इस बार किसानों पर मेहरबान रहेगा मानसून: स्काईमेट ने जारी किया मौसम पूर्वानुमान

इस बार   किसानों पर मेहरबान रहेगा मानसून: स्काईमेट ने जारी किया मौसम पूर्वानुमानअच्छी होगी बारिश

किसानों के लिए अच्छी खबर है, मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार इस बार अच्छी बारिश होने के आसार हैं। स्काइमेट ने 2018 के लिए मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है, स्काइमेट के अनुसार, जून से सितंबर तक चार महीने की अवधि के लिए मानसून 2018 में 887 मिमी की लंबी अवधि की औसत सामान्य रहने की संभावना है।

मौसम विभाग उत्तर प्रदेश के निदेशक डॉ. जेपी गुप्ता बताते हैं, "इस बार देशभर में सामान्य बारिश होने की उम्मीद है, लॉ-नीना के असर से ऐसा होता है। उत्तर भारत में सामान्य से अधिक बारिश का पूर्वानुमान है, इस बारिश से किसानों को फायदा होने वाला है।

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चार महीनों के बारिश के सीज़न, दक्षिण-पश्चिम मानसून के साथ बहुत सी विविधताएं जुड़ी हैं। साथ ही इसकी विदाई तक कुछ रहस्यमय स्थितियां भी बनी रहती हैं। मॉनसून में कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा होती है जबकि कहीं कम बारिश और कहीं सूखे जैसे हालात दिखाई देते हैं।

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उत्तर भारत की अगर बात करें तो यहां तीन पर्वतीय राज्य हैं, जिनमें जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड आते हैं जबकि मैदानी इलाकों में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान शामिल हैं। देश के उत्तरी भागों में पिछली बार मानसून कमजोर रहा था।

पिछले चार सालों में मानसूनी बारिश

2014 - 89%

2015 - 86%

2016 - 97%

2017 - 95%

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मानसून सबसे आखिर में उत्तर भारत में ही पहुंचता है। हालांकि प्री-मानसून वर्षा की गतिविधियां मॉनसून के आने से पहले कभी-कभी होती रहती हैं। उत्तर भारत में मॉनसून वर्षा की मुख्यतः ट्रफ, पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से उठने वाले मौसमी सिस्टमों के चलते होती हैं। उत्तर भारत के राज्यों में मानसून 2018 के संभावित प्रदर्शन की बात करें तो यहां पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य मानसून वर्षा का अनुमान है। राजस्थान में पिछले दो वर्षों की तरह इस बार अत्यधिक मॉनसून वर्षा नहीं होगी बल्कि सामान्य बारिश की संभावना है।

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दिल्ली, अमृतसर, चंडीगढ़, आगरा और जोधपुर सहित सभी प्रमुख शहरों में मॉनसून 2018 में सामान्य वर्षा के आसार हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर में मॉनसून 2018 में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। स्काइमेट ने अनुमान लगाया है वाराणसी, गोरखपुर और लखनऊ में कुछ अधिक वर्षा होगी। जबकि श्रीनगर, शिमला, मनाली और देहारादून में इस बार सामान्य या सामान्य से अच्छी बारिश होने की संभावना है।

पिछले दो वर्षों में राजस्थान को छोड़कर सभी मैदानी राज्यों में मॉनसून वर्षा में कमी रही। जबकि पर्वतीय राज्यों में 2016 में मॉनसून सामान्य से कुछ कमजोर रहा था लेकिन 2017 में मॉनसून का प्रदर्शन सामान्य रहा था।

कृषि के लिए है महत्वपूर्ण

मानसून कृषि के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आधी से ज्यादा खेती-बाड़ी मानसूनी बारिश पर ही निर्भर रहती है। जहां सिंचाई के साधन हैं वहां के लिए भी मानसूनी बारिश जरूरी है, क्योंकि बारिश नहीं होगी तो नदियां-झीलें भी सूख जाएंगी जहां से सिंचाई के लिए पानी आता है। देश में गर्मी की शुरुआत होते ही किसान मानसून पर टकटकी लगाकर बैठ जाते हैं। लेकिन मानसून एक ऐसी अबूझ पहेली है जिसका अनुमान लगाना बेहद जटिल है।

कारण यह है कि भारत में विभिन्न किस्म के जलवायु जोन और उप जोन हैं। हमारे देश में 127 कृषि जलवायु उप संभाग हैं और 36 संभाग हैं। हमारा देश विविध जलवायु वाला है। समुद्र, हिमालय और रेगिस्तान मानसून को प्रभावित करते हैं। इसलिए मौसम विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद मौसम के मिजाज को सौ फीसदी भांपना अभी भी मुश्किल है।

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