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हाथरस मामला: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी सरकार को लगाई फटकार, अगली सुनवाई 2 नवंबर को हुई तय

हाथरस मामला: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी सरकार को लगाई फटकार, अगली सुनवाई 2 नवंबर को हुई तय

हाथरस गैंगरेप मामले में पीड़िता का मनमाने तरीके से, परिवार की मर्जी के बिना रातोरात अंतिम संस्कार कराने के मुद्दे पर सोमवार को 2.30 बजे हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में दो जजों की पीठ में सुनवाई हुई। अदालत में डीजीपी, अपर मुख्य सचिव समेत तमाम अफसर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाथरस कांड के मुद्दे पर यूपी सरकार को फटकार लगाई और पीड़िता का अंतिम संस्कार बिना सहमति करने पर नाराजगी जाहिर की। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 नवंबर की तारीख तय की गयी है, जिसमें परिवार के सदस्य और पीड़ित परिवार फिर पेश होंगे।

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में 'गरिमापूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार के अधिकार' टाइटिल के तहत न्यायमूर्ति पंकज मित्तल व न्यायमूर्ति राजन रॉय की खंडपीठ के समक्ष 12 अक्टूबर को कोर्ट में सुनवाई थी। इस सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की तरफ से अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी, डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार, हाथरस के डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार मौजूद थे।

निर्भया का केस लड़ चुकीं वकील सीमा समृद्धि कुशवाहा अब हाथरस केस की मृतका का केस लड़ रही हैं। सीमा समृद्धि कुशवाहा ने कोर्ट की सुनवाई के बाद कहा, "कोर्ट ने सभी का पक्ष सुना और पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि आपको न्याय जरुर मिलेगा। शव का दाह संस्कार रात में परिवार के मर्जी के बिना क्यों किया गया? कोर्ट के इस सवाल का जवाब किसी भी अधिकारी ने संतोषजनक नहीं दिया। इस पर कोर्ट ने फटकार लगाई। अगली सुनवाई 2 नवंबर को टाल दी गयी।"

सुनवाई के दौरान मृतका के परिवार ने हाई कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए तीन तरह की मांग की हैं। पहला कि वह इस मामले को यूपी के बाहर के किसी राज्य में ट्रांसफर करने का आदेश दें। दूसरा सीबीआई जांच के सभी तथ्य जांच पूरी होने तक पूरी तरह से गोपनीय रखे जाएं, तीसरा जांच की अवधि में परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने पीड़िता के परिवार की उस मांग को माना, जिसमें उन्होंने जांच पूरी होने तक सुरक्षा देने का अनुरोध किया है। सरकार ने इसपर सहमति दी। कोर्ट में हाथरस कांड को लेकर यूपी सरकार तमाम सवालों पर घिरती दिखी।

पीड़ित परिवार की ओर से अंतिम संस्कार को लेकर लगाए गए आरोप पर हाथरस जिलाधिकारी ने कहा कि वहां काफी लोग जमा थे। कानून-व्यवस्था बिगड़ने की वजह से अंतिम संस्कार का फैसला लिया गया। डीएम के बयान के दौरान पीड़िता के परिजनों ने टोकते हुए सवाल किया कि वहां भारी तादाद में पुलिस बल मौजूद था तो कानून व्यवस्था कैसे खराब होती?

देश-दुनिया में चर्चओं में बने बूलगढ़ी मामले में रात में परिजनों के मर्जी के बिना पीड़िता के दाह संस्कार के मुद्दे को हाईकोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान में लिया गया था। छह अक्टूबर को उत्तर प्रदेश सरकार जवाब दाखिल कर चुकी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से तीन अन्य मुद्दों पर भी हलफनामा मांगा था।

कोर्ट में सुनवाई के लिए पीड़िता के परिवार को कड़ी सुरक्षा बल में लाया गया था। मृतका के परिवार के हर सदस्य और गवाहों की सुरक्षा के लिए 2-2 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। परिवार की महिला सदस्यों के लिए महिला सुरक्षाकर्मी की तैनाती की गई है।

उत्तर प्रदेश के हाथरस में कथित तौर पर एक 19 वर्षीय दलित युवती के साथ हुए गैंगरेप और मौत केस की जांच को सीबीआई ने अपने हाथों में ले लिया है। अधिकारियों ने कहा कि जांच एजेंसी के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है और प्राथमिकी दर्ज किए जाने के तुरंत बाद फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ जांच दलों को अपराध स्थल पर भेजा जाएगा।

जांच एजेंसी ने इस सिलसिले में एक टीम गठित की है। सीबीआई में हाथरस मामले की जांच ग़ाज़ियाबाद सीबीआई यूनिट में तैनात डीएसपी सीमा पाहुजा करेंगी। सीबीआई ने मुख्य आरोपी संदीप पर केस दर्ज किया है।

क्या था पूरा मामला?

यूपी के हाथरस में 14 सितंबर को 4 लोगों ने कथित रूप से 19 साल की लड़की के साथ गैंगरेप किया था। यह भी आरोप है कि उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी और जीभ भी काट दी थी। दिल्ली में इलाज के दौरान 29 सितंबर को पीड़िता की मौत हो गई। चारों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। वहीं पुलिस ने दावा किया है कि पीड़िता के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था।


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