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आर्थिक मोर्चे पर चीन से पिछड़ा भारत, कांग्रेस नेता ने सरकार को घेरा

आर्थिक मोर्चे पर चीन से पिछड़ा भारत, कांग्रेस नेता ने सरकार को घेरा

लखनऊ। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने जीडीपी और रोजगार से जुड़े तमाम आंकड़े शुक्रवार शाम को जारी कर दिए। भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर पिछले पांच साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। इस दौरान भारत अर्थिक मोर्च पर चीन से पिछड़ गया है। वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़कर 5 साल के न्यूनतम स्तर 5.8 प्रतिशत पर पहुंच गई। इससे पहले वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रही थी। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में देश की जीडीपी संवृद्धि दर 6.8 फीसदी रही।

इसे लेकर कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट करते हुए कहा कि जीडीपी 5 वर्षों में सबसे निचले पायदान पर है, और बेरोजगारी 6.1% पर 45 सालों में सबसे ज़्यादा। ये देश के सामने बड़ी चुनोतीयां हैं। उम्मीद है कि पीएम व एफएम आर्थिक मंदी से निपटने तथा रोजगार पैदा करने की प्लान देश के समक्ष जल्द से जल्द रखेंगे।

सुरजेवाला ने एक और ट्वीट करते हुए बिना सब्सिडी वाली रसोई गैस के दाम बढ़ाने पर सरकार को निशाने पर लिया है।

आंकड़ों के अनुसार जीडीपी विकास दर की रफ्तार को कम करने में कृषि, खनन और औद्योगिक उत्पादन में कमजोर प्रदर्शन की अहम भूमिका रही। जीडीपी ग्रोथ रेट में गिरावट की अहम वजह प्रमुख क्षेत्रों का खराब प्रदर्शन करना रहा है। कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन क्षेत्र में ग्रोथ रेट 5.0 फीसदी से गिरकर 2.9 फीसदी, खनन उद्योग 5.1 फीसदी से गिरकर 1.3 फीसदी, बिजली, गैस, पान सहित क्षेत्र 8.6 फीसदी से गिरकर 7.0 फीसदी, होटल, ट्रांसपोर्ट, संचार आदि क्षेत्र 7.8 फीसदी से गिरकर 6.5 फीसदी पर आ गया है। हालांकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 5.9 फीसदी से बढ़कर 6.9 फीसदी हो गया है, जो थोड़ी राहत की खबर है।

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केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने साथ ही कहा है कि वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर 6.8 प्रतिशत रही है। जीडीपी वृद्धि की यह दर 2014-15 के बाद सबसे धीमी है। इससे पहले वित्त वर्ष 2013-14 में जीडीपी वृद्धि की गति 6.4 फीसदी रही थी।

चौथी तिमाही के आंकड़े आने के बाद अब भारतीय अर्थव्यवस्था चीन से भी पिछड़ गई है। चीन की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.4 फीसदी थी जबकि भारत की ग्रोथ रेट 5.8 फीसदी पर आ गई है। इस आकड़ें के बाद भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था वाला देश नहीं रह जाएगा।

आर्थिक मामलों के सचिव एस. सी. गर्ग ने कहा कि 2018-19 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि में सुस्ती एनबीएफसी क्षेत्र में दबाव जैसे अस्थायी कारकों की वजह से आई है। उन्‍होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी वृद्धि दर धीमी रह सकती है और अर्थव्यवस्था में दूसरी तिमाही के बाद से गतिविधियों में तेजी आएगी। (इनपुट भाषा)

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