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पद्म सम्मान से मिली गुमनाम चेहरों को पहचान

नई दिल्ली (भाषा)। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए पद्म सम्मान से चयनित 44 लोगों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री सम्मान से नवाजा। इस बार पद्मश्री से सम्मानित लोगों की सूची में ऐसे तमाम गुमनाम चेहरे भी शामिल थे जो लोकप्रियता की चकाचौंध से दूर शिक्षा, संगीत, साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे थे। राष्ट्रपति भवन में आज आयोजित सम्मान समारोह में मुखर्जी ने आध्यात्मिक गुरु सदगुरु जगदीश वासुदेव और गायक केजे यशुदास सहित 44 लोगों को ज्ञान, विज्ञान, साहित्य, संगीत और कला सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य के लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान के तौर पर दिये जाने वाले पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया।

इस श्रेणी में अप्रतिम और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण के लिए इस साल सात लोगों को चुना गया था। इस श्रेणी में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा को मरणोपरांत पद्म विभूषण से आज नवाजा गया। दिवंगत पटवा की धर्मपत्नी ने राष्ट्रपति मुखर्जी से सम्मान ग्रहण किया। चो एस रामास्वामी को साहित्य, शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में (मरणोपरांत) काशी विश्वनाथ मंदिर के आचार्य देवीप्रसाद द्विवेदी को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में, वाद्ययंत्र मोहनवीणा के आविष्कारक विश्वमोहन भट्ट को कला एवं संगीत के क्षेत्र में और जैन धर्मगुर जैनाचार्य रत्नासंदेरसुरी महाराज को आध्यात्म के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया। सम्मान समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के अनेक मंत्री और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी मौजूद थीं। पदश्री से सम्मानित चर्चित चेहरों में क्रिकेटर विराट कोहली, ओलंपियन दीपा कर्मकार, साक्षी मलिक, शेफ संजीव कपूर, पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल और गायक कैलाश खेर शामिल रहे।

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मीडिया की सुर्खियों से दूर विभिन्न क्षेत्रों में बतौर ‘गुमनाम हीरो' उल्लेखनीय कार्य कर रहे लोगों में फिल्म जगत की इतिहासकार भावना सोमैया, उड़ीसा के उभरते स्थानीय गायक जितेन्द्र हरिपाल, पूर्वोत्तर राज्यों में 1970 से महिलाओं की एकमात्र पत्रिका का प्रकाशन कर रहीं असम की 81 वर्षीय इला मोहम्मद और पश्चिम बंगाल में अग्निकांड की घटनाओं में स्वयंसेवी के तौर पर कार्यरत बिपिन गनात्रा भी पद्मश्री से सम्मानित होने वालों में शामिल हैं। गनात्रा पिछले 40 साल से कोलकाता में अग्निकांड की प्रत्येक घटना में दमकलकर्मियों के साथ पीड़ितों की मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में ही आग लगने की एक घटना में अपने भाई की मौत के बाद वह इस मुहिम में लगे हैं।

इसी प्रकार उड़ीसा में ‘रांगाबाती की आवाज' के नाम से लोकप्रिय हरिपाल को प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण बचपन में ही स्कूल छोड़ना पड़ा था। हरिपाल की गायन प्रतिभा तब सामने आई जब उनका गाया गीत ‘रांगाबाती' उड़ीसा में खासा चर्चित हुआ। इसके अलावा तेलंगाना के चिंताकिंडी मल्लेशाम को पोचमपल्ली सिल्क साड़ी के निर्माण में समय और मानवश्रम कम करने वाली मशीन लक्ष्मी एसयू का आविष्कार करने के कारण राष्ट्रपति ने पद्मश्री से सम्मानित किया। उनकी मशीन से पोचमपल्ली साडी की 60 प्रतिशत औद्योगिक इकाइयों का काम आसान हुआ। वहीं सड़क हादसों में पीड़ितों को चिकित्सा सहायता मुहैया कराने की मुहिम में लगे गुजरात के सुब्रतो दास और कर्नाटक में कम कीमत पर पर्यावरण हितैषी 100 से अधिक पुल बनाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और ‘सेतुबंधु' के नाम से लोकप्रिय गिरीश भारद्वाज भी पद्मश्री से सम्मानित होने वालों में शुमार हैं।

नेपाल की अनुराधा कोइराला को जबरन वेश्यावृत्ति में धकेल दी गयीं। 12 हजार महिलाओं का पुनर्वास कराने की सफल मुहिम चलाने के कारण और ‘अनार दादा' के नाम से लोकप्रिय गुजरात के दिव्यांग किसान जेनाभाई दर्गाभाई पटेल को अपने गृह जिले बनासकांठा जिले को देश में अनार का सर्वाधिक उत्पादक क्षेत्र बनाने के कारण पद्मश्री से सम्मानित किया गया। विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्यों के लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान के रूप में तीन श्रेणी वाले पद्म पुरस्कारों में अप्रतिम उत्कृष्ट सेवाओं के लिये पद्म विभूषण, शीर्ष स्तर की उल्लेखनीय सेवाओं के लिये पद्म भूषण और किसी भी क्षेत्र में श्रेष्ठ योगदान के लिये पद्मश्री सम्मान दिया जाता है. इस साल पद्म पुरस्कारों के लिये जनवरी में चयनित लोगों में 7 पद्म विभूषण, 7 पद्म भूषण और 75 पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया। इनमें 70 पुरष, 19 महिलाएं, 5 विदेशी मूल या अनिवासी भारतीय शामिल हैं जबकि 6 को मरणोपरांत यह सम्मान दिया गया।

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