तेरह राज्यों की राजधानियों में पीने के पानी का एक भी सैंपल मानक के अनुरूप नहीं

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत देश के तेरह राज्यों की राजधानियों में नलों से पेयजल का एक भी नमूना मानक के अनुरूप नहीं।

तेरह राज्यों की राजधानियों में पीने के पानी का एक भी सैंपल मानक के अनुरूप नहीं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत देश के तेरह राज्यों की राजधानियों में नलों से पेयजल का एक भी नमूना मानक के अनुरूप नहीं।

भारतीय मानक ब्यूरो ने देश के 20 राज्यों की राजधानियों में नलों से पेयजल के नमूने लेकर जांच की तो मुंबई को छोड़कर किसी भी राजधानी में पेयजल के नमूने मानक के अनुरूप नहीं मिले। सबसे बुरा हाल तो दिल्ली का रहा, जो सूची में सबसे निचले पायदान पर है। जहां की हवा के साथ-साथ पेयजल मानक के अनुरूप न होने से संकट खड़ा हो गया है।

केन्द्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय के तहत आने वाले भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई समेत बड़े शहरों में नलों से आपूर्ति होने वाला पीने का पानी 11 गुणवत्ता मानकों में से लगभग 10 में विफल रहा।

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भारत में 70 प्रतिशत पानी दूषित

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 70 प्रतिशत पानी दूषित है और पेयजल स्वच्छता गुणांक की 122 देशों की सूची में भारत का स्थान 120वां है।

बीस राज्यों की राजधानियों में से, सिर्फ मुंबई में नल से सप्लाई होने वाले पानी को सभी 11 मानकों पर खरा पाया गया जबकि अन्य शहरों के पानी के नमूने एक या एक से अधिक मानकों में खरे नहीं उतरे।

रिपोर्ट जारी करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए केन्द्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि सभी को स्वच्छ पेयजल मिले इस कवायद का यही उद्देश्य है।

जल संकट का सबसे बुरा दौर

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भारत इतिहास में जल संकट के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। जबकि हर साल दो लाख लोग साफ पीने का पानी न मिलने से अपनी जान गंवा देते हैं।

केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि तीसरे चरण में पूर्वोत्तर के राज्यों और केंद्रीय आवास एवं शहरी मंत्रालय द्वारा चयनित स्मार्ट सिटीज को जांचा गया, जिसकी रिपोर्ट 15 जनवरी, 2020 तक आने की उम्मीद है। चौथे चरण में सभी जिला मुख्यालयों में पाइप से सप्लाई पेयजल की सप्लाई को जांचा जाएगा जो 15 अगस्त, 2020 तक पूरा होने की उम्मीद है।

भारतीय मानक ब्यूरो की रिपोर्ट में बताया गया है कि ये मानक गंध, कुल कठोरता, क्लोराइड, फ्लोराइड, अमोनिया, बोरोन और कोलीफॉर्म (एक तरह के बैक्टीरिया) जैसे थे जिस पर पानी को उपयुक्त नहीं पाया गया।


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