जब एक माँ ने गाकर दी अपने बेटे को अंतिम विदाई

जब एक माँ ने गाकर दी अपने बेटे को अंतिम विदाईअपने बेटे की अंतिम विदाई में अपनी मंडली के साथ गीत गाती पूनम विराट तिवारी

राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)। घर में किसी की मौत पर घर वाले रोते-बिलखते हैं, होशोहवास खो बैठते हैं, लेकिन एक मां ने अपने मृतक बेटे की अंतिम विदाई अनोखे तरीके से की। यह वाकया है छत्तीसगढ़ की जानी-मानी लोक गायिका पूनम विराट तिवारी और लोक कलाकार दीपक विराट तिवारी के घर का। घर के अंदर बेटे का मृत शरीर रखा हुआ है और माँ रुदले गले से अपने तीस साल के जवान बेटे सूरज को 'चोला माटी के हे राम, एकर का भरोसा.....' गाने के साथ अंतिम विदाई दे रही थी। गम के इस माहौल में भी लोक कलाकार बहते आंसू के साथ सूरज की अंतिम इच्छा पूरी कर रहे थे।

सूरज के पिता दीपक विराट तिवारी संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से सम्मानित हैं और वे कालजयी नाट्य कृति "चरणदास चोर" में मुख्य भूमिका निभाते थे पर अब लम्बे समय से पैरालिसिस की वजह से बिस्तर पर हैं। सूरज की माँ पूनम विराट तिवारी ने हबीब तनवीर के नाट्य संस्था से लोक कला की शुरुआत की थी और लोक कला पर काम करने के लिए उन्हें दाऊ मंदराजी राज्य अलंकरण सम्मान दिया गया है। विरासत में मिली कला और हुनर को संभालते हुए बेटे सूरज तिवारी ने भी विभिन्न रंग मंचो में काम किया और छत्तीसगढ़ के ज़िले राजनांदगाँव में रंग छत्तीसी के नाम से सांस्कृतिक संस्था की शुरुआत की। छत्तीसगढ़ी लोक कला के प्रति समर्पित इस परिवार नेभारत के विभिन्न कोनों के साथ ही 22 से ज़्यादा देशो में लोक कला को लोगों के बीच पहुंचाने का काम किया है।


माँ पूनम विराट ने कहा, " मैंने अपने मां होने के दर्द को दिल में समेटकर बेटे को विदाई थी है। सूरज इस दुनिया को छोड़कर तो चला गया लेकिन वह इस गीत माध्यम से हमेशा हमारे बीच रहेगा।"

सूरज बचपन से ही अपने परिवार के साथ गायन-वादन के साथ मंचों में प्रस्तुति भी देते थे, 30 वर्षीया सूरज काफी लम्बे समय से शहीदवीर नारायण सिंह (छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रा संग्राम सेनानी) पर एक फिल्म बनाने के लिए प्रयासरत थे। कुछ दिनों पहले सूरज को हार्ट अटैक आया और उपचार के दौरान पेसमेकर लगाया गया था। स्वास्थ्य में सुधर आने के बाद सूरज ने 29 अक्टूबर को आखिरी प्रस्तुति दी पर किसे पता था की यह सूरज की आखरी प्रस्तुति रहेगी। 2 नवंबर के तड़के चार बचे सूरज को फिर से सीने में दर्द उठा और उसने दुनिया को अलविदा कह दिया।

आम तौर पर मृत व्यक्ति के परिजन रोते है, शोक मानते है लेकिन सूरज के घर में उसकी अंतिम इच्छा के अनुरूप गायन-वादन कर शोकमनाया गया. सूरज की अंतिम इच्छा थी कि उसे पारम्परिक गीत - 'चोला माटी के राम' गाकर विदा किया जाए। माँ पूनम तिवारी ने पुरे हिम्मत के साथ बेटे के शव के सामने अपने रुदले कंठ से गाना शुरू कर दिया और दोस्तों ने हारमोनियम और तबला के साथ संगत दी।

इस गाने के गीतकार हैं गंगाराम शिवारे और इसे संगीत दिया है भारत के मशहूर पटकथा लेखक, नाट्य निर्देशक, कवि और अभिनेता पदम् विभूषण हबीब तनवीर की बेटी नगीन तनवीर ने, यह पारम्परिक छत्तीसगढ़ी गीत कम शब्दों में जीवन के सार को समझाता है। इसका अर्थ है की मिट्टी के बने इस शरीर का कोई भरोसा नहीं है, गीत की पंक्तियां बताती हैं कि जब गुरु द्रोणचार्य जैसा विद्वान, कर्ण जैसा दानवान, बली जैसा बलशाली, रावण जैसा अभिमानी चला गया तो इस दुनिया में क्या तठस्थ है और काल जब आता है तब न राजा देखता है रंक।

(यह लेख छत्तीसगढ़ से हर्ष दुबे और जिनेन्द्र पारख ने लिखा है)

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