बिहार में नीतीश कुमार खिलायेंगें कमल का फूल, कल शाम बीजेपी के साथ 5 बजें लेंगें शपथ 

बिहार में नीतीश कुमार खिलायेंगें कमल का फूल, कल शाम बीजेपी के साथ 5 बजें लेंगें शपथ फाइल फ़ोटो 

पटना (भाषा)। बिहार में काफी दिनों से चली आ रही खींचतान के बीच नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंप दिया। लेकिन शाम को बीजेपी के सामर्थन के ऐलान बाद नीतीश कुमार ने दावा भी पेश कर दिया। अब नीतीश कुमार गुरुवार शाम 5 बजे शपथ ग्रहण करेंगेनीतीश के शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी भी शामिल हो सकते हैंबीजेपी और जेडीयू के विधायकों की साझा बैठक में फैसला लिया गया है

नीतीश कुमार ने राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी को इस्तीफा सौंपने के बाद संवाददाताओं से कहा, "बिहार में जो परिस्थितियां बनी हुई, उसमें महागठबंधन सरकार चलाना मुश्किल हो गया है।"

उधर, नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर भी शुरू हो गया। नीतीश के इस्तीफे के बाद लालू यादव ने कहा, "नीतीश कुमार एक आर्म्स एक्ट में नाम आने के बाद उन्हें लगा की नहीं बचेंगे तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया," आगे कहा, "महागठबंधन को बचाने के लिए विधायक नया नेता चुनें।"

नीतीश कुमार

नई दिल्ली में हो रही बीजेपी संसदीय दल की बैठक में भी बिहार के हालात पर चर्चा की गई। उसके थोड़ी देर पटना में बीजेपी नेता सुशील मोदी ने नीतीश कुमार को समर्थन देने की घोषणा कर दी। इसी के साथ बीजेपी चार साल बाद बिहार में सत्ता में वापसी करेगी। बीजेपी के समर्थन के बाद बिहार में एनडीए ने बहुमत के आंकड़े को आसानी से पा लिया। इस 243 सदस्यीय विधानसभा नीतीश की जदयू के पास 71 सीटें हैं, जबकि तेजस्वी यादव के पिता लालू प्रसाद के नेतृत्व वाले राजद के पास 80 सीटें हैं। भाजपाके पास 53 सीटें हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी।

पटना में नीतीश के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, " भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई में जुड़ने के लिए नीतीश कुमार जी को बहुत-बहुत बधाई। सवा सौ करोड़ नागरिक ईमानदारी का स्वागत और समर्थन कर रहे हैं। देश के, विशेष रूप से बिहार के उज्जवल भविष्य के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़एक होकर लड़ना,आज देश और समय की माँग है।" तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद नीतीश कुमार और लालू यादव के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी।

नीतीश ने कहा, "जब मुझे ऐसा लग गया कि वे कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं, तो ऐसी स्थिति में मैं तो जवाब नहीं दे सकता। मैं सरकार का नेतृत्व कर रहा हूं। लेकिन सरकार के अंदर के व्यक्ति के बारे में कुछ बातें कही जाती हैं और मैं उस पर कहने की स्थिति में नहीं हूं तो ऐसी स्थिति में इस सरकार को चलाने का, मेरे हिसाब से कोई आधार नहीं है।"

नीतीश ने कहा कि उन्होंने अंतर्रात्मा की आवाज पर अपना इस्तीफा दिया है। नीतीश ने कहा, "पूरे माहौल को देखने के बाद, मुझे लगा कि मेरे जैसे व्यक्ति के लिए..यह मेरे अंतर्रात्मा की आवाज है। लंबे समय से मेरे दिमाग में यह बात चल रही थी कि कोई रास्ता निकल जाए। मैंने राहुल जी से भी बात की। और आप सब जानते हैं कि उनका भी जो रुख रहा है, उसे देखते हुए..बिहार में भी जो कांग्रेस के लोग हैं, उनसे मैंने कहा कि कुछ ऐसा करिए कि सच को रास्ता मिले।"

नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री बिहार।

बता दें है कि सीबीआई ने लालू प्रसाद और उनके बेटे तेजस्वी सहित उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने सात जुलाई को पटना सहित देशभर में 12 स्थानों पर छापेमारी की थी। यह मामला वर्ष 2004 का है, जब लालू प्रसाद देश के रेलमंत्री थे। आरोप है कि उन्होंने रेलवे के दो होटल को एक निजी कंपनी को लीज पर दिलाया और उसके एवज में उन्हें पटना में तीन एकड़ जमीन दी गई। इधर, राजद स्पष्ट कर चुका है कि सभी आरोपों का जवाब सही समय पर और सही जगह पर दिया जाएगा। इसके बाद दोनों दलों में दरार चौड़ी होती गई और अंतत: नीतीश ने इस्तीफा दे दिया।

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नीतीश ने नोटबंदी और राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अपनी पार्टी के पक्ष पर सवाल उठाए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "हमने नोटबंदी का समर्थन किया, तब हम पर सवाल उठाए गए। हमारे बिहार के राज्यपाल राष्ट्रपति बनने वाले थे, हमने उनका समर्थन किया, तब भी हम पर सवाल उठाए गए। इस तरह काम करना मेरे स्वभाव के विपरीत है।"

उन्होंने कहा, "नोटबंदी का मसला आया तो हमने नोटबंदी का समर्थन किया। मेरे ऊपर न जाने क्या-क्या आरोप लग रहे थे। हमने नोटबंदी का समर्थन करते हुए यह भी साफ-साफ कहा था कि बेनामी संपत्ति पर भी रोक लगे। हम हमेशा जनपक्षधरता के समर्थन में रहे।" उन्होंने कहा, "ऐसी बातें उठती रहीं कि गठबंधन बना रहे, विपक्ष की एकता बनी रहे। मैं तो हमेश विपक्ष की एकता के पक्ष में रहा, लेकिन कैसी विपक्षी एकता। विपक्ष का एक एजेंडा होना चाहिए।"

‘यह अपने आप लाया गया संकट है’

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव प्रकरण पर नीतीश ने कहा, "हमने कभी किसी का इस्तीफा नहीं मांगा था, बल्कि उनका पक्ष मांगा था। लालू जी से बातचीत होती रही है। तेजस्वी भी मिले। मैंने कहा कि जो भी आरेाप लगे हैं, उसे स्पष्ट कीजिए। आम जन के बीच जो अवधारणा बन रही है, उसके लिए यह जरूरी है। वो नहीं हुआ। हमारी लालू जी के साथ, राजद के साथ कोई संवादहीनता नहीं है। अब उस पर यह बात होती है कि संकट में रक्षा कीजिए। यह कोई संकट नहीं है, यह अपने आप लाया गया संकट है। कुछ भी हो उसे स्पष्ट करना चाहिए।"

बिहार के उज्जवल भविष्य के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक होकर लड़ना, आज देश और समय की मांग है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जुड़ने के लिए नीतीश कुमार जी को बहुत-बहुत बधाई। सवा सौ करोड़ नागरिक ईमानदारी का स्वागत और समर्थन कर रहे हैं।

- नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

नीतीश कुमार के इस्तीफे से दु:ख हुआ। नीतीश और तेजस्वी बाहर रहेंगे। महागठबंधन के विधायक नए नेता चुनें। सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी है और उसको हक है। हम राष्ट्रपति शासन लागू नहीं करवाना चाहते हैं।

- लालू यादव, आरजेडी प्रमुख

भाजपा बिहार में महागठबंधन को तोड़ना चाहती है, क्योंकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि देश के सभी राज्यों में भाजपा की सरकार होगी। शाह के इसी सपने को पूरा करने के लिए भाजपा यहां काम कर रही है।

- तेजस्वी यादव, उप मुख्यमंत्री, बिहार

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