दंतेवाड़ा: नंदराज पहाड़ी मामले में आदिवासियों ने पूछा- सचिव को क्यों गांव आने से रोका जा रहा?

दंतेवाड़ा: नंदराज पहाड़ी मामले में आदिवासियों ने पूछा- सचिव को क्यों गांव आने से रोका जा रहा?

रिपोर्ट- मंगल कुंजम, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़)। बीते 7 जुलाई को अपने देवता के पहाड़ पर खनन रोकने के लिए हजारों की संख्या में आदिवासियों ने प्रदर्शन किया था। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला पर्वत श्रृंखला के नंदराज पहाड़ी पर विराजे अपने देवता को बचाने के लिए ये आदिवासी अडानी ग्रुप और सरकार से भिड़ने को तैयार थे। आदिवासियों ने कई शर्तों के बाद धरना समाप्त करने का निर्णय लिया था। इसके बाद एक टीम जांच के लिए ग्रामीणोंं का बयान लेने आने वाली थी लेकिन वह नहीं आ पाई। इस पर ग्रामीण नाराज हो गए और प्रशासन पर आरोप लगाना शुरू कर दिया।

बता दें कि दंतेवाड़ा के किरंदुल में खनन के लिए अडानी ग्रुप को आवंटित खदान नंबर-13 की जमीन को लेकर 2014 में हुई कथित फर्जी ग्रामसभा पर आज जांच टीम बयान लेने जाने वाली थी। हालांकि सुरक्षाबल और जांच टीम हिरोली गांव न पहुंच सकी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत सचिव को जानबूझकर यहां नहीं आने दिया गया है। जबकि उसने ही सारे फर्जी कागजात तैयार किए थे।

गौरतलब है क‍ि 11 जून को ही राज्य सरकार द्वारा नंदराज पहाड़ी डिपॉजिट 13 प्रोजेक्ट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्देश जारी कर दिया गया था। इसके साथ ही फर्जी ग्राम सभा होने के आरोप की भी जांच के निर्देश सरकार द्वारा दे दिए थे, लेकिन आंदोलन कर रहे आदिवासी डिपॉजिट 13 पर खनन की अनुमति को लेकर जारी लीज को ही समाप्त करने की मांग पर अड़े थे।

इसे भी पढ़ें- नेपाल ने भारत से आने वाली सब्जियों और फलों पर लगाई रोक, कीटनाशकों के ज्यादा प्रयोग ने बढ़ाई मुसीबत





इसे भी पढ़ें- वो महिलाएं जिनकी बदौलत एक बड़ी आबादी की थाली में चावल होता है

जिसमें मुख्य मांग थी कि इनके गांव को संबंधित ग्रामसभा में शामिल कर अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए और तत्काल एमओयू रद्द किया जाये। इसके अलावा 15 दिन के अंदर ग्राम सभा की जांच कराई जाए।

आज सभी प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे, जिसमें जिला पुलिस अधीक्षक, एसडीएम, जनपद पंचायत के सीईओ तथा अन्य अधिकारी पहुंचे। आदिवासी नेता मनीष कुंजाम ने कहा कि सुरक्षा की कोई समस्या नहीं हैं। यह सब अधिकारी यहां पहुंच सकते है तो सचिव को क्यों नहीं लाया गया। बिना सचिव के जांच कैसे संमव हैं?


ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सचिव को प्रशासन जानबूझ कर छिपाकर रखना चाहता है। उनका कहना था कि पंचायत सचिव का बयान गांव में ही सबके सामने होना चाहिए। ग्राम सभा का आयोजन सबकी सहमति से प्रशासन को दोबारा करनी चाहिए और सचिव के बयान भी सबके सामने होना चाहिए। पूरा प्रशासन जानता हैं कि सारे कागजात फर्जी बनाये गये है।

पंचायती राज्य अधिनियम 1993 के नियमों का परिपालन में ग्राम हिरोली जिला दंतेवाड़ा एनएमडीसी निरपेक्ष क्रमांक खदान आवंटन के लिए वर्ष 2014 के ग्राम सभा में शिकायत की गई। छत्तीसगढ़ अनुसूचित क्षेत्र की ग्रामसभा (गठन सम्मेलन की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन) नियम 1989 के तहत यहां जांच की जानी थी।


Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.