अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा शुरू, जानिये  क्या  है 5,14 और 84 कोसी परिक्रमा का महत्व

अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा शुरू, जानिये  क्या  है 5,14 और 84 कोसी परिक्रमा का महत्व14 कोसी परिक्रमा 

लखनऊ। अयोध्या की 14 कोसी परिक्रमा की शुरुआत शनिवार से शुरू हो ये परिक्रमा रविवार को पूरे दिन चलेगी। गाँव कनेक्शन आज आपको अयोध्या में हो रही चौदह कोसी परिक्रमा का महत्व एवं उससे जुडी जानकारियाँ बताएगा। इस जानकारी को लखनऊ के प्रख्यात स्वामी धीरेन्द्र पांडे ने हमारे साथ साझा की है।

सरयू पर स्नान करते श्रद्धालु

अयोध्या में मुख्य तौर से 3 प्रकार की परिक्रमा होती हैं। पहली 84 कोसी, दूसरी 14 कोसी और तीसरा 5 कोसी। आपको बता दें कि 1 कोस में तीन किलो मीटर होते हैं। अयोध्या की सीमा तीन भागों में बंटी है। इसमें 84 कोस में अवध क्षेत्र, 14 कोस में अयोध्या नगर और 5 कोस में अयोध्या का क्षेत्र आता है। इस लिए तीन परिक्रमा की जाती है। इनमें से 84 कोसी परिक्रमा में साधू-संत हिस्सा लेते हैं, तो 14 कोसी और 5 कोसी परिक्रमा में आम लोग शामिल होते हैं।

परिक्रमा का मुख्य उद्देश्य ये है कि हिन्दू धर्म के मुताबिक जीवात्मा 84 लाख योनियों में भ्रमण करती है। ऐसे में जन्म जन्मांतर में अनेकों पाप भी किए होते हैं। इन पापों को नष्ट करने के लिए परिक्रमा की जाती है। कहा जाता है कि परिक्रमा में पग-पग पर पाप नष्ट होते हैं।

परिक्रमा में भारी भींड

14 कोसी परिक्रमा का महत्व

कार्तिक परिक्रमा को 14 कोसी परिक्रमा के तौर पर जाना जाता है। ये साल में एक बार होती है। ऐसा कहा जाता है कि कार्तिक परिक्रमा के दौरान भगवान विष्णु का देवोथान (जागना) होता है। इस वजह से इस दौरान किए गए काम को क्षरण नहीं होता। आप अगर मन से परिक्रमा में हिस्सा लें तो उसका फल आपको जरूर मिलता है।

5 कोसी परिक्रमा का महत्व

5 कोसी परिक्रमा अयोध्या क्षेत्र में हर एकादशी को होती है। इस तरह से हर महीने मे दो बार ये परिक्रमा होती है। इस परिक्रमा का भी उद्देशय पापों को नष्ट करना होता है।

84 कोसी परिक्रमा का महत्व

परिक्रमा में आये श्रद्धालु

84 कोसी परिक्रमा पूरे अवध क्षेत्र में होती है। इतनी बड़ी परिक्रमा की वजह से इसमें आम लोग शामिल नहीं होते। ये परिक्रमा खास तौर से साधु-संतों की ओर से की जाती है। इसका महत्व ये है कि इसमें साधु-संत समाज के कल्याण के लिए ये परिक्रमा करते हैं।

जो असमर्थ हैं वो ऐसे करें परिक्रमा

जिन लोगों को चलने में परेशानी है। वो रामकोट क्षेत्र की परिक्रमा भी कर सकते हैं। ये दूरी 3 किमी की है। वहीं, जो लोग रामकोट क्षेत्र की परिक्रमा करने में भी असमर्थ हैं वो अयोध्या में स्थ‍ित कनक भवन की परिक्रमा भी कर सकते हैं। कनक भवन के बारे में प्रचलित है कि राम विवाह के बाद माता कैकई ने सीता जी को मुंह दिखाई में इस भवन को दिया था।

अयोध्या में परिक्रमा में शामिल होने के लिए देश-विदेश के श्रद्धालुओं का आगमन शुक्रवार को भी जारी रहा। मेला क्षेत्र में रोडवेज बसों व ट्रेनों के अलावा निजी साधनों से लगातार यहां पहुंच रहे श्रद्धालु अपने-अपने गुरुधामों में रुक रहे हैं। अब तक कई लाख श्रद्धालुओं की आमद मेला क्षेत्र में हो चुकी है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां सरयू में डुबकी लगाने के साथ ही नागेश्वरनाथ मंदिर, हनुमानगढ़ी व कनक भवन के अलावा श्रीरामजन्मभूमि में विराजमान रामलला का दर्शन किए।

परिक्रमा मार्ग

30 अक्टूबर को होगी पंचकोसी परिक्रमा

मेलाधिकारी व एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय ने गाँव कनेक्शन को बताया कि अक्षय नवमी के पर्व पर 14 कोसी परिक्रमा होगी। पूरे कार्यक्रम के दौरान सेक्टर मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगी है। सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गयी है, भारी पुलिसकी व्यवस्था है वहीं देवोत्थानी एकादशी के पर्व पर 30 अक्तूबर को निर्धारित मुहूर्त दोपहर 2.57 बजे से पंचकोसी परिक्रमा की शुरुआत होगी। यह परिक्रमा भी 31 अक्तूबर को शाम तक चलती रहेगी। इस परिक्रमा में मेलार्थियों के साथ स्थानीय नागरिक भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। उन्होंने बताया कि मेला का समापन चार नवम्बर को पूर्णिमा स्नान के साथ होगा। जिला प्रशासन ने मेलार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था के साथ उनकी सुविधाओं को लेकर आवश्यक प्रबंध किया है।

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