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पशुपालकों की बढ़ी मुश्किलें, बकरीद में भी नहीं मिल रहे बकरों के खरीददार

एशिया की सबसे बड़ी बकरा मंडी देवनार में देश भर से व्यापारी बकरे लेकर आते हैं, लेकिन इस बार उन्हें महाराष्ट्र में जाने की परमिशन ही नहीं मिल रही है। ऐसा ही हाल दूसरे प्रदेशों में भी है, बकरे बिक नहीं रहे हैं।

Divendra SinghDivendra Singh   30 July 2020 11:30 AM GMT

पशुपालकों की बढ़ी मुश्किलें, बकरीद में भी नहीं मिल रहे बकरों के खरीददार

पिछले कई महीनों से नुकसान झेल रहे बकरी पालकों को उम्मीद थी कि बकरीद में नुकसान की भरपाई हो जाएगी, लेकिन इस बार बकरीद में भी इन्हें मुनाफे की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।

महाराष्ट्र की देवनार बकरा मंडी भारत ही नहीं एशिया की सबसे बड़ी बकरा मंडी है, जहां पर हर दिन राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों से हजारों की संख्या में बकरे आते हैं। बकरीद में तो इनकी संख्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है। महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन लगने से मंडी भी बंद कर दी गई थी, लेकिन फिर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बकरा बेचने की इजाजत भी मिल गई थी, लेकिन बकरीद के नजदीक आते ही सरकार ने एक बार फिर से खुले में बकर बेचने पर पाबंदी लगा दी।

ऐसे में अलग-अलग राज्यों से मुंबई की बकरा मंडी जा रहे हजारों की संख्या में ट्रक महाराष्ट्र के बॉर्डर पर अभी खड़े हुए हैं। उत्तर प्रदेश के कन्नौज के प्रदीप भी उन्हीं में से एक हैं, जो इस समय महाराष्ट्र की सरहद पर बकरों से लदा ट्रक लिए इंतजार कर रहे हैं कि शायद परमिशन मिल जाए।

महाराष्ट्र के बॉर्डर पर खड़े हैं ट्रक

प्रदीप बताते हैं, "हम साल भर इसी उम्मीद में बकरों को पालते हैं कि बकरीद में अच्छे दाम पर बकरे बिक जाएंगे, हमारे यहां लोकल में बकरों का उतना अच्छा दाम नहीं मिलता, जितना यहां मंडी में एक साथ बकरों का दाम मिल जाता है, लेकिन अभी कोई उम्मीद नहीं है। इतनी दूर खर्च करके बकरों को लेकर आए हैं, अगर एंट्री नहीं मिली तो बहुत नुकसान हो जाएगा।"

ऐसी सिर्फ मुंबई के देवनार बकरा मंडी की स्थिति नहीं है, देश भर में पशुपालक बकरा बाजार न लगने से परेशान हैं, दूसरे राज्यों में सप्लाई होने से बकरों की कीमतों में तीस फीसदी तक की कमी आ गई है। केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी) के आंकड़ों के अनुसार साल में देश में लगभग 942.93 हजार टन बकरे के मांस का उत्पादन होता है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग नस्ल की बकरियों का पालन होता है। इनमें सिरोही, बीटल, मारवाड़ी, बरबरी, झलवड़ी जैसी प्रमुख नस्लें हैं। इनमें से कुछ का पालन दूध और मीट और कुछ का मीट के लिए ही किया जाता है।


महाराष्ट्र सरकार ने ऑनलाइन बकरा बेचने की अनुमति दी थी, जिसमें बड़े बकरा फार्म के मालिक व्हाट्सएप, फेसबुक और दूसरे जरिए से बकरा बेच रहे हैं, बॉर्डर पर खड़े बहुत से लोग ऐसे भी हैं।

ऑल महाराष्ट्र खटीक एसोसिएशन एंड पब्लिक ट्रस्ट के अध्यक्ष अकील ताडे बताते हैं, "इस समय बहुत मुश्किल समय चल रहा है, सरकार ने पहले ऑनलाइन बकरा बेचने की परमिशन दे दी थी, लेकिन पिछले चार दिनों महाराष्ट्र में बकरों के आने ही नहीं दे रही है। बॉर्डर पर हजारों बकरे ट्रकों से आए हैं। मुंबई की देवनार मंडी देश ही नहीं एशिया की सबसे बड़ी बकरा मंडी है, जितने बकरे की खपत यहां पर है, उतने बकरे यहां तो होते नहीं, इसलिए राजस्थान, यूपी जैसे कई जगह से लोग यहां आते हैं, अभी भी लोग खड़े हुए हैं, लेकिन पुलिस आने ही नहीं दे रही है।"

बकरी पालन एक ऐसा व्यवसाय जिससे छोटे किसानों से लेकर बड़े किसान जुड़े हुए हैं। देश में 3.301 करोड़ लोग बकरी पालन से जुड़े हुए हैं।

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में दुबग्गा में आलम गोट फार्म चलाने वाले मोहम्मद इजहार के फार्म में इस समय सौ ज्यादा बकरे हैं, हर बार बिहार और कलकत्ता तक से व्यापारी बकरे खरीदने आते थे, लेकिन इस बार मुश्किल से 19 बकरे बिक पाए हैं। मोहम्मद इज़हार बताते हैं, "लॉकडाउन की शुरूआत में ही परेशानी बढ़ गई थी, चारे का दाम बढ़ गया था, चारे का दाम बढ़ने से जिस बकरे पर 15 रुपए खर्च होते थे, वो तीस रुपए हो गए थे। उम्मीद थी की बकरीद में सब कवर हो जाएगा। लेकिन अभी तक 19 बकरे बिक पाए हैं, अभी भी नौ-दस लाख कीमत के बकरे हैं। लेकिन अब कोई उम्मीद नहीं बची है कि बिकेंगे भी नहीं।

20वीं पशु गणना के अनुसार देश में बकरियों की संख्या 148.9 मिलियन है। देश में कुल मांस उत्पादन में बकरे की मीट की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत है।



नासिक के नांदगाँव के रहने वाले अल फ़ैज़ भी 90 बकरों से भरा ट्रक लिए, बॉर्डर पर खड़े हैं। वो कल्याण की मंडी में बकरे ले जा रहे थे कि मुंबई से पहले ही उन्हें रोक दिया गया है। वो बताते हैं, "सड़क पर हम लोग परेशान खड़े हैं, लोग अपनी बकरों को आस पास चरा भी रहे हैं, नहीं तो भूख प्यास से बकरे मर भी जाएंगे।"

भारत बकरे के मांस का दुनिया में सबसे बड़ा निर्यातक देश है। एपीडा के आंकड़ों के अनुसार भारत ने साल 2018-19 में 18,425 मिट्रिक टन मांस का निर्यात किया था, जिसकी कुल की कीमत 790.65 करोड़ रुपए थे। भारत यूएई, सउदी अरब, कतर, कुवैत और ओमान जैसे देशों को मांस निर्यात करता है।

देश में बकरी पालन में नंबर एक पर राजस्थान, दूसरे पर पश्चिम बंगाल और तीसरे पर उत्तर प्रदेश का नंबर आता है।


राजस्थान के अजमेर के बकरी पालक जवालुद्दीन खान के पास भी इस समय पचास से ज्यादा बकरे और बकरियां हैं, जिनमें बकरों की संख्या ज्यादा है। वो बताते हैं, "हमारे यहां अजमेर में महीने में दो बार बकरा मंडी लगती है, जहां पर दूर-दूर से खरीददार आते हैं, बकरीद में तो यहां पर तो और लोग आते हैं, लेकिन इस बार सन्नाटा है, बकरे ही नहीं बिक रहे हैं। इनके चारे में इतना खर्च हो जाता है, जब बड़े बकरे बिक जाते हैं तो फिर से छोटे बच्चे लाकर उन्हें तैयार करते हैं, लेकिन इस बार बड़े बकरे ही नहीं बिक रहे हैं।

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