एमएसपी पर अनाज खरीद के लिए केंद्र हर तरह से मदद करेगी : राधा मोहन सिंह

एमएसपी पर अनाज खरीद के लिए केंद्र हर तरह से मदद करेगी : राधा मोहन सिंहकृषि मंत्री राधा मोहन सिंह

नयी दिल्ली (भाषा)। कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि खेती की लागत पर लाभ का मार्जिन 50 प्रतिशत सुनश्चिति करने के उद्देश्य से नीति आयोग, केंद्र एवं राज्य सरकार मिलकर विभिन्न विकल्पों एवं राज्यों में प्रचलित योजनाओं का अध्ययन और उपयुक्त खरीद तंत्र की सिफारिश करेंगे। वर्ष 2018-19 के केंद्रीय बजट में प्रस्ताव किया गया है कि आगामी खरीफ से विभन्नि कृषि जिन्सों पर उसकी लागत के डेढ़ गुणा के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा होगी।

यह पूछे जाने पर कि जब देश के अनेक राज्यों में सुदृढ़ खरीद तंत्र की कमी है, ऐसे में अनाज की खरीद एवं एमएसपी संबंधी बजटीय घोषणाओं को किस प्रकार से लागू किया जा सकेगा, कृषि मंत्री ने कहा कि एमएसपी पर अनाज की खरीद के लिये केंद्र हर तरह से मदद करेगी। यह केंद्र और राज्य की संयुक्त जिम्मेदारी है। सिंह ने कहा, “हम यह सुनश्चिति करेंगे कि अगर किसी फसल की कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे चली जाती है तब भी किसान को कीमतों में नुकसान का भुगतान प्राप्त हो सके।”

उन्होंने कहा, “नीति आयोग इस विषय पर केंद्र एवं राज्य सरकार के साथ मिलकर विभिन्न विकल्पों एवं कुछ राज्यों में प्रचलित योजनाओं का अध्ययन करेगा और एक ढांचागत तंत्र की सिफारिश करेगा ताकि किसानों को उनके उत्पाद पर पर्याप्त कीमत प्राप्त हो सके।”

ये भी पढ़ें- प्रधानमंत्री ने कहा, देश के ख़जाने पर पहला हक किसानों का : राधा मोहन सिंह

खुले बाजार में भी किसानों को उचित मूल्य मिल सके

कृषि मंत्री ने कहा कि वह राज्यों से आग्रह करना चाहते हैं कि कृषि बाजार सुधार की दिशा में संयुक्त रूप से आगे बढ़ा जाए ताकि खुले बाजार में भी किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके। उन्होंने जोर दिया कि उनकी सरकार मानती है कि किसानों को उनकी उपज के लिये लाभकारी मूल्य प्रदान करना कृषि क्षेत्र के समक्ष प्रमुख चुनौती है। मध्यप्रदेश एवं राजस्थान सहित कुछ राज्यों में समान स्थिति है।

ये भी पढ़ें- बजट में फसलों की लागत का डेढ़ गुना एमएसपी देने के वायदे को सुन चौंके कृषि विशेषज्ञ

साल 2018 के बजट में किसानों को लाभकारी मूल्य पर सबसे अधिक ध्यान दिया गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि अब कृषि विपणन क्षेत्र का वस्तिार किया जायेगा और इस उद्देश्य से ग्रामीण मंडियों को जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के तहत सभी 22000 हाट को संगठित खुदरा कृषि मंडियों में विकसित किया जायेगा जहां किसानों को छोटे छोटे स्थान उपलब्ध कराये जायेंगे। इससे किसानों में बेहतर सौदेबाजी की क्षमता से मंडी में लेनदेन के लिये उन्हें संगठित किया जा सकेगा ।

किसान प्रत्यक्ष खरीद बक्रिी के लिये भी इन हाटों का उपयोग कर सकते हैं। राधामोहन सिंह ने कहा कि आलू, प्याज, टमाटर जैसे उत्पाद एवं उनकी कीमतें कई बार चर्चा का विषय बन जाती है। इस बजट में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आलू, प्याज एवं टमाटर के लिये एक विशेष पैकेज की घोषणा की गई है।

ये भी पढ़ें-बजट-2018 की घोषणाओं और योजनाओं का किसानों ने किया स्वागत लेकिन अब ज़मीन पर उतरने का है इंतज़ार

Share it
Top