राजपथ पर इन झांकियों में दिखी भारत की सतरंगी झलक

राजपथ पर इन झांकियों में दिखी भारत की सतरंगी झलकआसियान के 10 देशों के नेताओं और शासनाध्यक्षों ने मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया।

नई दिल्ली (भाषा)। देश के 69वें गणतंत्र दिवस पर आसियान देशों के साथ भारत की 25 साल की साझेदारी का जश्न मनाते हुए विभिन्न राज्यों की संस्कृति, लोक कलाओं और प्रकृति के विहंगम दृश्यों के साथ-साथ महिला शक्ति की झांकियां दिखाई गईं।

गुजरात की झांकी पूरी तरह महात्मा गांधी के रंग में रंगी दिखाई दिखी।

गणतंत्र दिवस समारोह में आसियान देशों के दस राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी के चलते झांकियों में भी आसियान देशों के साथ भारत के रिश्तों की बानगी देखने को मिली। विदेश मंत्रालय की झांकी आसियान, शिक्षा और व्यापार पर केंद्रित रही। इसमें आगे की ओर महाबोधि मंदिर और बौद्ध वृक्ष दिखाया गया। साथ ही प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की झलक और रामायण का रूपांतरण भी प्रदर्शित किया गया।

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कर्नाटक की झांकी वन्य जीवन और वन संपदा पर आधारित रही।

कर्नाटक की झांकी वन्य जीवन और वन संपदा पर आधारित रही। बेंत और बांस के सामान के लिए मशहूर त्रिपुरा की झांकी में हस्तशल्पि और लोककलाओं का प्रदर्शन किया गया। देश के पहाड़ी राज्य उत्तराखंड की झांकी में जहां ग्रामीण जीवन, लोककला और संस्कृति का प्रदर्शन किया गया तो दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश की झांकी में एक साल पुराने 'कये गोम्पा' बौद्ध मठ का प्रदर्शन किया गया।

राजपथ पर जैसे ही झांकियां निकलनी शुरू हुईं तो बच्चे जोश और उत्साह से भर गए।

राजपथ पर जैसे ही झांकियां निकलनी शुरू हुईं तो बच्चे जोश और उत्साह से भर गए और अपनी सीटों से खड़े होकर देश की संस्कृति को निहारने लगे। सीमा सुरक्षाबल के ऊंट सवार मार्चिंग दस्ते के बाद समुद्र में दुश्मन पर नजर रखने वाले भारतीय तटरक्षक बल के दस्ते ने अपने शौर्य का प्रदर्शन किया।

परेड में भारतीय वायु सेना ने भी निकाली झांकी।

जम्मू कश्मीर की झांकी कानीहामा इलाके की पश्मीना बुनाई, पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य तो मूंगे की चट्टानों के लिए मशहूर लक्षद्वीप की झांकी मछली पालन तथा लोककलाओं पर केंद्रित रही। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की झांकी में मोइरंग समाज की शौर्य गाथा प्रदर्शित की गई जबकि असम की झांकी में 15वीं सदी की मुखौटा कला के साथ 'सीता हरण-बाली वध' की कहानी दर्शाई गई।

परेड में टी-90 भीष्म टैंक, स्वदेशी रडार स्वाथी शामिल थे।

इस बार गुजरात की झांकी पूरी तरह महात्मा गांधी के रंग में रंगी दिखाई दिखी। इसमें साबरमती आश्रम के 100 वर्ष, बुराई के खिलाफ संदेश देते महात्मा गांधी के तीन बंदर और गांधी निवास 'हृदय कुंज' का प्रदर्शन किया गया।

सीमा सुरक्षाबल के ऊंट सवार मार्चिंग दस्ते ने शानदार प्रदर्शन किया।

छत्तीसगढ़ की झांकी में तीन सौ ई.पू. साल पुरानी रामगढ़ रंगशाला प्रदर्शित की गई जबकि केरल की झांकी में पारंपरिक उत्सव केट्टुकानया, प्राचीन वस्तुशल्पि और मार्शल आर्ट की झलक दिखाई दी। पंजाब की झांकी में 'संगत और पंगत' का प्रदर्शन किया गया। इसमें धर्म-जाति से परे श्रद्धा से लंगर कराते हुए दिखाया गया।

महाराष्ट्र की झांकी में शिवाजी महाराज की वीर गाथा को दर्शाया गया

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परेड में आकाश मिसाइल प्रणाली और अश्वनी रडार की झलक भी देखने को मिली।

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की झांकी में बर्फीली चोटियों पर सीमा प्रहरियों को तिरंगा लहराते दिखाए जाने के साथ जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 'उचित दाम हक से मांग', खेलो इंडिया' थीम के साथ प्रदर्शन किया गया। इसके बाद उमंग और उल्लास के साथ 155 छात्राओं ने फूलों की झांकी प्रस्तुत की। दिल्ली के सर्वोदय कन्या विद्यालय की छात्राओं ने 'भारत के रंग' गीत पर पांच राज्यों का लोकनृत्य पेश किया। रोहिणी के माउंट आबू पब्लिक स्कूल के 150 छात्र-छात्राओं ने दस देशों की वेशभूषा और संस्कृति की झलक के साथ भारत-आसियान की 25 साल की साझेदारी का जश्न मनाया।

परेड में पहली बार निर्भय , ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल एक साथ दिखाए गए।

दक्षिण मध्य संस्कृति केंद्र, नागपुर के 160 बच्चों ने विशेष आकर्षक पोशाक पहने बरेदी चरवाहा कला का प्रदर्शन किया, उत्तर पूर्व सांस्कृतिक केंद्र दीमापुर ने मोगा समुदाय के संगराई लोकनृत्य, ऑक्सफोर्ड फाउंडेशन स्कूल, नजफगढ़ के 155 छात्र-छात्राओं ने 'शिक्षित भारत, सशक्त भारत' थीम के साथ अनूठी प्रस्तुति दी।

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