उत्कल एक्सप्रेस हादसे की जिम्मेदारी रेल मंत्री सुरेश प्रभु को लेनी होगी : कांग्रेस  

उत्कल एक्सप्रेस  हादसे की जिम्मेदारी रेल मंत्री सुरेश प्रभु को लेनी होगी : कांग्रेस  कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला।

नई दिल्ली (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में हुए ट्रेन हादसे के लिए 'आपराधिक लापरवाही' का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने रविवार को कहा कि रेल मंत्री सुरेश प्रभु को जिम्मेदारी लेनी होगी, क्योंकि वह यात्रियों को सुरक्षा मुहैया कराने के अपने प्राथमिक कर्तव्य में असफल रहे हैं। कांग्रेस ने मुजफ्फरनगर के नजदीक खतौली में कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के पटरी से उतरने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी जवाब देने के लिए कहा है।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के खतौली में शनिवार शाम कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए, जिसमें 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 90 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान जारी कर कहा, "इस त्रासदपूर्ण हादसे ने एक बार फिर रेल सुरक्षा को लेकर भाजपा सरकार और रेल मंत्रालय के खराब रिकॉर्ड को उजागर कर दिया है।"

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सुरजेवाला ने कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि यात्रियों की सुरक्षा के संदर्भ में रेल मंत्रालय और रेलवे लापरवाही और पूर्व तैयारियों की कमी के मामले में नया कीर्तिमान बना रहे हैं। रेल मंत्री को इसकी जिम्मेदारी लेनी ही होगी।"

उन्होंने कहा, "लगातार रेलवे के निजीकरण की नई-नई योजनाएं पेश कर रहे और अधिकतर समय ट्विटर पर बिताने वाले रेल मंत्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह असफल रहे हैं। जनता मूलभूत सुविधाएं और रेल नेटवर्क की सुरक्षा चाहती है।"

सुरजेवाला ने कहा, "अब तक आ रही खबरों से संकेत मिल रहा है कि यह ट्रेन हादसा संचार में बड़ी खामी के चलते हुआ। आपराधिक लापरवाही का जिक्र न कर सुरक्षा मानकों की अनुपस्थिति और जोखिमपूर्ण व्यवस्था हादसे की दुखद व्याख्या है।"

प्रधानमंत्री मोदी की अति महत्वाकांक्षी योजना बुलेट ट्रेन पर निशाना साधते हुए सुरजेवाला ने कहा, "बुलेट ट्रेन को भूल जाइए, जब से नरेंद्र मोदी की सरकार बनी है, 27 ट्रेन हादसे हो चुके हैं। अकेले उत्तर प्रदेश में बीते 15 महीने में छह बड़ी ट्रेन दुर्घटनाएं हुई हैं। हर बार रेलवे दुर्घटना के पीछे साजिश का नया बहाना खोज लाती है और अपनी गलती मानने से इनकार कर देती है। लेकिन तथ्य कुछ और ही कहते हैं।"

उन्होंने कहा कि मई, 2014 के बाद से रेल किराए में 70 फीसदी की वृद्धि की जा चुकी है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस योजना अब तक तैयार नहीं की गई है।

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