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महाकलेश्वर मंदिर में चढ़ाए गए फूलों से बनाई जाएगी अगरबत्ती व धूपबत्ती

महाकलेश्वर मंदिर में चढ़ाए गए फूलों से बनाई जाएगी अगरबत्ती व धूपबत्ती

लखनऊ। प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के साथ ही उज्जैन के दूसरे कई मंदिरों पर चढ़ाए गए फूलों से अगरबत्ती और धूपपत्ती बनाई जाएगी। इसके लिए स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

सीएसआईआर-सीमैप ने एकस शोसल वेल्फेयर ऑर्गनाइज़ेशन उज्जैन के साथ श्री महाकालेश्वर तथा अन्य मंदिरों में चढ़े फूलों से अगरबत्ती औ कोन बनाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। सीएसआईआर-केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान, लखनऊ ने उज्जैन के मंदिरों में चढ़े फूलों से अगरबत्ती एवं कोन बनाने की तकनीक को एकस शोसल वेल्फेयर ऑर्गनाइज़ेशन, उज्जैन को हस्तांतरित किया है।


उज्जैन के मंदिर महाकालेश्वर में लगभग तीन-चार टन फूल (गुलाब, गेंदा और बेल पत्र) रोज भक्तों द्वारा चढ़ाए जाते हैं, जिनका उचित निस्तारण करने में मंदिर प्रशासन को काफी मुश्किल होती है। इसलिए मंदिर प्रशासन ने उज्जैन की संस्था एकस शोसल वेल्फेयर ऑर्गनाइज़ेशन से उसका उचित उपयोग करने के लिए फूलों से अगरबत्ती और कोन बनाने के लिए अनुरोध किया है। जिसके लिए उक्त तकनीक सीमैप, लखनऊ से हस्तांतरित की गयी है, जिससे उसका उचित उपयोग एवं पर्यावरण को बचाने में सहयोग मिलेगा।

फूलों से निर्मित अगरबत्ती में कोयले का प्रयोग नहीं किया जाता है। यह अधिक देर तक जलने मे भी सक्षम है, इसके अलावा बांस की तीलियों का प्रयोग भी नहीं किया जाता है और रासायनिक पदार्थ रहित व जहरीला धुआं भी नहीं होता है । इस तकनीकी को सीएसआईआर-आईआईटीआर, लखनऊ द्वारा प्रमाणित भी किया गया है। सीमैप के वैज्ञानिक मनोज सेमवाल बताते हैं, "अभी सीमैप की मदद से देश के कई बड़े मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों से अगरबत्ती बनायी जा रही है, इसके लिए लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है।"

समझौते पत्र पर एकस शोसल वेल्फेयर ऑर्गनाइज़ेशन उज्जैन के मनप्रीत एवं सीएसआईआर-सीमैप के प्रशासनिक अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किए गये। संस्था जल्द ही अपनी विनिर्माण सुविधा में आने वाले महीने में उपरोक्त उत्पाद का उत्पादन शुरू करेगी।


डॉ. अब्दुल समद, निदेशक, सीमैप, ने समझौता पत्र एकस संस्था को सौंपा । इस अवसर पर डॉ. आर. के. श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, व्यापार विकास विभाग, डॉ. संजय कुमार, ई. मनोज सेमवाल, करजी सिन्हा, आदि उपस्थित थे।

इससे पहले कटरा और जम्मू के मंदिरों में उपयोग होने वाले फूल अपशिष्टों का उपयोग अब अगरबत्ती बनाने के लिए किया जाएगा। इसके लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड और लखनऊ स्थित सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) के बीच समझौता किया गया है।

सीएसआईआर-सीमैप के वैज्ञानिक फूलों से अगरबत्ती बनाने के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को नि:शुल्क परामर्श, तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ-साथ श्राइन बोर्ड में काम करने वाली महिलाओं को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। अगरबत्ती बनाने के लिए फूलों की पंखुड़ियों और तनों को पहले अलग किया जाएगा और फिर उन्हें धोने व सुखाने के बाद पीसा जाएगा। इस पिसी हुई सामग्री का उपयोग अगरबत्ती बनाने में किया जाएगा।


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