अमेरिकी जज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवादित यात्रा प्रतिबंध पर अस्थायी और देशव्यापी रोक लगाई

अमेरिकी जज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवादित यात्रा प्रतिबंध पर अस्थायी और देशव्यापी रोक लगाईलॉस एंजिलिस विरोध प्रदर्शन करते भुक्तभोगी।

वाशिंगटन/लॉस एंजिलिस (भाषा)। अमेरिका के एक जज ने देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सात मुस्लिम बहुल देशों के यात्रियों और प्रवासियों पर लगाए गए प्रतिबंध पर अस्थायी और देशव्यापी रोक लगा दी है। यह ट्रंप के विवादित आदेश के लिए एक बड़ा झटका है।

सीएटल में अमेरिकी जिला जज जेम्स रॉबर्ट ने शासकीय आदेश पर अस्थायीतौर पर रोक लगाने वाला यह आदेश जारी किया। जब तक वाशिंगटन राज्य के अटॉर्नी जनरल बॉब फर्ग्यूसन की ओर से दायर शिकायत की पूर्ण समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक यह फैसला देशभर में लागू रहेगा।

लॉस एंजिलिस विरोध प्रदर्शन करते भुक्तभोगी।

ट्रंप के आव्रजन संबंधी शासकीय आदेश पर तत्काल रोक लगाए जाने का अनुरोध संघीय जज द्वारा स्वीकार किए जाने पर फर्ग्यूसन ने कहा, ‘‘आज संविधान की जीत हुई है। कानून से उपर कोई भी नहीं है, राष्ट्रपति भी नहीं।'' रॉबर्ट को पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने वर्ष 2003 में अदालत के लिए नामित किया था। रॉबर्ट ने कहा कि अदालत द्वारा मामले के गुण-दोष की पूरी समीक्षा किए जाने से पहले शासकीय आदेश को रोके जाने के लिए जरूरी सभी उच्च मानकों को फर्ग्यूसन ने पूरा किया।

अस्थायी रोक का यह आदेश संघीय अधिकारियों को प्रतिबंध के उन हिस्सों को लागू करने से रोकता है, जो सात मुस्लिम बहुल देशों से आने वाले प्रवासियों और शरणार्थियों को निशाना बनाते हैं। इसके साथ ही यह अधिकारियों को प्रतिबंध के वे हिस्से भी लागू करने से रोकता है, जो धर्म के आधार पर छूट देने की बात करते हैं। व्हाइट हाउस ने कहा है कि वह संघीय जज के फैसले के खिलाफ एक आपात आदेश के लिए याचिका दायर करेगा।

व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर।

व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने एक बयान में कहा, ‘‘न्याय मंत्रालय इस आदेश को जल्द से जल्द रुकवाने के लिए याचिका दायर करने और राष्ट्रपति के शासकीय आदेश का बचाव करने का इरादा रखता है. हमारा मानना है कि यह आदेश कानून संगत और उचित है।'' स्पाइसर ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति के आदेश का उद्देश्य देश की सुरक्षा करना है और उनके पास अमेरिकी जनता की सुरक्षा का अधिकार और जिम्मेदारी है।'' व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति के शासकीय आदेश का बचाव किया है।

स्पाइसर ने कहा, ‘‘जैसा कि नियम कहता है, ‘जब भी राष्ट्रपति को लगे कि बाहरी लोगांे या बाहरी लोगों के किसी वर्ग का अमेरिका में प्रवेश अमेरिका के हितों के लिए हानिकारक है, तो वह घोषणा के जरिए किसी तय अवधि के लिए सभी बाहरी लोगों, प्रवासियों या अप्रवासियों के प्रवेश को निलंबित कर सकते हैं या उनके प्रवेश पर कोई भी प्रतिबंध लगा सकते हैं।''' अदालत के फैसले की तारीफ करते हुए भारतीय-अमेरिकी कांग्रेस सदस्य प्रमिला जयपाल ने कहा, ‘‘यह एक अदभुत एवं बेहद अहम खबर है, ये आदेश अमानवीय और असंवैधानिक हैं।''

प्रमिला ने कहा, ‘‘यह फैसला सीएटल की एक अदालत से आया है और मुझे इस बात पर बहुत गर्व है कि मेरा शहर और मेरा राज्य मानवाधिकारों और कानून के शासन की रक्षा के लिए नेतृत्व कर रहा है। वाशिंगटन इस मार्ग का नेतृत्व कर रहा है।'' ट्रंप ने पिछले सप्ताह एक शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर करके इराक, सीरिया, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन से आने वाले यात्रियों पर कड़े नए नियंत्रण लगाए थे और शरणार्थियों के आगमन पर रोक लगा दी थी। ये कदम ‘‘चरमपंथी इस्लामी आतंकियों'' को अमेरिका से बाहर रखने के क्रम में उठाए गए थे।

सीनेट मायन्योरिटी नेता चार्ल्स शूमर ने जज के इस फैसले को संविधान की विजय बताया। वाशिंगटन के बड़े सरकारी संस्थानों ने अटॉर्नी जनरल की ओर से दायर इस वाद का समर्थन करते हुए शिकायत के साथ घोषणापत्र दायर किए थे।

वाशिंगटन राज्य के अटॉर्नी जनरल ने फर्ग्यूसन ने कहा, ‘‘जज रॉबर्ट का फैसला तत्काल प्रभावी हो गया है, इसने राष्ट्रपति ट्रंप के असंवैधानिक और गैर कानूनी शासकीय आदेश पर रोक लगा दी है। इस फैसले ने आदेश पर तत्काल ही राष्ट्रव्यापी रोक लगा दी है।''

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