निपटाए गए मामले- 1,89,04,222

न्यायिक अधिकारियों की स्वीकृत संख्या- 21,324

न्यायाधीशों के रिक्त पद- 4,954


न्यायाधीशों की नियुक्ति व मूलभूत सुविधाओं को लेकर न्यायपालिका एवं कार्यपालिका के बीच खींचतान की पृष्ठभूमि में इस रिपोर्ट में इन मामलों से निपटने में सरकार की असफलता को लेकर तीखी टिप्पणियां की गई हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सरकार उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का पालन करने और ‘ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन’ मामले की व्यवस्था के अनुसार न्यायाधीश-जनसंख्या अनुपात को बढ़ाकर प्रति 10 लाख पर 50 न्यायाधीश दर करने के लिए बाध्य है।'

कहां कितने कम हैं न्यायाधीश

गुजरात- 794 न्यायाधीश कम

बिहार- 792 न्यायाधीश कम

उत्तर प्रदेश- 624 न्यायाधीश कम

दिल्ली- 307 न्यायाधीश कम

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