जानें दशकों पुराने कावेरी विवाद का पूरा घटनाक्रम  

जानें दशकों पुराने कावेरी विवाद का  पूरा घटनाक्रम  कावेरी जल विवाद

नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया कि वह अपने अंतरराज्यीय बिलीगुंडलु बांध से तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी का 177.25 टीएमसीएफटी जल छोड़े। फैसले में यह स्पष्ट किया गया कि कर्नाटक को अब प्रति वर्ष 14.75 टीएमसीएफटी जल अधिक मिलेगा जबकि तमिलनाडु को 404.25 टीएमसीएफटी जल मिलेगा जो न्यायाधिकरण द्वारा वर्ष 2007 में निर्धारित जल से 14.75 टीएमसीएफटी कम होगा।

इससे पूर्व, कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण द्वारा वर्ष 2007 में किए गए आवंटन के अनुसार कर्नाटक को 270 टीएमसीएफटी जल आवंटित किया गया था। वह अब बढ़कर 284.75 टीएमसीएफटी हो जाएगा। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्र, न्यायमूर्ति अमिताव रॉय और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की पीठ ने यह बहुप्रतीक्षित आदेश सुनाया।

  • दशकों पुराने कावेरी दल विवाद का पूरा घटनाक्रम इस प्रकार है : -
  • कावेरी नदी के पानी को लेकर पहला समझौता मद्रास प्रेसिडेंसी और मैसूर राज के बीच 1892 में हुआ और दूसरा 1924 में। 1924 में हुआ दूसरा समझौता 1974 में समाप्त हुआ।
  • मई 1990- सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र को कावेरी जल विवाद पंचाट गठित करने का आदेश दिया। तमिलनाडु 1970 से ही इसकी मांग कर रहा था।
  • दो जून- केन्द्र ने कावेरी जल विवाद पंचाट के गठन की अधिसूचना जारी की।
  • जनवरी 1991 -- कावेरी जल विवाद पंचाट ने अंतरिम राहत संबंधी तमिलनाडु की अर्जी खारिज की, तमिलनाडु इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय पहुंचा ।
  • अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद पंचाट को निर्देश दिया कि वह अंतरिम राहत के लिए तमिलनाडु की अर्जी पर विचार करे।
  • जून-कावेरी जल विवाद पंचाट ने अंतरिम फैसला सुनाया। कर्नाटक को 205 टीएमसीफुट पानी छोड़ने का आदेश। कर्नाटक ने आदेश रद्द करने के लिए अध्यादेश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया, कर्नाटक के अध्यादेश को रद्द किया और कावेरी जल विवाद पंचाट का अंतरिम आदेश बरकरार रखा। कर्नाटक ने इसे मानने से इनकार किया।
  • 11 दिसंबर- अंतरिम फैसला भारत सरकार के गजट में प्रकाशित हुआ।
  • अगस्त 1998- केन्द्र ने कावेरी नदी प्राधिकरण का गठन किया, ताकि कावेरी जल विवाद पंचाट का अंतरिम फैसला लागू करना सुनश्चिति हो सके।
  • आठ सितंबर 2002- तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अध्यक्षता वाले कावेरी नदी प्राधिकरण ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का नर्दिेश दिया।
  • पांच फरवरी 2007- कावेरी जल विवाद पंचाट ने 17 साल बाद अंतिम फैसला सुनाया। पंचाट ने तमिलनाडु के पानी देने के संबंध में मद्रास प्रेसिडेंसी और मैसूर राज के बीच 1892 और 1924 में हुए दोनों समझौतों को वैध बताया।
  • 19 सितंबर 2012- सातवें कावेरी नदी प्राधिकरण में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कर्नाटक को निर्देश दिया कि वह बिलिगुंडलु बांध के लिए तमिलनाडु को 9,000 क्यूसेक पानी छोड़े।
  • 28 सितंबर- सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी नदी प्राधिकरण में प्रधानमंत्री का निर्देश नहीं मानने पर कर्नाटक सरकार को फटकार लगाई।
  • 19 मार्च 2013- तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह जल संसाधन मंत्रालसय को कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन का निर्देश दे।
  • 10 मई- सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी का पानी छोड़े जाने की निगरानी के लिए केन्द्र से पैनल गठित करने को कहा।
  • 28 मई- तमिलनाडु उच्चतम न्यायालय पहुंचा, कावेरी जल विवाद पंचाट का आदेश पालन नहीं करने के लिए कर्नाटक से 2,480 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा।
  • 12 जून- कावेरी निगरानी समिति ने कावेरी जल विवाद पंचाट के आदेशानुसार कर्नाटक को कावेरी का पानी छोड़े जाने का निर्देश देने के लिये तमिलनाडु की अर्जी के बारे में कहा कि यह व्यावहारिक नहीं है।
  • 14 जून- तमिलनाडु ने कावेरी निगरानी समिति पर कर्नाटक के रूख को लेकर तमिलनाडु ने अवमानना का मुकदमा करने का फैसला किया।
  • 26 जून- कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग लेकर तमिलनाडु सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
  • 28 जून- तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की।
  • 18 नवंबर 2015 -- कर्नाटक ने कावेरी का पानी छोड़े जाने संबंधी तमिलनाडु की अर्जी का विरोध किया।
  • दो सितंबर 2016- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक से कहा कि वह तमिलनाडु को कावेरी का पानी देने के संबंध में विचार करे।
  • पांच सितंबर- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को आदेश दिया, अगले 10 दिनों तक रोजाना तमिलनाडु को 15,000 क्यूसेक पानी छोड़े।
  • सात सितंबर- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कर्नाटक ने तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़ना शुरू किया।
  • 11 सितंबर- कर्नाटक ने तमिलनाडु को पानी देने वाले आदेश में संशोधन का अनुरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय में अर्जी दी।
  • 12 सितंबर- सुप्रीम कोर्ट ने पांच सितंबर के आदेश को खत्म करने संबंधी कर्नाटक की याचिका रद्द की। हालांकि, रोजाना छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा 15,000 क्यूसेक से घटाकर 12,000 क्यूसेक करने को कहा।
  • 19 सितंबर- कावेरी निगरानी समिति ने कर्नाटक को महीने के बकाया दिनों में रोजाना 3,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा।
  • 14 जुलाई 2017- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह दोनों राज्यों के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए मामले पर संतुलित तरीके से विचार करेगा। कर्नाटक ने अनुरोध किया तमिलनाडु को 192 टीएमसीफुट के स्थान पर 132 टीएमसीफुट पानी दिया जाये।
  • 20 सितंबर- सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
  • 16 फरवरी 2018- सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाया। कर्नाटक को प्रतिवर्ष तमिलनाडु के लिए 404.25 टीएमसीफुट पानी छोड़ने को कहा। कावेरी जल विवाद पंचाट ने पहले तमिलनाडु को 419 टीएमसीफुट पानी देने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कावेरी जल पर उसका फैसला अगले 15 साल तक प्रभावी रहेगा।

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कराईकल के किसानों के लिए बड़ी राहत : पुदुचेरी मुख्यमंत्री

पुदुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने कावेरी जल साझा करने के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह फैसला कराईकल के किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो इतने वर्षों से सिंचाई के लिए पानी के लिए कानूनी जंग लड़ रहे थे।

कावेरी जल के लिए जारी रखेंगे प्रयास: अन्नाद्रमुक

अन्नाद्रमुक ने कहा कि तमिलनाडु में उसकी सरकार कावेरी नदी का पर्याप्त जल पाने के लिए प्रयास जारी रखेगी जबकि विपक्षी द्रमुक ने सुप्रीम कोर्ट में मामले को कथित रूप से उचित तरीके से नहीं रखने को लेकर सरकार की आलोचना की।

द्रमुक के कार्यवाहक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने इस फैसले को स्तब्ध करने वाला बताया और कहा कि पर्याप्त जल हासिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पर्याप्त सबूत पेश नहीं करने पर पार्टी के. पलानीस्वामी सरकार की कड़ी निंदा करती है।

द्रमुक के वरिष्ठ नेता दुराय मुरूगन ने सत्तारूढ़ पार्टी की आलोचना करते हुए कहा कि उसने मामले में उचित रूप से अपना पक्ष नहीं रखा जिसके कारण राज्य को करीब 15 टीएमसीएफटी जल का नुकसान हुआ।

माकपा राज्य सचिव जी रामाकृष्णन ने कहा कि इस फैसले से डेल्टा क्षेत्र के किसान प्रभावित होंगे क्योंकि वे अपनी आवश्यकताओं के लिए कावेरी नदी के जल पर पूरी तरह आश्रित हैं।

इनपुट भाषा

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