आपकी सभी जानकारियां तीसरे व्यक्ति के पास 

आपकी सभी जानकारियां तीसरे व्यक्ति के पास प्राइवेसी संबंधित कानून में सुधार को सरकार अस्वीकार कर चुकी है

लखनऊ। आपके पास अक्सर किसी कंपनी से या किसी संस्थान के विज्ञापन के कई कॉल या मेसेज आते होंगे लेकिन कभी इतना गहराई से ध्यान नहीं दिया होगा कि आखिर आपके नंबर की जानकारी इतने लोगों तक पहुंची कैसे? ये थर्ड पार्टी का खेल क्या है?

बीते दिनों पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के आधार कार्ड की जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर होने के कारण उनकी पत्नी साक्षी धोनी ने नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कानून मंत्री से शिकायत करते हुए इस मामले में संज्ञान लेने को कहा।

आधार एक्ट एंड रूल्स में इस बात को सीमित नहीं किया गया है कि आधार एजेंसियां आपके बारे में कितनी जानकारी प्राप्त कर सकती हैं, इसी तरह इस बात को सीमित नहीं किया गया है कि थर्ड पार्टी आधार को कितना इस्तेमाल कर सकती हैं (इस प्रक्रिया को सीडिंग भी कहते हैं)। अगर थर्ड पार्टी को यूआईडीएआई की तरफ से अगर जानकारी नहीं मिलती है तो उसे आपका आधार नंबर इस्तेमाल करके जानकारी इकट्ठी करने के लिए आपकी सहमति की भी जरूरत नहीं है।

यह चिंता केवल नामी-गिरामी व्यक्तियों की ही नहीं, आम आदमी की भी हो सकती है। हम हर बार सत्यता या वित्तीय लेनदेन के लिए आधार का इस्तेमाल करते हैं लेकिन क्या आपको पता है इसमें मौजूद आपके बारे में जानकारी यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के डाटाबेस में है। हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के अनुसार, यानी सरकार के पास आपके मेडिकल खरीदारी से लेकर वीडियो चैटिंग सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल तक की पूरी डिटेल्ड जानकारी है। हालांकि इसमें मैरिटल स्टेटस के लिए जो स्थान था उसे हटा दिया गया है लेकिन उसके बाद भी सरकार के पास आपकी ऐसी कई जानकारियां है जो एक तरह से आपके ऊपर निगरानी रखने जैसा है। दुख की बात यह है कि हमारा कानून भी बेहद खराब स्थिति में है।

आधार एक्ट एंड रूल्स में इस बात को सीमित नहीं किया गया है कि आधार एजेंसियां आपके बारे में कितनी जानकारी प्राप्त कर सकती हैं, इसी तरह इस बात को सीमित नहीं किया गया है कि थर्ड पार्टी आधार को कितना इस्तेमाल कर सकती हैं (इस प्रक्रिया को सीडिंग भी कहते हैं)। अगर थर्ड पार्टी को यूआईडीएआई की तरफ से अगर जानकारी नहीं मिलती है तो उसे आपका आधार नंबर इस्तेमाल करके जानकारी इकट्ठी करने के लिए आपकी सहमति की भी जरूरत नहीं है। जैसे कि एक दवा उत्पादक अलग-अलग फार्मेसी से डाटा खरीदकर और आधार का इस्तेमाल करके प्रोफाइल तैयार करता है।

यहां तक कि राष्ट्र सुरक्षा के हित में आपके बायोमीट्रिक (शारीरिक चिन्हों जैसे ऊँगली के निशानों अथवा आँखों की पुतलियों द्वारा व्यक्ति विशेष की पहचान की पद्धति) को भी साझा किया जा सकता है।

इसके लिए कानून में यूआईडीएआई के लिए प्रावधान है कि वह इसके खिलाफ केस कर सकता है लेकिन एक आम व्यक्ति को सरकार या प्राइवेट पार्टी के खिलाफ आधार के गलत इस्तेमाल, धोखाधड़ी या डाटा के उल्लंघन के खिलाफ केस करने का अधिकार नहीं है।

प्राइवेसी संबंधित संशोधन सरकार ने अस्वीकार कर दिए

यह भी साफ है कि सरकार कानून में प्राइवेसी संबंधित सुधार के विरुद्ध है। मार्च 2016 में राज्यसभा में आधार बिल पर बहस के बाद राज्यसभा सांसद जयराम नरेश ने एक संशोधन पारित किया था कि अगर किसी व्यक्ति के पास आधार से बेहतर विकल्प है अपनी पहचान साबित करने के लिए तो उसके लिए इसे बनवाना कोई जरूरी नहीं लेकिन ये सारे ही संसोधन लोकसभा में अस्वीकार कर दिए गए।

दूसरे देशों में जानकारी लीक होने पर किया जाता है सूचित

अन्य देशों में डाटा सिक्योरिटी कानून के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के डेटा का उल्लंघन हुआ है तो उसे सूचित किया जाए। एक आरटीआई के जरिए पूछा गया कि अगर यूआईडीएआई सिस्टम से कभी किसी व्यक्ति के डेटा के उल्लंघन की जानकारी मांगी जाती है तो जवाब में आया कि राष्ट्र के सुरक्षा कारणों से यह जानकारी लीक नहीं की जा सकती।

2009 में टेक्नोलॉजी और आर्किटेक्चर से संबंधित दस्तावेज जिन्हें गोपनीय मार्क किया गया था वह विकीलीक्स में सार्वजनिक हो गए थे।

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