खेती के लिए पानी की नहीं होगी कमी, किसानों को मिलेंगे 27 लाख सोलर पंप

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार जोर-शोर से जुटी है। मोदी सरकार अब सौर ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने पर भी अपना ध्यान केंद्रित करती दिखायी दे रही है।बिजली मंत्री आरके सिंह ने कहा कि सौर ऊर्जा उत्पादन पर आधारित कुसुम योजना इस साल जुलाई तक शुरू कर दी जायेगी

खेती के लिए पानी की नहीं होगी कमी, किसानों को मिलेंगे 27 लाख सोलर पंप

लखनऊ। किसानों को सस्ती बिजली देने के क्रम में कुसुम योजना के तहत 27.50 लाख सोलर पंप किसानों को मुहैया कराए जाएंगे। जुलाई से कुसुम योजना की शुरुआत होगी। बिजली मंत्री आरके सिंह ने कहा, किसानों की बेहतरी से जुड़ी सौर ऊर्जा उत्पादन पर आधारित कुसुम योजना इस साल जुलाई तक शुरू की जाएगी, जिससे किसानों की आय बढ़ाने तथा सौर ऊर्जा उत्पादन में मदद मिलेगी।

किसानों को आय बढ़ाने के इरादे से किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (कुसुम योजना) योजना की घोषणा 2018-19 के बजट में की गयी। इसके तहत किसानों को उनकी बंजर जमीन पर सौर परियोजना लगाने तथा अतिरक्ति बिजली ग्रिड को बेचने के लिये प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे करीब 28,250 मेगावाट विकेंद्रित सौर ऊर्जा उत्पादन की उम्मीद है। इस योजना के तहत किसानों को 27.5 लाख सौर पंप उपलब्ध कराये जाएंगे। साथ ही 0.5 से 2 मेगावाट क्षमता के कुल 10,000 मेगावाट क्षमता के सौर संयंत्र लगाये जाएंगे। इसके अलावा 50,000 ग्रिड से जुड़ी ट्यूब बेल : लिफ्ट एरिगेशन तथा पेय जल परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। इससे डीजल से चलने वाले सिंचाई से पंपिंग सेट से छुटकारा मिलेगा।

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सिंह ने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों के बारे में कहा, अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी हमारी क्षमता पिछले चार साल में दोगुनी होकर 70,000 मेगावाट पहुंच गयी है। इसके अलावा 40,000 मेगावाट से अधिक क्षमता की परियोजनाएं विकास के विभन्नि चरण में हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 2013-14 के 2,630 मेगावाट से बढ़कर मार्च 2018 में आठ गुना से अधिक बढ़कर 22,000 मेगावाट पहुंच गयी। इसी अवधि में पवन ऊर्जा क्षमता 21,000 मेगावाट से बढ़कर 34,000 मेगावाट पहुंच गयी है। सिंह ने कहा , ह्यह्य हम 2022 तक 1,75,000 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता सृजित करने की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन जो प्रवृत्ति है हम न केवल लक्ष्य पूरा करेंगे बल्कि कुल क्षमता सृजन कहीं अधिक होगा। अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में उपलब्धियों के कारण भारत पवन ऊर्जा मामले में जहां चौथे स्थान पर पहुंच गया है, वहीं सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में छठे स्थान पर है। पूरे अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में भारत दुनिया में पाचवें स्थान पर है।



कुसुम योजना की क्यों पड़ी जरुरत

भारत किसानों को सिंचाई के लिए काफी दिक्कत आती थी और बिना बारिश होने के कारण बहुत से किसानों की फसल खराब हो जाती थी। लेकिन कुसुम योजना के तहत किसान अपनी जमीन में सौर ऊर्जा यंत्र और पंप लगाकर अपने खेतों की सिंचाई कर सकते हैं। किसान ऊर्जा सुरक्षा व उत्थान महाअभियान (कुसुम) योजना के तहत 2022 तक देश में तीन करोड़ पंपों को बिजली या डीजल की जगह सौर ऊर्जा से चलाया जाएगा। कुसुम योजना पर कुल 1.40 लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें केंद्र सरकार 48 हजार करोड़ रुपये योगदान करेगी, जबकि इतनी ही राशि राज्य सरकारें देंगी। किसानों को कुल लागत का सिर्फ 10 फीसद ही उठाना होगा, जबकि लगभग 45 हजार करोड़ रुपये का इंतजाम बैंक लोन से किया जाएगा।

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कुसुम योजना के ये होंगे फायदे

- किसानों को सोर ऊर्जा यंत्र को लगाने के लिए सिर्फ़ 10प्रतिशत राशि का अग्रिम भुगतान करना होगा

- केंद्रीय सरकार किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में सब्सिडी प्रदान करेगा तथा इससे किसानों को किसी भी मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ेगा

-इस योजना से बंजर भूमि का उपयोग होगा

-बैंक किसानों को बैंक ऋण के रूप में कुल व्यय का 30 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करेगी

-सरकार किसानों को सब्सिडी के रूप में यंत्र की कुल लागत का 60प्रतिशत हिस्सा प्रदान करेगी

-इस योजना से सोर ऊर्जा को अधिक बढ़ावा मिलेगा

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