टमाटर के बाद अब महंगा होगा प्याज, कीमतें 30 रुपए तक पहुंचीं, महंगाई के ये हैं 2 कारण

टमाटर के बाद अब महंगा होगा प्याज, कीमतें 30 रुपए तक पहुंचीं, महंगाई के ये हैं 2 कारणरुलाने को तैयार प्याज।

लखनऊ। टमाटर के बाद अब प्याज की कीमतें बढ़ने वाली हैं। पिछले दिनों फुटकर में 10 रुपए किलो तक बिकने वाला प्याज लखनऊ में 30 रुपए किलो तक पहुंच गया है। कुछ दिनों पहले यही प्याज मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन की वजह बना था। बंपर उत्पादन के बाद एमपी में प्याज दो रुपए किलो तक पहुंच गया था, हंगामे और प्रदर्शन के बाद शिवराज सरकार ने 8 रुपए किलो खरीदने का ऐलान किया। लेकिन अब यही प्याज आम लोगों के आंसू निकालने को तैयार है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमती नगर में शनिवार को प्याज 24-30 रुपए किलो बिका। कारोबारियों की मानें तो कीमतें और बढ़ सकती हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार अधिक उत्पादन होने के बावजूद इतनी तेजी से बढ़ती प्याज की कीमतों के पीछे दो कारण सामने आ रहे हैं, पहला तो ये कि इस बार भारत से काफी मात्रा में प्याज विदेशों को निर्यात किया जा रहा है और दूसरा कारण व्यापारियों द्वारा प्याज का भारी मात्रा में भंडारण करना है।

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देश में प्याज की सबसे बड़ी मंडी महाराष्ट्र के लासलगाँव में स्थित हैं। राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (NHRDF) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जुलाई के पहले सप्ताह में लासलगाँव की मंडी में प्याज 668 रुपए प्रति कुंतल था जबकि अगस्त के पहले सप्ताह में प्याज की कीमत बढ़कर 2400 रुपए प्रति कुंतल हो गई। वहीं दिल्ली की मंडी में जुलाई के पहले सप्ताह में प्याज की कीमत 1000 रुपए प्रति कुंतल थी जबकि अगस्त के पहले सप्ताह में इसकी कीमत बढ़कर 2625 रुपए प्रति कुंतल पर पहुंच गई और लखनऊ की मंडी में जुलाई के पहले सप्ताह में 875 रुपए प्रति कुंतल बिकने वाला प्याज अगस्त के पहले सप्ताह में 1500 रुपए प्रति कुंतल बिक रहा है।

मध्य प्रदेश के हरदा के रहने वाले किसान राम इनामिया प्याज की बढ़ी कीमतों पर बताते हैं, ''किसानों ने सरकार को 8 रुपए प्रति किलो के रेट से सारा प्याज बेच दिया। मध्य प्रदेश सरकार के पास प्याज के भंडारण के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी इसलिए सरकार ने दो रुपए किलो प्याज व्यापारियों को बेच दिया। व्यापारियों ने प्याज की जमाखोरी कर ली, जिस वजह से अब लगातार प्याज की कीमतें बढ़ रहीं हैं और व्यापारियों को फायदा हो रहा है। किसानों को कोई फायदा नहीं हो रहा है क्योंकि किसानों के पास प्याज ही नहीं है।''

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फोन से संपर्क करने पर खजराना गाँव इंदौर के किसान दिलिप मुकाती बताते हैं, ''मध्य प्रदेश में सरकारी प्याज की खरीद 11 जून से 20 जून तक की गई। सरकार ने आठ रुपए प्रति किलो किसानों से प्याज की खरीद की। लेकिन प्याज की सरकारी नीलामी में व्यापारियों ने एक जुट होकर सरकार से दो रुपए से सवा दो रुपए में 60 से 70 फीसदी प्याज खरीद कर भंडारण कर लिया। सिर्फ 25 प्रतिशत प्याज ही किसानों के पास है।'' दिलीप आगे बताते हैं, ''नासिक और इंदौर के बड़े व्यापारियों ने एक सरकार से दो रुपए से सवा दो रुपए में प्याज खरीद कर जमा कर लिया, ताकि धीरे-धीरे प्याज निकाल कर अधिक कीमत पर प्याज बेच सकें। इस वजह से प्याज के दाम बढ़ रहे हैं।''

NHRDF से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में इस बार सबसे अधिक मात्रा में प्याज का निर्यात किया गया है। वर्ष 2016 में जहां 142767.95 मीट्रिक टन प्याज निर्यात किया गया था, वहीं इस बार (वर्ष 2017 में) 320943.85 मीट्रिक टन प्याज निर्यात किया गया है। जबकि वर्ष 2013, 2014, 2015 में निर्यात किये गये प्याज की मात्रा पर नज़र डालें तो क्रमश: 203578.00 मीट्रिक टन, 127461.20 और 117377.22 मीट्रिक टन प्याज का निर्यात किया गया।

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नासिक स्थित नेशनल हॉर्टीकल्‍चरल रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन (एनएचआरडीएफ) के डायरेक्‍टर पीके गुप्‍ता बताते हैं, '' कम आपूर्ति की वजह से कीमतें बढ़ रही हैं। मौजूदा मांग को पुरानी रबी फसल के स्‍टॉक से पूरा किया जा रहा है, जिसका अब एक्सपोर्ट भी शुरू हो गया है। इसके अलावा मध्‍य प्रदेश से सीमित आवक हो रही है, क्‍योंकि राज्‍य सरकार वहां खरीद कर रही है।''

अगर हम प्याज के उत्पादन की बात करें तो पिछले वर्ष (2014-15) के मुकाबले इस वर्ष (2015-2016 में) प्याज का उत्पादन अधिक हुआ है। वर्ष 2014-15 में 18928.39 मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन हुआ था, जबकि वर्ष 2015-16 में 20931.25 मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन हुआ।

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