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बीते तीन वर्षों में रेल परिसरों, गाड़ियों में अपराध के 83 हजार से अधिक मामले सामने आए 

नई दिल्ली (भाषा)। देश की जीवनरेखा कही जाने वाली भारतीय रेल के परिसरों एवं ट्रेनों में पिछले तीन वर्षों में अपराध के 83,000 से अधिक मामले सामने आए और कई मामलों में रेलवे के कर्मचारी ही संलिप्त पाए गए।

रेल राज्य मंत्री राजन गोहेन ने बीते बुधवार को लोकसभा में एक सदस्य के सवाल के जवाब में जो आंकड़ा पेश किया, उसके अनुसार साल 2014, 2015 और 2016 में भारतीय रेल में भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध के 83,765 मामले दर्ज किए गए।

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यही नहीं, इन तीन वर्षों में अपराध के विभिन्न मामलों में रेल विभाग के 466 कर्मचारी संलिप्त पाए गए, हालांकि ज्यादातर मामलों में बाहरी लोग शामिल थे।

रेलों में पुलिस व्यवस्था करना राज्य सरकार का विषय है और चलती गाड़ियों एवं रेल परिसरों में अपराधों की रोकथाम करना, मामलों को दर्ज करना, उनकी जांच करना और कानून-व्यवस्था को बनाए रखना राज्य सरकारों का विषय है। वे राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी), जिला पुलिस के माध्यम से इस जिम्मेदारी का निर्वहन करती हैं।
राजन गोहेन, रेल राज्य मंत्री

उन्होंने कहा, ‘‘रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) यात्रियों को बेहतर ढंग से सुरक्षा मुहैया कराने तथा उनसे संबंधित मामलों के लिए जीआरपी के कार्यों में सहायता करती है।'' रेल राज्य मंत्री ने कहा, ‘‘रेल परिसरों और चलती गाडियों में अपराधों की रोकथाम करने, मामलों को दर्ज करने, उनकी जांच करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी स्तरों पर राज्य पुलिस-जीआरपी प्राधिकारियों के साथ निकट संपर्क बनाए रखा जाता है।''

रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार साल 2014 में रेल परिसरों और चलती गाडियों में अपराध की 24,530 घटनाओं को लेकर भारतीय दंड संहिता के तहत मामले दर्ज किए गए। साल 2015 में अपराध की इन घटनाओं में इजाफा हुआ और कुल 30,222 मामले दर्ज किए गए। पिछले साल रेल परिसरों और गाडियों में अपराध की 29,013 घटनाएं दर्ज की गईं।

गोहेन ने कहा कि अपराध की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए रेल मंत्रालय की ओर से कई कदम भी उठाए गए जिनमें गाडियों को एस्कार्ट करना, सुरक्षा हेल्पलाइन (182) और ट्विटर हैंडल का परिचालन करना और लगभग 244 स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी रखना शामिल हैं।

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