ई-पशुहाट पोर्टल पर मिलेगी घर बैठे फ्रोजन सीमन व भ्रूणों की जानकारी, कर सकते हैं खरीददारी

किफायती दरों पर घर बैठे दुधारू पशु, फ्रोजन सीमन और भ्रूणों की खरीदी-बिक्री करने के लिए ई-पशुहाट पोर्टल शुरू हुआ ।

ई-पशुहाट पोर्टल पर मिलेगी घर बैठे फ्रोजन सीमन व भ्रूणों की जानकारी, कर सकते हैं खरीददारी

नई दिल्ली। किफायती दरों पर घर बैठे दुधारू पशु, फ्रोजन सीमन और भ्रूणों की खरीदी-बिक्री करने के लिए ई-पशुहाट पोर्टल शुरू हुआ । इस पोर्टल पर 80059 पशुओं, 7.63 करोड़ वीर्य डोजेस और 371 भ्रुणों की सूचना उपलब्ध है। इसके साथ ही पोर्टल पर अब तक 5.57 करोड़ वीर्य डोजेस की बिक्री हुई है। विश्व दुग्ध दिवस पर केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन ने कहा।

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में राधा मोहन सिंह ने बताया, "पिछले चार वर्षों के दौरान देशी नस्लों के विकास और संरक्षण के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत सरकार ने 20 गोकुल ग्रामों की स्थापना की स्वीकृति दी जिसमे से 3 पर कार्य पूर्ण और 17 गोकुल ग्राम स्थापित करने पर कार्य चल रहा है।" दो नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग केंद्र एक दक्षिण भारत के चिंतलदेवी आंध्र प्रदेश में तथा एक उत्तर भारत के इटारसी मध्य प्रदेश में स्थापित किए जा रहे है। आंध्र प्रदेश में केंद्र स्थापना का कार्य पूर्ण हो गया है तथा मध्य प्रदेश में कार्य जारी है।

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उन्होंने आगे कहा, "9 करोड़ दुधारु पशुओं की यूआईडी द्वारा पशुओं की पहचान की जा रही है जिसके लिए केंद्र सरकार द्वारा राशि जारी की जा चुकी है। इन सभी पशुओं को नकुल स्वास्थ्य पत्र देने का प्रावधान भी योजना अंतर्गत किया गया है। अब तक 1 करोड़ पशुओं की पहचान की जा चुकी है।" मंत्री ने बताया, "उन्नत प्रजनन तकनीक के अंतर्गत 20 भ्रूण प्रोद्योगिक केंद्रों की स्थापना की जा रही है। अब तक 18 केंद्रों के प्रस्ताव को स्वीकृत किया चुका है। लिंग सोरटेड वीर्य उत्पादन हेतु 10 वीर्य केंद्रों को चिन्हित किया जा चुका है। दो केन्द्रों के प्रस्तावों को स्वीकृत किया गया हैं l इससे बछियों के उत्पादन से दुग्ध उत्पादन में तेजी आएगी।"



डेयरी उध्यमिता विकास योजना के तहत दुग्ध उत्पादन से लेकर उसके विपणन तक की अनेक गतिविधियों में उध्यमियों हेतु स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए वित्तिय सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 3,30,125 डेयरी युनिट स्थापित की गई है जिनके लिए रुपए 1338.31 करोड़ की सब्सिडी भारत सरकार द्वारा प्रदान की चुकी है इससे 6.6 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं ल

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इसी वर्ष केंद्र सरकार द्वारा एक नई योजना डेयरी प्रसंस्करण एवं अवसंरचना विकास कोष (डीआईडीएफ) योजना शुरू की जा रही है। इस योजना से 50 हजार गांवों में 95 लाख दूध उत्पादकों के लाभांवित होने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही अनेक कुशल, अर्धकुशल एवं अकुशल कर्मियों को परोक्ष या अपरोक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होगा। इस योजना के तहत 126 लाख लीटर प्रतिदिन की अतिरिक्त दुग्ध प्रसंस्करण, 210 टन प्रतिदिन की दुग्ध पावडर, 28000 ग्रामीण स्तर पर बल्क मिल्क कूलर के स्थापना से 140 लाख लीटर प्रतिदिन की दुग्ध अवशीतन क्षमता का सृजन किया जाएगा।

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इसके साथ साथ इलेक्ट्रानिक दुग्ध मिलावट परिक्षण उपकरण एवं 60 लाख लीटर प्रतिदिन दूध को मूल्य वर्धित दुग्ध पदार्थों में परिवर्तित करने की क्षमता का भी प्रावधान रखा गया है। यह योजना रुपए 10,881 करोड़ लागत की है जिसके अंतर्गत दुग्ध सहकारी संस्थाओं को रुपए 8004 करोड़ की वित्तीय सहायता ऋण के रूप मे 6.5% वार्षिक ब्याज दर पर प्रदान की जाएगी जिसकी भरपाई 10 वर्ष की अवधि मे करनी होगी।


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