प्रसन्ना हेग्गोडु को मिला कर्नाटक के सीएम का साथ, लाखों ग्रामीणों का हो सकता है भला

प्रसन्ना हेग्गोडु  को मिला कर्नाटक के सीएम का साथ, लाखों ग्रामीणों का हो सकता है भलाहस्तनिर्मित उत्पादों पर जीएसटी के खिलाफ सत्याग्रह और भूख हड़ताल के दौरान प्रसन्ना हेग्गोडु

लखनऊ। हाथ से बने उत्पादों से जीएसटी हटाने की मांग पर सत्याग्रह करने वाले कर्नाटक के प्रसिद्ध रंगकर्मी प्रसन्ना की मुहिम रंग लाती नजर आ रही है। कर्नाटक के सीएम सिद्दरमैया ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से वस्तु एवं सेवा कर यानि (जीएसटी) के दायरे से हस्तनिर्मित उत्पादों को छूट देने का आग्रह किया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को लिखे एक पत्र में कर्नाटक के सीएम सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘मैं एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने के लिए पत्र लिख रहा हूं। जीएसटी परिषद को इसका संज्ञान लेना चाहिए और प्राथमिकता के आधार पर इस पर फैसला करना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि ग्राम सेवा संघ द्वारा गठित नामी एक्टिविस्ट आशीष नंदी, उजराम्मा और श्याम बेनेगल वाली एक कमेटी से निवेदन मिला है कि उत्पाद सहकारी सोसाइटी और उनके फेडरेशन द्वारा उत्पादित और विपणन की जाने वाली विभिन्न हस्तनिर्मित वस्तुओं से जीएसटी खत्म की जाए।

सिद्धरमैया ने कहा कि नामी रंगमंच कार्यकर्ता प्रसन्ना ने बेंगलूरू में पिछले कुछ दिनों में कई हस्तनिर्मित उत्पादों पर जीएसटी के खिलाफ सत्याग्रह और भूख हड़ताल की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे उत्पादों पर जीएसटी लगाने से इस तरह के सामान के निर्माण में जुटे कलाकारों की रोजी-रोटी पर बुरा असर पड़ा है।

जेटली को भेजे गए पत्र में निवेदन को भी जोड़ा गया है। निवेदन का हवाला देते हुए सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘ज्ञापन में गंभीर और त्वरित विचार और सकारात्मक समाधान की मांग है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इससे केवल ग्रामीण आबादी के एक बड़े हिस्से को ही फायदा नहीं होगा बल्कि ग्रामीण रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।’’

यह यह तस्वीर भारतीय रंगकर्म के शिखरस्थ व्यक्तित्व प्रसन्ना हेग्गोडु की है।

कर्नाटक के रहने वाले हैं रंगकर्मी प्रसन्ना हेग्गोडु

यह तस्वीर भारतीय रंगकर्म के शिखरस्थ व्यक्तित्व प्रसन्ना हेग्गोडु की है। प्रसन्ना सहजता, सरलता, मृदुता, सौम्यता, दृढ़ता, जीवट, जनपक्षधरता और प्रतिबद्धता जीवंत आदर्श है। उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षण लेने के बाद भी यह जीवन खुद चुना है। प्रकृति, जीवन और भारतीय ग्राम्य-समाज से एकमेक होने में उन्हें बेहद आनंद आता है।

रंगकर्मी राजेश चंद्रा के मुताबिक उन्होंने सत्ता-संस्थानों की कभी परिक्रमा नहीं की। अनुदान, महोत्सव और पुरस्कारों के व्यापार को सदा दूर से नमस्कार किया। वे रंगमंच को उस गाँव-समाज के अन्दर लेकर गये, जहां उसकी वास्तव में ज़रूरत थी। उसे ग्रामीण जीवन का, ग्रामोद्योग का और सामाजिक रूपान्तरण की प्रक्रिया का अविभाज्य अंग बना दिया। आज कर्नाटक में प्रसन्ना को एक संत और महामानव जैसा सम्मान इसलिये प्राप्त है कि उन्होंने स्वयं को जनजीवन की समुन्नति के न्योछावर कर दिया है। हम उनके इस जीवन से प्रेरणा और शक्ति ग्रहण कर सकते हैं। प्रसन्ना बेंगलुरू में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। वे खादी ग्रामोद्योग तथा हस्तशिल्प पर जीएसटी की मार का विरोध कर रहे थें, क्योंकि इससे ग्रामीण गरीब लोगों का जीवन संकट में पड़ गया है।

एक सत्याग्रह ऐसा भी..

  • हस्तशिल्प पर जीएसटी के खिलाफ प्रसन्ना का सत्याग्रह
  • हैंडमेड प्रोडक्ट पर जीरो फीसदी टैक्स की मांग
  • ग्रामीण हस्तशिल्प को टैक्स से मचाने के लिए मुहिम
  • कर्नाटक के सीएम की अपील पर प्रसन्ना ने तोड़ा अनशन
  • कर्नाटक ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने वित्त मंत्री जेटली को लिखा खत
  • केंद्र सरकार से जीएसटी के दायरे से हस्तनिर्मित उत्पादों को छूट देने का आग्रह
  • सिद्दरमैया ने कहा- ‘छूट देने से ग्रामीण उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा’
  • ‘जीएसटी से हैंडमेड उत्पादों से जुड़े कारीगरों की रोजी-रोटी पर असर’
  • अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं प्रसन्ना
  • सामाजिक सरोकारों के लिए कर्नाटक में संत की तरह पूजे जाते हैं प्रसन्ना

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