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लॉकडाउन में घोड़ा और गधा पालकों के लिए मददगार बने संचार माध्यम

घोड़े, गधे और खच्चरों के हित के लिए काम करने वाली संस्था ब्रुक इंडिया लॉकडाउन में एसएमएस और कॉल के माध्यम से लोगों से जुड़ा रहा और उनकी मदद भी की।

लॉकडाउन में घोड़ा और गधा पालकों के लिए मददगार बने संचार माध्यम

लॉकडाउन से पहले गधा और घोड़ा पालक हर दिन कमाते जिससे उनका घर चलता और उनके गधे-घोड़ों के लिए भी चारे का इंतजाम हो जाता, लेकिन लॉकडाउन के चलते अश्व समुदायों को काफी आर्थिक नुकसान सहना पड़ा। ऐसे कठिन समय में ब्रुक इंडिया ने अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए अश्व पालकों की मदद करने के लिए तुरंत उपयोगी कदम उठाए।

लॉकडाउन में संचार के माध्यम इनके लिए काम के साबित हुए, देश के अलग-अलग राज्यों में एसएमएस और वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें जागरूक भी किया गया।

ब्रुक इंडिया में लखनऊ जिले की कम्युनिटी मैनेजर सुषमा बताती हैं, "कोरोना महामारी ने हमारे काम करने के तरीके को चुनौती दी है, जिसने हमे नए तरीके प्रयोग करने का मौका दिया है कि कैसे हम बिना रुके और लॉकडाउन नियमो का पालन करते हुए अश्वों और उनके अश्व मालिकों को सहायता कर सकें।"

राजस्थान में वीडियो कॉल के माध्यम से जानकारी देते विशेषज्ञ

ईंट भट्ठों का अचानक बंद होना, काम का नुकसान,अति-व्यस्त प्रशासन,पुलिस की सख्त तैनाती, सार्वजनिक परिवहन के बंद होने पर अश्व पालक समाज काफी तनाव में आए गए। इसलिए ब्रुक इंडिया ने अश्व पालक समुदायों की सहायता और मनोवैज्ञानिक सलाह प्रदान करने की रणनीति बनाई। लॉकडाउन के चलते गाँव जाने पर रोक थी इसलिए ब्रुक इंडिया की टीम ने संचार तकनीककी सहायता ली।

ब्रुक इंडिया ने देश के अलग-अलग हिस्सों में हर दिन लगभग 1000 से अधिक टेलीफ़ोन कॉल के माध्यम से अश्व मालिकों तक अपनी बात पहुंचाई और वर्तमान परिस्थितियो से निपटने के लिए सलाह और परामर्श प्रदान किया।

विशेषज्ञों ने लॉकडाउन के दौरान अपने जानवरों की देखभाल कैसे करें और कोरोना महामारी के बारे में मिथकों को दूर किया। इसके ईंट भट्टों मालिकों से संपर्क करके अश्व मालिकों को राशन व उनके पशुओं के लिए हरा चारे का प्रावधान करवाया।

ये हैं गाँधी प्रेरणा महिला घोड़ा कल्याण समिति के CRP जगराज, इन्होने लॉकडाउन में जिस पशु को कोई भी प्रॉब्लम आई उसका इलाज वा समस्या का समाधान किया

महाराष्ट्र के बीड जिले के अंबाजोगाई में कई सारे ईंट भट्ठे हैं, जहां पर हजारों श्रमिक काम करते हैं। अमर जाधव भी अंबाजोगाई ईंट भट्ठे पर काम करते हैं, अब उनके सामने गधे के लिए चारे की समस्या हो गई। कई बार बाजार गए लेकिन उन्हें चारा नहीं मिला। तब उन्होंने फोन के माध्यम से ब्रुक इंडिया की फील्ड असिस्टेंट मनीषा से बात की।

तब मनीषा कई सारे चारा विक्रेताओं से संपर्क किया और ईंट भट्ठा मालिक से ट्रैक्टर लेकर फीड लेकर आए। मनीषा बताती हैं, "जब मैं ईंट भट्ठे गई तो पता चला कि इनके पास तो बिल्कुल भी चारा नहीं है, लेकिन किसी तरह इन लोगों की मदद कर पायी, जिससे गधों को चारा मिल पाया।

महाराष्ट्र के बीड जिले के अंबाजोगाई में ईंट भट्ठे पर काम करने वाले गधा मालिकों को उपलब्ध कराया गया चारा

इसके साथ ही ब्रूक इंडिया ने वीडियो कॉल के माध्यम से हमारी महिला अश्व कल्याण समूहों से जुड़े और उन्हें कपड़े के फेसमास्क बनाने की बुनियादी बारीकियों का प्रशिक्षण दिया। फेसमास्क के लिए कपड़े को स्थानीय रूप से खरीदा गया, उत्पादन के बाद साफ किया गया और फिर बेचा गया। 19 महिला अश्व पालक समूह ने ब्रुक इंडिया के परिचालन क्षेत्र में गरीब ओर जरूरतमंद समुदाय, खासकर ईंट भट्टों में काम करने वालों के लिए के लिए कपड़े से बने फ़ेस मास्क को बनाने का कार्य किया।

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में समूह से जुड़ी शालिनी बताती हैं, "हमारी पूरी कोशिश है कि समूह से जुड़े हर किसी को कोरोना के संक्रमण से बचाया जाए। इसलिए हमने प्रशिक्षण लेकर खुद से मास्क बनाकर समूह से जुड़े परिवारों को बांट दिए हैं।"

लॉकडाउन में ब्रुक इंडिया की सहायता मिलने से अश्व मालिक काफी खुश हैं और ऐसे समय में नए आजीविका मिलने से वह अपने परिवार और पशु की देख भाल कर पा रहे हैं। इसके अलावा ब्रुक इंडिया फील्ड टीम ने पशु चिकित्सा सहायता भी प्रदान कारवाई और समय समय पर एसएमएस के माध्यम से सही जानकारी भी भेज रहे हैं।

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